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झारखंड: शराब घोटाले के बाद अब कोचिंग घोटाले में घिरी झारखंड सरकार, भाजपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

भाजपा प्रवक्ता ने इस पूरे घटनाक्रम को “शिक्षा के नाम पर कमीशन का खेल” बताते हुए कहा कि हेमंत सरकार की नीतियों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को पहले ही खोखला कर दिया है और अब यह योजना आदिवासी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है.

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31 Jul 2025
( Updated: 31 Jul 2025
10:57 AM )
झारखंड: शराब घोटाले के बाद अब कोचिंग घोटाले में घिरी झारखंड सरकार, भाजपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने हेमंत सोरेन सरकार पर आदिवासी छात्रों की शिक्षा योजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह पूर्व में शराब घोटाले को अंजाम दिया गया, उसी तर्ज पर अब सरकार “अनुसूचित जनजाति शिक्षण उत्थान कार्यक्रम” के नाम पर एक और कोचिंग घोटाले की तैयारी में है. 

शराब घोटाले के बाद ‘कोचिंग घोटाले’ की बारी

उन्होंने आरोप लगाया कि ट्राइबल वेलफेयर कमिश्नर की ओर से जारी टेंडर में 300 एसटी छात्रों को नीट और जेईई की कोचिंग दिलाने के लिए विभिन्न संस्थानों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक विशेष कोचिंग संस्थान ‘फिजिक्स वाला’ का नाम सामने लाकर पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए गए हैं. 

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अजय साह ने कहा कि विभागीय मंत्री और अधिकारियों ने टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने से पहले जिस तरह प्रेस विज्ञप्तियों और बयानों में ‘फिजिक्स वाला’ का नाम लिया, उससे साफ हो जाता है कि पूरा खेल पहले से तय है. उन्होंने कहा कि यह वैसा ही है जैसे शराब घोटाले में ठेका देने से पहले ही कंपनी का नाम सामने आ गया था और बाद में वही कंपनी ठेका प्राप्त करती दिखाई दी. 

शिक्षा के नाम पर कमीशन का खेल

भाजपा प्रवक्ता ने इस पूरे घटनाक्रम को “शिक्षा के नाम पर कमीशन का खेल” बताते हुए कहा कि हेमंत सरकार की नीतियों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को पहले ही खोखला कर दिया है और अब यह योजना आदिवासी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. 

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भाजपा ने टेंडर प्रक्रिया रोकने की मांग 

उन्होंने कहा कि ऐसे छात्रों के लिए उन्हीं संस्थानों का चयन होना चाहिए, जो वाकई गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की क्षमता रखते हों, न कि वे संस्थान जो कमीशन की दौड़ में आगे हों. भाजपा ने इस टेंडर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है. 

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पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकार की अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया, तो इसका असर सीधे तौर पर राज्य के आदिवासी छात्रों के करियर और भरोसे पर पड़ेगा. 

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