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UP में फ्री बिजली योजना से बाहर 5 लाख किसान, क्या आपका नाम भी लिस्ट में नहीं?

Free Electricity Scheme in UP: बिजली बिल ज्यादा आने की वजह से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से निजी नलकूप कनेक्शन धारकों को प्रति किलोवॉट हर महीने 140 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का फैसला किया.

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17 Feb 2026
( Updated: 17 Feb 2026
07:26 AM )
UP में फ्री बिजली योजना से बाहर 5 लाख किसान, क्या आपका नाम भी लिस्ट में नहीं?
Image Source: Social Media
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Free Electricity Scheme in UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए निजी नलकूप (ट्यूबवेल) कनेक्शन पर मुफ्त बिजली देने की योजना शुरू की थी. इस योजना का मकसद साफ था खेती की लागत कम करना, सिंचाई आसान बनाना और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करना. खेती में पानी सबसे जरूरी चीज है और ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए बिजली से चलने वाले नलकूपों पर निर्भर रहते हैं; बिजली बिल ज्यादा आने की वजह से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से निजी नलकूप कनेक्शन धारकों को प्रति किलोवॉट हर महीने 140 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का फैसला किया.

योजना की शर्तें और समस्या

हालांकि योजना अच्छी थी, लेकिन इसमें कुछ शर्तें रखी गईं. किसानों को 31 मार्च 2023 तक के अपने सभी पुराने बिजली बिल पूरे चुकाने थे. साथ ही, उनके नलकूप पर मीटर लगा होना जरूरी था. यानी जिन किसानों पर पुराना बकाया था या जिनके यहां मीटर नहीं लगा था, वे इस योजना का फायदा नहीं ले सकते थे. यहीं से परेशानी शुरू हुई.
प्रदेश में निजी नलकूप कनेक्शन धारकों की कुल संख्या लगभग 15.64 लाख है. लेकिन इनमें से केवल 10.58 लाख किसानों ने ही योजना में पंजीकरण कराया और मुफ्त बिजली का लाभ ले रहे हैं. इसका मतलब है कि लगभग 5.10 लाख किसान अब भी इस योजना से बाहर हैं। यह संख्या बहुत बड़ी है. जब सरकार खुद किसानों को 100% छूट दे रही है, तो इतने किसान योजना से वंचित क्यों हैं यह बड़ा सवाल बन गया है.

बकाया बिल बना बड़ी रुकावट

योजना से बाहर रह गए किसानों पर कुल मिलाकर लगभग 5,549 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है. इतनी बड़ी रकम चुकाना छोटे और मध्यम किसानों के लिए आसान नहीं है। कई किसानों का कहना है कि उनके बिजली बिल गलत हैं और उनमें काल्पनिक या बढ़ा-चढ़ाकर बकाया दिखाया गया है. अगर बिल ही सही नहीं होगा, तो किसान उसे कैसे जमा करेंगे?
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने भी इस मुद्दे को उठाया है. उनका कहना है कि सरकार को नियमों की समीक्षा करनी चाहिए. अगर पांच लाख से ज्यादा किसान योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, तो जरूर कहीं न कहीं व्यवस्था में कमी है. उन्होंने सुझाव दिया कि जिला स्तर पर विशेष अभियान चलाकर किसानों की समस्याओं को समझा जाए और गलत बिलों की जांच की जाए.

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किसानों के लिए क्यों जरूरी है यह योजना

निजी नलकूप कनेक्शन योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती और नियमित बिजली देना है. जब किसान को बिजली बिल की चिंता नहीं होगी, तो वह समय पर खेतों की सिंचाई कर पाएगा. इससे फसल अच्छी होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान की आय में सुधार होगा. खेती पहले ही महंगी होती जा रही है - बीज, खाद, डीजल सब कुछ महंगा है. ऐसे में मुफ्त बिजली किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.
लेकिन अगर योजना की शर्तें बहुत सख्त रहेंगी, तो जरूरतमंद किसान ही इससे बाहर रह जाएंगे. इसलिए जरूरी है कि सरकार और पावर कॉरपोरेशन मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना से जुड़ सकें. पुराने बकाए को किस्तों में लेने या गलत बिलों की जांच करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

आगे क्या होना चाहिए

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सरकार को चाहिए कि वह नियमों को थोड़ा आसान और व्यावहारिक बनाए.जिन किसानों पर बकाया ज्यादा है, उनके लिए विशेष छूट या किस्त योजना बनाई जा सकती है. साथ ही, गलत बिलों की शिकायत के लिए आसान व्यवस्था होनी चाहिए. अगर सही तरीके से काम किया जाए, तो बाकी बचे पांच लाख किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं और खेती को और मजबूत बनाया जा सकता है.

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