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पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा फैसला, CAA लागू करने के लिए नई समिति का ऐलान

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक सशक्त समिति बनाई है.

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा फैसला, CAA लागू करने के लिए नई समिति का ऐलान
Narendra Modi/ Mamata Banerjee
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो चुकी है. राजनीतिक दलों ने मैदान संभाल लिया है और रणनीतियों का दौर जारी है. इसी बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के लागू होने की निगरानी के लिए एक 'सशक्त समिति' का गठन किया है. चुनाव से पहले उठाया गया यह कदम सियासी गलियारों में नई बहस को जन्म दे रहा है.

सशक्त समिति का क्या है उद्देश्य?

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार यह समिति वर्ष 2024 में अधिसूचित नियमों के तहत बनाई गई है. इसका मुख्य काम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदनों की जांच करना और अंतिम निर्णय लेना होगा. यानी अब लंबित आवेदनों पर अंतिम मुहर यही समिति लगाएगी. समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि हर आवेदन नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6B के तहत तय शर्तों को पूरा करता हो.

कैसी है समिति की संरचना?

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समिति की संरचना भी काफी व्यापक रखी गई है. इसके अध्यक्ष पश्चिम बंगाल में जनगणना कार्य निदेशालय के डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल होंगे. प्रमुख सदस्यों में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो का एक वरिष्ठ अधिकारी, क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी द्वारा नामित अधिकारी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि और पोस्ट मास्टर जनरल कार्यालय का अधिकारी शामिल होगा. इसके अलावा राज्य सरकार के गृह विभाग से एक प्रतिनिधि और रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय का सदस्य विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में जुड़ा रहेगा. इस बहुस्तरीय ढांचे का मकसद प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाना है.

नागरिकता पाने की क्या है पात्रता ?

पात्रता की बात करें तो नियम 11A के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के वे लोग जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर चुके थे, वे नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक रखी गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और रिकॉर्ड सुरक्षित रहे.

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मतुआ समुदाय और सियासी महत्व

राजनीतिक दृष्टि से यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है. बंगाल में मतुआ समुदाय की बड़ी आबादी है, जिनमें से अनेक परिवार बांग्लादेश से विस्थापित होकर आए थे. लंबे समय से यह समुदाय स्थायी नागरिकता की मांग करता रहा है. ऐसे में समिति का गठन उनके लिए उम्मीद की नई किरण के रूप में देखा जा रहा है. दूसरी ओर सत्तारूढ़ टीएमसी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee ने लोगों से CAA शिविरों से दूरी बनाए रखने की अपील की है. वहीं मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पहले ही साफ कह चुकी हैं कि वह राज्य में CAA लागू नहीं होने देंगी. इस बयानबाजी ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है.

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बताता चलें कि केंद्र सरकार का कहना है कि सशक्त समिति का उद्देश्य जमीनी स्तर पर फैले भ्रम और लंबित मामलों को दूर करना है. चुनाव से पहले यह फैसला कितना असर डालेगा, यह आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है. जनता की नजर अब इस पर टिकी है कि प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी तेजी और पारदर्शिता से आगे बढ़ती है.

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