खटीमा: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने खेत में चलाया हल, धान रोपाई कर किसानों के श्रम को किया नमन
सीएम धामी ने अपनी इस गतिविधि की जानकारी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की. धामी ने अपने एक्स हैंडल पर एक के बाद एक तीन पोस्ट कर धान रोपाई का महत्व समझाया. लिखा, "इस अवसर पर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा 'हुड़किया बौल' के माध्यम से भूमि के देवता भूमियां, पानी के देवता इंद्र, और छाया के देव मेघ की वंदना भी की."
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को खटीमा में धान की रोपाई की. इस दौरान उन्होंने किसानों के परिश्रम, त्याग और समर्पण को नमन किया. मुख्यमंत्री ने नगरा तराई क्षेत्र स्थित अपने खेत में धान रोपा.
सीएम धामी ने की धान की रोपाई
सीएम ने कहा कि खेतों में काम करने से उनकी पुरानी यादें ताजा हो गईं. उन्होंने किसानों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ और संस्कृति व परंपराओं का संवाहक बताया.
सीएम धामी ने धान रोपाई का महत्व
सीएम धामी ने अपनी इस गतिविधि की जानकारी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की. धामी ने अपने एक्स हैंडल पर एक के बाद एक तीन पोस्ट कर धान रोपाई का महत्व समझाया. लिखा, "इस अवसर पर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा 'हुड़किया बौल' के माध्यम से भूमि के देवता भूमियां, पानी के देवता इंद्र, और छाया के देव मेघ की वंदना भी की."
राज्य के अन्नदाताओं ने सदैव इस पावन भूमि का अपने अथक परिश्रम से श्रृंगार किया है। अपनी जड़ों से लगाव स्वयं के अस्तित्व और व्यक्तित्व का बोध कराता है। pic.twitter.com/6fzKPy9y98
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 5, 2025 Advertisement
उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत "हुड़किया बौल" (धान रोपाई के दौरान गाया जाने वाला लोकगीत) के जरिए भूमि के देवता भूमियां, जल के देवता इंद्र और छाया के देवता मेघ की वंदना करने की परम्परा है.
खटीमा के नगरा तराई में की सीएम धामी ने धान की रोपाई
अपनी दूसरी पोस्ट में सीएम ने बताया कि वो किस जगह पर रोपाई कर रहे हैं. उन्होंने लिखा, "खटीमा के नगरा तराई में अपने खेत में धान की रोपाई कर किसानों के श्रम, त्याग और समर्पण को अनुभव कर पुराने दिनों का स्मरण किया. अन्नदाता न केवल हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं बल्कि संस्कृति और परंपरा के संवाहक भी हैं."
खटीमा के नगरा तराई में अपने खेत में धान की रोपाई कर किसानों के श्रम, त्याग और समर्पण को अनुभव कर पुराने दिनों का स्मरण किया। अन्नदाता न केवल हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं बल्कि संस्कृति और परंपरा के संवाहक भी हैं। pic.twitter.com/2ctv5O6v3p
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 5, 2025
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इस अवसर पर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा "हुड़किया बौल" के माध्यम से भूमि के देवता भूमियां, पानी के देवता इंद्र, छाया के देव मेघ की वंदना भी की। pic.twitter.com/xC4WP0fA4o
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 5, 2025
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अंत में एक वीडियो क्लिप पोस्ट की जिसमें वो कृषकों के बीच बैल हांकते और धान रोपाई करते दिख रहे हैं. इस क्लिप के साथ उन्होंने लिखा, राज्य के अन्नदाताओं ने सदैव इस पावन भूमि का अपने अथक परिश्रम से श्रृंगार किया है. अपनी जड़ों से लगाव स्वयं के अस्तित्व और व्यक्तित्व का बोध कराता है.
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