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UP की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है? डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिले किसान नेता राकेश टिकैत

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मुलाकात की. दोनों ने इसे एक शिष्टाचार मुलाकात बताया. पर क्या से सच में एक शिष्टाचार मुलाकात है? चलिए समझते है इस मुलाकात की राजनीतिक समीकरण

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29 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:14 AM )
UP की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है? डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिले किसान नेता राकेश टिकैत
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है. ये बात इसलिए क्योंकि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पहुंचे और दोनों ने मुलाकात की. इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया. जहां किसानों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. पर अब ये राजनीतिक पारा हाई कर रहा है क्योंकि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं. ऐसे में किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दे एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. इस मुलाकात के सियासी और सामाजिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं.
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राकेश टिकैत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं और किसान आंदोलन के प्रमुख चहरे हैं. उनकी नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लंबा आंदोलन चलाया था, और इन कानूनों को निरस्त करने पर सराकर को मजबूर किया गया. ऐसे में, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ टिकैत का ये मेल-मिलाप कई अटकले पैदा कर रहा है. 

बृजेश पाठक-राकेश टिकैत ने दी जानकारी
राकेश टिकैत ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से किसानों के हितों और जनसामान्य से जुड़े मुद्दों पर बात की. टिकैत ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, “आज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी से उनके लखनऊ स्थित आवास पर मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और किसानों व जनहित के विषयों पर चर्चा की.” 
वहीं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने राकेश टिकैत से मुलाकात के बाद बताया कि भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता राकेश सिंह टिकैत से भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना है.  

क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?
इधर इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में शोर है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ हाल-चाल जानने तक सीमित नहीं है.  चूकिं राकेश टिकैत किसानों के एक बड़े नेता है और उनकी किसानों में बहुत अच्छी पैठ भी है तो इससे किसानों को साधने की कोशिश की जा सकती है. किसान आंदोलन में ये देखा जा चुका है कि जब राकेश टिकैत के आंखों में आंसू आया तो देश भर के किसानों में गुस्सा देखने को मिला था. गुस्सा इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते किसान आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया था. इसलिए यह मुलाकात कई मायनों में अहम है. 

कृषि विशेषज्ञों की राय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय और किसानों के बीच भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास हो सकती है.  गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले राकेश टिकैत ने किसानों से बीजेपी को वोट न देने की अपील की थी, जिसका असर क्षेत्र की कुछ सीटों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला था.  ऐसे में यह बैठक दोनों पक्षों के बीच संवाद और संभावित सुलह की कोशिश के रूप में देखी जा रही है. 

दोनों नेताओं में क्या है समानता?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, जो चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण जैसे अहम विभागों का भी नेतृत्व करते हैं, राज्य में एक लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं.  उनकी जमीनी पकड़ और मजबूत जनसंपर्क क्षमता उन्हें भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल करती है. 
दूसरी ओर, राकेश टिकैत का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विशेषकर जाट और किसान समुदाय के बीच गहरा प्रभाव है.  भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता के रूप में उन्होंने गन्ना मूल्य वृद्धि, भूमि अधिग्रहण और किसानों से जुड़े अन्य अहम मुद्दों पर कई बड़े आंदोलनों का सफल नेतृत्व किया है. 

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किसानों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में अहम कदम
यह कदम पंचायत चुनावों से पहले किसानों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की दिशा में एक रणनीतिक पहल माना जा सकता है.  पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना भुगतान में देरी, बिजली दरों में बढ़ोतरी, और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास जैसे विषय लंबे समय से चर्चा में रहे हैं.  ऐसे में इस मुलाकात के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के बीच इन मुद्दों को लेकर सार्थक और सकारात्मक संवाद आगे बढ़ेगा. 

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