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3.5 एकड़ जमीन, करोड़ों का सौदा… रॉबर्ट वाड्रा पर ED के गंभीर आरोप, अब बढ़ेंगी कानूनी मुश्किलें!

ईडी ने आरोप लगाया है कि रॉबर्ट वाड्रा ने गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत के तौर पर ली और बाद में इसे DLF को 58 करोड़ में बेच दिया. चार्जशीट के अनुसार, जमीन बिना भुगतान के उनकी कंपनी को दी गई ताकि वाड्रा, तत्कालीन CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा से हाउसिंग लाइसेंस दिलवा सकें.

3.5 एकड़ जमीन, करोड़ों का सौदा… रॉबर्ट वाड्रा पर ED के गंभीर आरोप, अब बढ़ेंगी कानूनी मुश्किलें!
Image: File Photo/ Robert Vadra
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत के तौर पर लेने का गंभीर आरोप लगाया. ईडी की ओर से दायर चार्जशीट के मुताबिक यह मामला न सिर्फ जमीन खरीद-फरोख्त का है, बल्कि इसमें सत्ता के गलियारों में प्रभाव का इस्तेमाल, बेनामी सौदा और झूठे दस्तावेज जैसे गंभीर पहलू भी शामिल हैं.

क्या है पूरा मामला?

चार्जशीट में दावा किया गया है कि गुरुग्राम की यह जमीन Onkareshwar Properties Pvt Ltd (OPPL) से Skylight Hospitality Pvt Ltd (SLHPL) को ट्रांसफर की गई थी. ईडी का आरोप है कि यह सौदा बिना वास्तविक भुगतान के किया गया, ताकि वाड्रा अपने व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल कर हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से OPPL को हाउसिंग लाइसेंस दिला सकें. ईडी ने यह भी कहा कि वाड्रा, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद होने के कारण हुड्डा पर सीधा राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रभाव रखते थे.

चेक और भुगतान की कहानी

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जमीन की रजिस्ट्री 12 फरवरी 2008 को हुई थी. दस्तावेजों में दिखाया गया कि 7.5 करोड़ रुपये का भुगतान चेक नंबर 607251 से किया गया, लेकिन यह चेक कभी क्लियर नहीं हुआ. वास्तविक भुगतान छह महीने बाद एक अन्य चेक से किया गया. हैरानी की बात यह है कि यह चेक Skylight Realty Pvt Ltd (SLRPL) का था, न कि खरीददार कंपनी SLHPL का. SLHPL की अधिकृत पूंजी मात्र 1 लाख रुपये थी और SLRPL के खाते में भी उस समय 7.5 करोड़ रुपये नहीं थे. इतना ही नहीं, इस सौदे में 45 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी भी बेचने वाली कंपनी ने भरी, न कि वाड्रा की कंपनी ने. ईडी का कहना है कि यह सब दिखाता है कि सौदा पूरी तरह बेनामी और फर्जी भुगतान के आधार पर किया गया.

सौदे का फायदा और जमीन की बिक्री

ईडी के अनुसार, यह जमीन बाद में रियल एस्टेट दिग्गज DLF को 58 करोड़ रुपये में बेची गई. यानी कथित तौर पर बिना वास्तविक निवेश के, करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया गया. ईडी का दावा है कि यह पूरा मामला सत्ता के प्रभाव, राजनीतिक संबंधों और कॉर्पोरेट नेटवर्क का इस्तेमाल करके किया गया एक संगठित घोटाला है.

वाड्रा से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई

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ईडी ने वाड्रा से जुड़ी कम से कम तीन महंगी संपत्तियां अटैच की हैं, जिनका जिक्र प्रियंका गांधी ने नवंबर 2024 में वायनाड से लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल शपथपत्र में नहीं किया था. इस पर केरल हाईकोर्ट ने प्रियंका को नोटिस जारी किया है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, चुनावी हलफनामे में झूठी या अधूरी जानकारी देना भ्रष्ट आचरण माना जाता है. इसके लिए दोषी पाए जाने पर अयोग्यता और जेल, दोनों की सजा हो सकती है.

ईडी की हालिया कार्रवाई और आगे की सुनवाई

  • 16 जुलाई 2025: ईडी ने 37 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच कीं.
  • 17 जुलाई 2025: गुरुग्राम जमीन सौदे पर चार्जशीट दाखिल की गई.
  • 28 अगस्त 2025: विशेष PMLA अदालत आरोप तय करने पर फैसला सुनाएगी.

इस मामले में कुल 11 आरोपी हैं, जिनमें वाड्रा के अलावा OPPL के प्रमोटर सत्यनंद यादव और केवल सिंह विरक भी शामिल हैं.

राजनीतिक और कानूनी असर

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यह मामला कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है. विपक्ष इस मुद्दे को 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही बार-बार उठाता रहा है. प्रियंका गांधी का नाम इसमें आने से पार्टी की छवि पर और दबाव बढ़ सकता है. वहीं, अगर अदालत में आरोप साबित होते हैं तो यह न केवल वाड्रा के लिए, बल्कि पूरे गांधी परिवार के लिए बड़ी कानूनी चुनौती साबित होगी. कानूनी जानकारों का कहना है कि ईडी के पास यदि पर्याप्त सबूत हैं, तो यह मामला भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत गंभीर सजा तक पहुंच सकता है.

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बताते चलें कि गुरुग्राम की 3.5 एकड़ जमीन का यह सौदा अब सिर्फ रियल एस्टेट डील का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता, राजनीति और कॉर्पोरेट हितों के टकराव की कहानी बन गया है. आने वाले हफ्तों में अदालत की कार्यवाही और ईडी की दलीलें तय करेंगी कि यह मामला भारतीय राजनीति के इतिहास में एक बड़े घोटाले के रूप में दर्ज होगा या नहीं. बहरहाल, अगली सुनवाई 28 अगस्त 2025 को है, और पूरे देश की निगाहें अब अदालत के फैसले पर टिकी हैं.

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