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दिल्ली शराब नीति केस में नया मोड़, हाईकोर्ट ने CBI को दी बड़ी राहत; जानें सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति घोटाला मामले में सीबीआई को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने जांच में खामियों को लेकर सीबीआई अधिकारी की जांच कराने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है.

दिल्ली शराब नीति केस में नया मोड़, हाईकोर्ट ने CBI को दी बड़ी राहत; जानें सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?
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दिल्ली की चर्चित शराब नीति मामले में सोमवार को एक अहम कानूनी मोड़ देखने को मिला. दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को फिलहाल बड़ी राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें जांच में कथित खामियों के कारण सीबीआई अधिकारी के खिलाफ जांच कराने की बात कही गई थी. अदालत के इस फैसले से मामले की कानूनी दिशा फिलहाल बदलती हुई दिखाई दे रही है.

ट्रायल कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब तक इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक ट्रायल कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी से जुड़े केस में कोई फैसला न सुनाए. अदालत का यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस केस में कई आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग एजेंसियों की जांच चल रही है.

ट्रायल कोर्ट के फैसले को सीबीआई ने दी चुनौती

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दरअसल, हाईकोर्ट सीबीआई की उस अपील पर सुनवाई कर रहा था जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है. ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था. अदालत ने उस समय सीबीआई की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा था कि चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण कमियां हैं.

सीबीआई ने कोर्ट में रखे अपने तर्क

सीबीआई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यह भ्रष्टाचार का साफ मामला है. उन्होंने दलील दी कि इस केस में रिश्वत और बैठकों से जुड़े कई फोरेंसिक सबूत मौजूद हैं. मेहता ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी ने इस मामले में बेहद बारीकी से सबूत जुटाए हैं और वह अदालत के सामने इन तथ्यों को साबित करना चाहते हैं.

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सभी आरोपियों को जारी हुआ नोटिस

जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद अरविंद केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. अदालत ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही इस मामले में आगे का फैसला किया जाएगा.

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बताते चलें कि अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी. राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों में इस केस पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है. फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले ने मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

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