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उत्तराखंड: लोकतंत्र का अपहरण कर नेपाल भागा लाखन गुंडा, CM धामी सिखाएंगे सबक

नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है. एक ऐसा अवसर, जब जनप्रतिनिधि स्वतंत्र रूप से अपना मत देते हैं और स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करते हैं. लेकिन कल जो कुछ नैनीताल में हुआ, उसने इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को कलंकित कर दिया.

उत्तराखंड: लोकतंत्र का अपहरण कर नेपाल भागा लाखन गुंडा, CM धामी सिखाएंगे सबक
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उत्तराखंड के नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर सियासी तापमान अपने चरम पर है. 15 अगस्त को तीन बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और वीडियोग्राफी के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान की गिनती संपन्न हुई. हालांकि चुनाव परिणाम को निर्वाचन आयोग ने सीलबंद लिफाफे में बंद कर दिया है, जिसे 18 अगस्त को उत्तराखंड हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा. अंतिम निर्णय हाईकोर्ट के निर्देश के अधीन होगा.

वोटों की गिनती का फैसला क्यों हुआ?

जिला निर्वाचन अधिकारी ने राज्य निर्वाचन आयोग से मिले निर्देशों के आधार पर वोटों की गिनती कराने का निर्णय लिया. निर्वाचन नियमावली के मुताबिक री-पोलिंग केवल विशेष परिस्थितियों-जैसे बूथ कैप्चरिंग, तकनीकी गड़बड़ी या बैलेट बॉक्स को नुकसान - में ही संभव है। इन स्थितियों की अनुपस्थिति में सिर्फ गिनती कर परिणाम सीलबंद करना ही एकमात्र विकल्प था. गुरुवार को मतदान के दौरान हुए विवाद और कथित गड़बड़ियों के बाद कांग्रेस ने हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसके चलते अब अंतिम फैसला कोर्ट की अनुमति पर निर्भर करेगा.

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अनुसार दीपा दर्मवाल को मिली जीत

अब तक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा प्रत्याशी दीपा दर्मवाल ने एक वोट के बेहद मामूली अंतर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है. हालांकि यह अभी औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है और कोर्ट की सुनवाई तक परिणाम सार्वजनिक नहीं होगा.

उपाध्यक्ष पद पर लॉटरी से तय हुई जीत: सूत्र

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उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा के बहादुर नगदली और कांग्रेस की देवकी बिष्ट को बराबर वोट मिले. नियमों के तहत ऐसी स्थिति में विजेता का चयन लॉटरी प्रणाली से किया जाता है. लॉटरी में कांग्रेस की देवकी बिष्ट विजेता घोषित हुईं. हालांकि कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक बार फिर हाईकोर्ट जाने का फैसला लिया है.

कांग्रेस के 5 सदस्य अब तक लापता 

चुनाव प्रक्रिया के बीच कांग्रेस ने अपने पांच जिला पंचायत सदस्यों के लापता होने का आरोप लगाया है और इस पूरे मामले की जांच की मांग की है.

लापता सदस्यों की सूची इस प्रकार है हालाँकि एक सदस्य का नाम स्पष्ट नहीं हो पाया है. 

  • प्रमोद कोटलिया – मल्ला ओखलकांडा, नैनीताल
  • डिगर मेवाड़ी – ककोड़ ओखलकांडा, नैनीताल
  • दीपक बिष्ट – जिला पंचायत, चौकुटा धारी, नैनीताल
  • तरुण शर्मा – चापड़, बेतालघाट, नैनीताल


हाईकोर्ट में होगा निर्णायक मोड़

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अब सभी की नजरें 18 अगस्त को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां निर्वाचन आयोग चुनाव परिणामों से जुड़ा सीलबंद लिफाफा कोर्ट में पेश करेगा. कोर्ट के निर्देश के बाद ही यह तय होगा कि चुनाव परिणामों को वैध घोषित किया जाएगा या फिर किसी और प्रक्रिया की आवश्यकता होगी.

नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव अब केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं रह गई, बल्कि यह कानूनी और नैतिक परीक्षण का विषय बन चुका है. जहां एक ओर भाजपा अपने दावों के अनुसार जीत की स्थिति में दिख रही है, वहीं कांग्रेस लापता सदस्यों और प्रक्रियागत आपत्तियों को लेकर हमलावर है. आने वाले दिनों में हाईकोर्ट का फैसला इस सियासी रस्साकशी का अंत तय करेगा या इसे और उलझाएगा-यह देखना दिलचस्प होगा.

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