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सीएम देवेंद्र फडणवीस ने तीन भाषा पॉलिसी को वापस लिया, जानें क्यों बैकफुट पर आ गई महाराष्ट्र सरकार?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों डिप्टी सीएम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन भाषा नीति को रद्द करने का आदेश दिया है. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले के दौरान कहा कि 'तीन भाषा नीति पर शिक्षाविद नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी. उसके बाद इस भाषा नीति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.'

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने तीन भाषा पॉलिसी को वापस लिया, जानें क्यों बैकफुट पर आ गई महाराष्ट्र सरकार?
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महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने 16 और 17 अप्रैल को जारी तीन भाषा नीति से जुड़े दो आदेश रद्द कर दिए हैं. बता दें कि इस आदेश के खिलाफ विपक्ष लगातार विरोध जता रहा था. जिसकी वजह से सरकार को पीछे हटना पड़ा. वहीं महाराष्ट्र कैबिनेट में शिवसेना शिंदे गुट के मंत्री गुलाबराव पाटील, संभुराज देसाई और दादा भुसे ने भी हिंदी भाषा अनिवार्यता को स्थगित करने की मांग की थी. ऐसे में अब उनकी मांग को स्वीकारते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इसे स्थगित करने का ऐलान कर दिया है. 

महाराष्ट्र सरकार ने तीन भाषा नीति को रद्द किया

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों डिप्टी सीएम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन भाषा नीति को रद्द करने का आदेश दिया है. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले के दौरान कहा कि 'तीन भाषा नीति पर शिक्षाविद नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी. उसके बाद इस भाषा पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.'

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महाराष्ट्र सीएम ने उद्धव ठाकरे पर लगाए आरोप 

महाराष्ट्र सीएम ने शिवसेना उद्धव गुटके प्रमुख उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि 'वह भी इस समिति में थे और उन्होंने ही यह अनुशंसा की थी. 14 सितंबर 2021 को यह रिपोर्ट सौंपी गई थी. 7 जनवरी 2022 को यह रिपोर्ट कैबिनेट में प्रस्तुत की गई. उद्धव ठाकरे की कैबिनेट ने इस पर हस्ताक्षर किए. इसलिए यह कहना गलत है कि उस रिपोर्ट को स्वीकार करते समय त्रिभाषा सूत्र मान्य नहीं किया गया था. उस दौरान माशेलकर समिति की रिपोर्ट को स्वीकार किया गया था. इस दौरान इसे लागू करने के लिए एक समिति भी बनाई गई थी. उसी समिति के अनुसार अब जो GR निकाले गए हैं, वे आए हैं. 2025 में पहला GR निकाला गया, जिसमें मराठी अनिवार्य भाषा थी, दूसरी अंग्रेज़ी और तीसरी हिंदी बताई गई. जब इस पर सवाल उठे, तो 17 जून को सरकार ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा कोई भी भारतीय भाषा हो सकती है.'

क्या है महाराष्ट्र में भाषा विवाद? 

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दरअसल, महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने 16 और 17 अप्रैल को प्रदेश में कक्षा 1 से पांचवी तक के छात्रों के लिए तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य कर दिया था. सरकार द्वारा यह फैसला राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर लागू किया गया था. यह पॉलिसी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के नए करिकुलम को ध्यान में रखते हुए लागू की गई थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद अपडेटेड गाइडलाइंस जारी की गई. जिसके बाद मराठी और अंग्रेजी मीडियम में कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि एक क्लास के कम से कम 20 स्टूडेंट्स हिंदी से ज्यादा दूसरी भाषा को चुनें. ताकि स्कूल में दूसरी भाषा की टीचर भी अपॉइंट कराई जा सके. वहीं अगर दूसरी भाषा चुनने वाले स्टूडेंट्स का नंबर 20 से कम है, तो वह भाषा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जाएगी. 

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