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बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! कहां चलेगा बुलडोजर और कहां होगी रोक, फैसले की 28 बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सख्त हिदायत दी है। कोर्ट ने किसी भी तरह की बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की बात कही है। कोर्ट ने कहा है कि कहां पर बुलडोजर चलेगा और कहां पर रोक लगेगी यह कानून तय करेगा। कोर्ट ने इस फैसले में कुल 28 बड़ी बातें कही है।

बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! कहां चलेगा बुलडोजर और कहां होगी रोक, फैसले की 28 बड़ी बातें
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यूपी के साथ देश के अलग-अलग राज्यों में हो रहे बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है। अदालत ने अपने फैसले में कुल 28 बड़ी बातें कही हैं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह का मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारी मनमानी तरीके से काम नहीं कर सकते। बगैर सुनवाई आरोपी को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस गवई ने फैसला सुनाते हुए हिंदी के मशहूर कवि प्रदीप के शायरी के साथ किया। 

 "अपना घर हो या अपना आंगन हो, इस ख्वाब में हर कोई जीता है, इंसान के दिल की यह चाहत है, कि घर का सपना कभी ना छूटे।

जस्टिस गवई ने कहा कि घर सुरक्षा परिवार की सामूहिक उम्मीद है। क्या कार्यपालिका को किसी आरोपी व्यक्ति के परिवार की सुरक्षा छीनने की अनुमति दी जा सकती है। यह हमारे सामने एक सवाल है। मामले का दायरा सीमित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि क्या किसी 
अपराध के आरोपी या दोषी होने पर संपत्ति को ध्वस्त किया जा सकता है। एक घर केवल एक संपत्ति नहीं है। बल्कि सुरक्षा के लिए परिवार की सामूहिक उम्मीद का प्रतीक है। 

बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 28 बड़ी बातें 

सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई के एक्शन को लेकर 28 बड़ी बातें कही हैं। इनमें कहां पर बुलडोजर चलेगा और कहां पर रोक लगेगी। 

1 - सुप्रीम कोर्ट ने कहा किसी व्यक्ति के घर को इसलिए नहीं गिराया जा सकता कि कोई व्यक्ति आरोपी है। राज्य आरोपी या दोषी के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकता। 

2 - बुलडोजर एक्शन ठीक उसी तरह है। जैसे सामूहिक दंड देना। जिसकी संविधान में कोई अनुमति नहीं है।

3 - बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई के किसी भी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

4 - कार्रवाई से पहले कानून के शासन, कानूनी व्यवस्था पर निष्पक्षता के साथ विचार करना होगा। 

5 - कानून का शासन मनमाने तरीके से किसी भी तरह की अनुमति नहीं देता। इससे डिमोलेशन से सत्ता के दुरुपयोग का सवाल उठता है। 

6 - किसी भी आरोपी या दोषी को आपराधिक कानून में सुरक्षा दी गई है। कानून के शासन को खत्म नहीं होने दिया जा सकता। 

7 - किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और आजादी की सुरक्षा जरूरी है। 

8 - अगर कार्यपालिका मनमाने तरीके से किसी नागरिक के घर को इस आधार पर ध्वस्त करती है। भले ही उस पर किसी अपराध का आरोप है। तो यह भी संविधान का उल्लंघन है। 

9 - अधिकारियों को इस तरह से मनमाने तरीके से काम करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।  

10 - किसी भी तरह के अधिकारियों को सत्ता का दुरुपयोग करने पर बख्शा नहीं जाएगा। 

11 - जब भी स्थानीय कानूनों का उल्लंघन हो या घर गिराने पर विचार करते वक्त यह देखना चाहिए कि नगर पालिका कानून में क्या अनुमति है या फिर निर्माण में कुछ हिस्सा गिराया जा सकता है। 

12 - अधिकारियों को यह दिखाना होगा कि संरचना अवैध है या अपराध को कम करने या केवल एक हिस्से को ध्वस्त करने की कोई भी संभावना नहीं है। 

13 - नोटिस में बुलडोजर चलाने का कारण और सुनवाई की तारीख बताना जरूरी है। 

14 - डिजिटल पोर्टल को 3 महीने में बनाया जाना चाहिए। इसमें नोटिस की जानकारी और संरचना के पास सार्वजनिक स्थान पर नोटिस प्रदर्शित करने की तारीख बताई गई हो। 

15 - व्यक्तिगत सुनवाई की तारीख भी बताना जरूरी है। 

16 - कोई भी इमारत तभी गिराई जा सकती है। जब उसका निर्माण सड़क/रेलवे ट्रैक/या जल निकाय के पास हो। इसके बाद भी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही इमारत को गिराया जा सकता है। 

17 - केवल वही इमारतें ध्वस्त की जाएंगी। जो अनधिकृत है और जिसका निपटान नहीं किया जा सकता। 

18 - अगर अवैध तरीके से इमारत गिराई गई है। तो अधिकारियों पर अवमानना कार्रवाई की जाएगी और हर्जाना भी देना होगा। 

19 - अनधिकृत इमारत या किसी भी घर को गिराने से पहले विस्तृत स्पॉट रिपोर्ट तैयार करनी होगी। पुलिस और अधिकारियों की मौजूदगी में तोड़फोड़ की वीडियो रिकॉर्डिंग की  जाएगी। इस रिपोर्ट को पोर्टल पर पब्लिश की जाएगी। 

20 - अगर किसी भी घर को गिराने का आदेश पारित किया जाता है। तो इस आदेश के खिलाफ अपील करने का वक्त देना चाहिए।
बिना अपील के रात भर ध्वस्तीकरण के बाद महिला और बच्चे को सड़क पर देखना सुखद दृश्य नहीं है।  

21 - घर के मालिक को रजिस्टर्ड डाक द्वारा नोटिस भेजा जाएगा और घर के बाहर नोटिस चिपकाना होगा। जो कार्रवाई से 15 दिन पहले होना चाहिए। 

22 - तामील के बाद जिला कलेक्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सूचना भेजी जाएगी। 

23 - किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण के लिए  कलेक्ट्रेट और डीएम नगरपालिका भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे।

24 - प्राधिकरण व्यक्तिगत सुनवाई सुनेगा। रिकॉर्ड किया जाएगा और उसके बाद अंतिम आदेश पारित किया जाएगा। 

25 - आदेश के 15 दिनों के अंदर मालिकों को अनधिकृत मकान को ध्वस्त करने या हटाने का मौका दिया जाएगा। 

26 - सभी निर्देशों का पालन करना चाहिए और निर्देशों का पालन न करने पर अवमानना और अभियोजन की कार्रवाई से गुजरना होगा। 

27 - अधिकारियों को मुआवजे के साथ ध्वस्त संपत्ति को अपनी लागत पर वापसी के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा। 

28 -  सभी मुख्य सचिवों को भी निर्देश दिए जाने चाहिए। 

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