BJP की युवा विधायक ने सदन में उड़ाईं उमर अब्दुल्ला के भाषण की धज्जियां, फिर भी हुई तालियों की बरसात, जानें वजह
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बीजेपी की देवयानी राणा ने 1.13 लाख करोड़ के बजट की कमियों और समाजिक क्षेत्रों में फंड की कमी पर सवाल उठाए. उनके भाषण की नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने खुले दिल से सराहना की.
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हाल ही में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी का ध्यान खींचा. सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस के विधायकों ने बीजेपी की विधायक देवयानी राणा के भाषण की खुले दिल से सराहना की. यह घटना बजट सत्र के दौरान हुई जब देवयानी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए 1.13 लाख करोड़ रुपए के बजट का विश्लेषण किया.
सदन में क्या हुआ?
देवयानी राणा ने अपने भाषण में न केवल बजट में कमी को उठाया, बल्कि विभिन्न अहम क्षेत्रों पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने शिक्षा, डिजास्टर मैनेजमेंट और कल्याणकारी योजनाओं में धनराशि की कमी पर तीखी टिप्पणी की. दिव्यांगों के लिए चलाई जाने वाली बसों में मददगार मैकेनिज्म न होने की बात भी उन्होंने उठाई. बावजूद इसके, सदन में सत्तापक्ष के विधायकों ने उनके भाषण की खुलकर तारीफ की और तालियों की गूंज से माहौल और भी उत्साहपूर्ण बन गया.
कौन हैं देवयानी राणा?
इस पूरी घटना को और खास बनाता है देवयानी राणा की पृष्ठभूमि. वह दविंदर सिंह राणा की बेटी हैं, जिनका राजनीतिक सफर नेशनल कांफ्रेंस से शुरू हुआ था. उनके पिता उमर अब्दुल्ला के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेता रहे.अक्टूबर 2024 में उनकी मौत ने सभी को झकझोर दिया. इसके बाद देवयानी ने नागरोटा विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा. अपने पहले ही भाषण में उन्होंने विधानसभा में मौजूद सभी का ध्यान आकर्षित किया.
My maiden speech in the J&K Legislative Assembly as MLA Nagrota speaking on the J&K Budget 2026-27 on 7th February 2026@bjp4india @bjp4jnk @bjym4jk #JammuAndKashmir pic.twitter.com/2Ndo7NJAtg
— Devyani Rana (@devyanidsrana) February 7, 2026
स्पीकर ने विधायकों का बढ़ाया हौसला
स्पीकर अब्दुल रहीम राठेर ने सदस्यों से पहली बार की विधायक का हौसला बढ़ाने के लिए कहा. इस पर नेशनल कांफ्रेंस के विधायकों ने मेजें थपथपाईं. भाषण के दौरान और बाद में सदन में शांतिपूर्ण माहौल बना रहा. यह न केवल लोकतांत्रिक परंपरा का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विचार और आलोचना की जगह हमेशा सम्मान पाती है.
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बताते चलें कि देवयानी राणा का यह भाषण सिर्फ बजट पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि एक संदेश भी था कि राजनीति में नए चेहरे भी सक्षम और निडर हो सकते हैं. सदन में तालियों और प्रशंसा ने यह साबित कर दिया कि सही तर्क और तथ्य आधारित आलोचना से राजनीतिक मतभेद भी सम्मान में बदल सकते हैं. इस बेमिसाल घटना ने साबित कर दिया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में लोकतंत्र सिर्फ चर्चा और बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सम्मान, हौसला और जिम्मेदारी के मेल का प्रतीक भी बन सकता है.
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