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झारखंड को 'जमाई टोला' से मुक्ति के लिए तीसरी लड़ाई की जरूरत है: गिरिराज सिंह का हेमंत सरकार पर हमला

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी वंशवाद की बदौलत राजनीति और सरकार में आई थीं. वंशवाद और लोकतंत्र कभी एक-दूसरे के पूरक नहीं हो सकते.

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26 Jun 2025
( Updated: 11 Dec 2025
03:55 AM )
झारखंड को 'जमाई टोला' से मुक्ति के लिए तीसरी लड़ाई की जरूरत है: गिरिराज सिंह का हेमंत सरकार पर हमला
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केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने 50 साल पहले देश में लागू हुए आपातकाल को लेकर कांग्रेस पार्टी और झारखंड में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के मुद्दे पर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर जोरदार जुबानी हमले किए हैं. 

गिरिराज सिंह का हेमंत सरकार पर हमला

झारखंड प्रदेश भाजपा कार्यालय में गुरुवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के 'जमाई टोले' बसा दिए हैं और इसके कारण राज्य में आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है. 

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'जमाई टोला' से मुक्ति के लिए तीसरी लड़ाई की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1975 में इंदिरा गांधी के शासनकाल में थोपे गए आपातकाल के खिलाफ देश ने आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ी थी और आज झारखंड को 'जमाई टोला' से मुक्ति दिलाने के लिए आजादी की तीसरी लड़ाई की जरूरत है. वह राज्य के युवाओं से इस लड़ाई में आगे आने की अपील करते हैं. 

गिरिराज सिंह ने कहा कि आज देश में 50 वर्ष से कम उम्र वाले लोगों की आबादी 105 करोड़ है, जिन्हें यह बताने की जरूरत है कि इस देश में इंदिरा गांधी नामक प्रधानमंत्री हुई थीं, जिन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ फैसला आने के बाद असंवैधानिक तरीके से आपातकाल लागू कर लोकतंत्र की हत्या कर दी थी. उस दौरान दो लाख से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी जुर्म के जेल में डाल दिया गया था. तानाशाह सरकार ने 25 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी थी. लोगों को जबरन पकड़-पकड़कर नसबंदी कराई गई थी. 

वंशवाद की बदौलत राजनीति और सरकार में आई थीं इंदिरा 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी वंशवाद की बदौलत राजनीति और सरकार में आई थीं. वंशवाद और लोकतंत्र कभी एक-दूसरे के पूरक नहीं हो सकते. 

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उन्होंने कहा कि आज भले ही मस्जिदों से कांग्रेस के पक्ष में फतवे जारी किए जाते हैं, लेकिन आपातकाल के दौरान इंदिरा जी ने मस्जिदों और मंदिरों पर हमले करवाए थे. मस्जिदों से उस वक्त 77 हजार लोग विस्थापित हुए थे. आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस सरकार के उस कुकृत्य के लिए देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए. 

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