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CMO एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, 15 लाख रुपये की मांग की थी

गुरुग्राम एंटी करप्शन ब्यूरो ने पलवल में बड़ी कार्रवाई की. ज़िला सिविल सर्जन डॉ. जय भगवान जाटान एक लाख रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए.

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05 Jul 2025
( Updated: 09 Dec 2025
01:27 PM )
CMO एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, 15 लाख रुपये की मांग की थी
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हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पलवल के जिला सिविल सर्जन (CMO) डॉ. जय भगवान जाटान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी उनके सरकारी आवास पर छापेमारी के दौरान हुई, जहां अलमारी से तीन लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए.

15 लाख की रिश्वत की मांग का आरोप

ACB अधिकारियों के मुताबिक, डॉ. जाटान पर आरोप है कि उन्होंने पलवल के तीन व्यवसायियों से एक निजी ट्रॉमा सेंटर – सनराइज ट्रॉमा अस्पताल – चलाने की अनुमति देने के बदले 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी. शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने करीब 20 दिन पहले 6 लाख रुपये नकद दिए थे और 2 जुलाई को एक लाख रुपये और लिए गए. इसके बावजूद डॉ. जाटान लगातार शेष 8 लाख की मांग कर रहे थे और दबाव बना रहे थे.

शिकायत मिलने पर ACB ने जाल बिछाया और डॉ. जाटान को रंगे हाथ पकड़ लिया. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस भ्रष्टाचार में और कौन-कौन शामिल है.

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1988 बैच के अधिकारी, पहले भी हो चुके हैं सस्पेंड

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, डॉ. जय भगवान 1988 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं. वह नूंह में एसएमओ और जींद में सीएमओ रह चुके हैं. इन दोनों जगहों पर उनके निलंबन की खबरें सामने आई थीं, हालांकि कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं.

जय भगवान हिसार में बतौर मेडिकल ऑफिसर नियुक्त हुए थे और बाद में कैथल, सोनीपत, करनाल, जींद समेत कई जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. जिला जींद में लापरवाही बरतने के कारण उन्हें निलंबित भी किया गया था. विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, वह वर्ष 2027 में रिटायर होने वाले थे.

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अस्पताल परिसर में मचा हड़कंप

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डॉ. जय भगवान की गिरफ्तारी के बाद जिला सिविल अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल है. हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डॉ. जय भगवान के व्यवहार और कामकाज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं.

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