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झारखंड के भोगनाडीह में 'हूल दिवस' पर तीर-धनुष के बाद पुलिस-ग्रामीणों में संघर्ष

1855-56 में अंग्रेजों के खिलाफ हुई संथाल 'हूल' क्रांति के नायकों सिदो-कान्हू और अन्य शहीदों की याद में प्रति वर्ष 30 जून को उनके गांव भोगनाडीह में राज्य सरकार की ओर से राजकीय कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें सीएम भी शामिल होते हैं.इस वर्ष भी राजकीय कार्यक्रम होना है, जिसमें सीएम के प्रतिनिधि के तौर पर राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को भाग लेना है.

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30 Jun 2025
( Updated: 10 Dec 2025
05:23 PM )
झारखंड के भोगनाडीह में 'हूल दिवस' पर तीर-धनुष के बाद पुलिस-ग्रामीणों में संघर्ष
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झारखंड के साहिबगंज जिले स्थित भोगनाडीह में सोमवार को संथाल 'हूल' क्रांति दिवस पर आदिवासियों के एक समूह और पुलिस-प्रशासन के बीच जमकर झड़प हुई है.इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया है और आंसू गैस के गोले छोड़े हैं.

'हूल दिवस' पर पुलिस और ग्रामीणों में हुई झड़प

इस संघर्ष में कुछ पुलिसकर्मी और ग्रामीण घायल हुए हैं.पुलिस के तीन घायल जवानों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है.वहीं, हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.साहिबगंज के उपायुक्त हेमंत सती सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं.गांव में भारी तादाद में पुलिस बल की तैनाती की गई है.

शहीदों की याद में प्रति वर्ष 30 जून को होता है राजकीय कार्यक्रम 

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1855-56 में अंग्रेजों के खिलाफ हुई संथाल 'हूल' क्रांति के नायकों सिदो-कान्हू और अन्य शहीदों की याद में प्रति वर्ष 30 जून को उनके गांव भोगनाडीह में राज्य सरकार की ओर से राजकीय कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें सीएम भी शामिल होते हैं.इस वर्ष भी राजकीय कार्यक्रम होना है, जिसमें सीएम के प्रतिनिधि के तौर पर राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को भाग लेना है.लेकिन, राजकीय कार्यक्रम के समानांतर सिदो-कान्हू मुर्मू हूल फाउंडेशन नामक संगठन ने भी इसी स्थल पर अलग कार्यक्रम का ऐलान कर रखा है और इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को आमंत्रित किया गया है.

जिला प्रशासन ने कार्यक्रम की नहीं दी अनुमति 

जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी है.सोमवार को पुलिस-प्रशासन की टीम फाउंडेशन की ओर से स्मारक स्थल के पास लगाए गए टेंट-पंडाल को हटाने लगी तो लोग आक्रोशित हो गए.इसी दौरान दोनों ओर से संघर्ष शुरू हो गया.फाउंडेशन के समर्थकों की ओर से जहां तीर चलाए जाने की खबर है, वहीं पुलिस ने लाठियां भांजी.इसके बाद फाउंडेशन के लोगों ने स्मारक स्थल पर ताला लगा दिया है और ऐलान किया है कि अगर उनका कार्यक्रम नहीं होगा तो सरकारी कार्यक्रम भी नहीं होने दिया जाएगा.

टेंट-पंडाल लगा रहे 13 मजदूरों को पुलिस ने लिया हिरासत में 

इसके पहले रविवार को भी फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं और पुलिस-प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी थी.पुलिस-प्रशासन ने रविवार को फाउंडेशन के कार्यक्रम के लिए टेंट-पंडाल लगा रहे 13 मजदूरों को हिरासत में ले लिया था.इसके विरोध में सिदो-कान्हू मुर्मू हूल फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया था.उन्होंने स्मारक स्थल की ओर जाने वाले रास्ते पर बांस-बल्ला लगाकर उसे अवरुद्ध कर दिया था.

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देर शाम प्रशासन ने फाउंडेशन के लोगों से वार्ता के बाद मजदूरों को रिहा कर दिया था.हूल दिवस पर राजकीय कार्यक्रम के समानांतर अलग कार्यक्रम का आयोजन करने वाले फाउंडेशन के प्रमुख मंडल मुर्मू हैं, जो शहीद सिदो-कान्हू के वंशज भी हैं.वह पिछले विधानसभा चुनाव में बरहेट विधानसभा क्षेत्र से झामुमो के उम्मीदवार के तौर पर खड़े सीएम हेमंत सोरेन के प्रस्तावक बने थे, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के दौरान ही भाजपा में शामिल हो गए थे.

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