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भाषा विवाद पर डर गए उद्धव ठाकरे? स्टालिन जैसा हाल न हो जाए इसलिए पेश की सफाई, कहा- हम हिंदी विरोधी नहीं...

महाराष्ट्र में भाषा विवाद को लेकर चल रहे विरोध पर उद्धव ठाकरे गुट ने अपनी सफाई पेश की है. उनका कहना है कि वह हिंदी भाषा का खिलाफ नहीं है, बल्कि प्राइमरी स्कूलों में इसे तीसरी भाषा के रूप में शामिल किए जाने के विरोध में हैं. यह बयान उद्धव ठाकरे गुट के प्रवक्ता संजय राउत की तरफ से आया है.

भाषा विवाद पर डर गए उद्धव ठाकरे? स्टालिन जैसा हाल न हो जाए इसलिए पेश की सफाई, कहा- हम हिंदी विरोधी नहीं...
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महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर राज ठाकरे के साथ कंधा मिलाकर खड़े हुए उद्धव ठाकरे अब सफाई पेश करते हुए नजर आ रहे हैं. बता दें कि शिवसेना उद्धव गुट की तरफ से प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में फडणवीस सरकार द्वारा प्राइमरी स्कूलों में हिंदी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने के विरोध पर कहा है कि हम हिंदी के विरोध में नहीं थे, बल्कि इसको तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने पर विरोध जताया था. पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिए अपना बयान दिया है.

'हमारा रुख ऐसा नहीं, हम हिंदी बोलते हैं' 

शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के प्रवक्ता संजय राउत ने एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिए कहा कि 'दक्षिण के कई राज्य इस मसले पर वर्षों से आपस में लड़ रहे हैं. उनके वहां हिंदी का विरोध करने का मतलब यह है कि न वह हिंदी बोलेंगे और न ही बोलने देंगे, हमारे यहां महाराष्ट्र में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. हमारा रुख उनसे बिल्कुल अलग है. हम हिंदी बोलते हैं, लेकिन प्राइमरी स्कूलों में जबरदस्ती थोपे जाने का हम विरोध करते हैं. हमारी लड़ाई यही सीमित नहीं है.'

संजय राउत ने स्टालिन को दी बधाई? 

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इस प्रेस कांफ्रेंस के दौरान संजय राउत ने स्टालिन को उनकी लड़ाई के लिए शुभकामनाएं दी. राउत ने कहा कि 'एमके स्टालिन ने हमें इस जीत पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि वह इससे सीख लेंगे. हमारी ओर से उन्हें शुभकामनाएं. हमने यहां किसी को हिंदी बोलने से नहीं रोका है, क्योंकि यहां हिंदी फिल्में हिंदी थिएटर और हिंदी संगीत है.' 

महाराष्ट्र भाषा विवाद पर एमके स्टालिन ने क्या कहा? 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपनी सोशल मीडिया X पोस्ट के जरिए लिखा कि 'भाषा अधिकार संघर्ष, जो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और तमिलनाडु के लोगों द्वारा हिंदी को थोपे जाने के विरुद्ध पीढ़ी दर पीढ़ी चलाया जा रहा है, अब राज्य की सीमाओं को पार कर चुका है और महाराष्ट्र में विरोध के तूफान की तरह घूम रहा है. हिंदी थोपे जाने के खिलाफ भाई उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में आज मुंबई में आयोजित विजय रैली का उत्साह और शक्तिशाली भाषण हमें अपार उत्साह से भर देता है.'

उद्धव गुट ने किया था तीसरी भाषा का विरोध?

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महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार द्वारा प्राइमरी स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप हिंदी को लागू करने का कड़ा विरोध जताया था. जिसके बाद बाद सरकार ने इसे रद्द करते हुए भविष्य में लागू करने पर शिक्षाविद डॉक्टर नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की. फडणवीस सरकार के बैकफुट पर आने के बाद 5 जुलाई को मराठी समुदाय की जीत बताते हुए एक संयुक्त रैली का आयोजन किया. जिसमें उद्धव और राज ठाकरे दोनों करीब 20 साल बाद एक मंच पर मिले. 

क्या है महाराष्ट्र में तीसरी भाषा विरोध का मामला? 

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दरअसल, महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने 16 और 17 अप्रैल को प्रदेश में कक्षा 1 से पांचवी तक के छात्रों के लिए तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य कर दिया था. सरकार द्वारा यह फैसला राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर लागू किया गया था. यह पॉलिसी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के नए करिकुलम को ध्यान में रखते हुए लागू की गई थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद अपडेटेड गाइडलाइंस जारी की गई. जिसके बाद मराठी और अंग्रेजी मीडियम में कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि एक क्लास में कम से कम 20 स्टूडेंट्स हिंदी से ज्यादा दूसरी भाषा को चुनें. ताकि स्कूल में दूसरी भाषा की टीचर भी अपॉइंट कराई जा सके. वहीं अगर दूसरी भाषा चुनने वाले स्टूडेंट्स का नंबर 20 से कम है, तो वह भाषा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जाएगी. 

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