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वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर सीएम योगी सख्त! यूपी के 5 जिलों से सबसे ज्यादा शिकायतें! कई अधिकारियों पर एक्शन की तैयारी!

यूपी की योगी सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की रिपोर्ट मांगी थी। इनमें अधिकतर जिलों के अधिकारियों ने कोई भी रिपोर्ट नहीं भेजी है। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेशानुसार इस मामले में सभी लापरवाह कर्मचारियों और अफसरों पर एक्शन की तैयारी है।

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर सीएम योगी सख्त! यूपी के 5 जिलों से सबसे ज्यादा शिकायतें! कई अधिकारियों पर एक्शन की तैयारी!
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वक्फ संशोधन बिल पर बहस जारी है। लोकसभा में आज इसे पेश किया जा रहा है। बहस के बाद इस बिल पर वोटिंग होगी। विपक्ष इस बिल के विरोध में है। कांग्रेस संसदीय दल की आज सुबह 9:30 बजे बैठक हुई। इसमें विधेयक के विरोध पर चर्चा हुई। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी सेक्युलर दलों को इसका विरोध करने को कहा है। इस बीच यूपी की योगी सरकार ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर बड़ी कार्रवाई की शुरुआत की है। यूपी के सभी जिलों के अधिकारियों से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का ब्यौरा मांगा गया था। लेकिन अधिकतर जिलों ने अभी तक यह रिपोर्ट नहीं भेजी है। ऐसे में अब योगी सरकार इन अधिकारियों पर बड़े एक्शन की तैयारी में है। वहीं यूपी के 5 जिलों में सबसे ज्यादा वक्फ बोर्ड से जुड़ी शिकायतें मिली हैं। तो चलिए जानते हैं कि यूपी में वक्फ बोर्ड की कुल कितनी संपत्तियां हैं। किन-किन जिलों के अधिकारियों पर गाज गिरने वाली है। आखिर क्या है वक्फ बिल का विवाद ? 

यूपी में वक्फ बोर्ड की कुल कितनी संपत्तियां ? 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यूपी में वक्फ बोर्ड की कुल 57,792 सरकारी संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें कई ऐसी संपत्तियां हैं। जिन्हें अवैध रूप से नियमों का उल्लंघन कर वक्फ बोर्ड में शामिल की गई हैं। इस मामले का खुलासा होने के बाद सरकार बड़े एक्शन की तैयारी में है। सबसे ज्यादा शिकायतें यूपी के इन पांच जिलों से आई हैं। इनमें शाहजहांपुर,रामपुर, अयोध्या,जौनपुर और बरेली में अवैध कब्जे की कई शिकायतें आई हैं। सरकार मामले की जांच पड़ताल कर इन जिलों में तैनात अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी में है। 

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की रिपोर्ट न भेजने वाले अधिकारियों पर होगा एक्शन

यूपी की योगी सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की रिपोर्ट मांगी थी।
इनमें अधिकतर जिलों के अधिकारियों ने कोई भी रिपोर्ट नहीं भेजी है। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेशानुसार इस मामले में सभी लापरवाह कर्मचारियों और अफसरों पर एक्शन की तैयारी है। 

क्या है वक्फ संशोधन विधेयक का विवाद ?

केंद्र की मोदी सरकार ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में सुधार और प्रबंधन को लेकर संशोधन की है। अभी तक वक्फ बोर्ड  अधिनियम 1995 के अंतर्गत मुसलमानों द्वारा दान की गई संपत्तियों को प्रबंधन समिति नियंत्रित करता है। लेकिन सरकार इसमें बदलाव कर इस नए कानून को पारित करना चाहती है। जिसको लेकर विपक्षी दल और मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। 

AIMIM प्रमुख ने इस बिल को मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने जैसा बताया 

वक्फ संशोधन बिल को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि "प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर लगाम लगाना।" वहीं कई मुस्लिम संगठनों ने कहा है कि "संशोधन की पारित हो जाने के बाद कलेक्टर राज अस्तित्व में आ जाएगा। वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी नहीं होगा। कौन सी संपत्ति वक्फ की है और कौन सी नहीं। इसके संबंध में आखिरी फैसला कलेक्टर करेगा।"

विपक्षी दलों ने इसे मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण बताया 
मुस्लिम संगठनों के साथ विपक्षी दल भी इस बिल का कड़ा विरोध जता रहे हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तो भाजपा सदस्यों से भी इस बिल के विरोध में वोट करने को कहा है। 
विपक्षियों ने कहा है कि यह बिल असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि "इस बिल के विरोध में सभी विपक्षी दल एकजुट है। सरकार का एजेंडा विभाजनकारी है और हम सब इसे हराने के लिए संसद में मिलकर काम करेंगे।"

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