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'द बंगाल फाइल्स' के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री के बयान से मचा विवाद, मराठी भोजन को बताया गरीबों का खाना

फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने मराठी खाने को ‘गरीबों का खाना’ कहकर ऐसा बयान दिया कि सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया. लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल किया और कई संगठनों ने माफी की मांग कर दी. आखिर क्या है पूरा मामला?

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20 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:43 AM )
'द बंगाल फाइल्स' के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री के बयान से मचा विवाद, मराठी भोजन को बताया गरीबों का खाना
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फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द बंगाल फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने मराठी खाने को ‘गरीबों का खाना’ कहकर मजाक उड़ाया. उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है.

मराठी खाने पर टिप्पणी

अग्निहोत्री ने बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें मराठी व्यंजन साधारण और बेस्वाद लगते हैं और उन्होंने इसे ‘गरीबों का खाना’ तक कह डाला. यही बयान लोगों को नागवार गुज़रा. महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े खाने को इस तरह नीचा दिखाने पर मराठी समुदाय ने नाराज़गी जताई.

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सोशल मीडिया पर गुस्सा

जैसे ही उनका बयान सामने आया, ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोग उनकी आलोचना करने लगे. कई लोगों ने लिखा कि मराठी खाना सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है. एक यूज़र ने लिखा—
“गरीबों का खाना कहने वाले को शायद पुणे की मिसल पाव, नागपुरी तार्री पोहा या कोल्हापुरी थाली कभी खानी ही नहीं मिली.”

मराठी व्यंजनों की विविधता

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दरअसल, मराठी खाने की अपनी अलग पहचान है. वड़ा पाव, पिटला-भाकरी, मिसल पाव, पूरनपोली और कोल्हापुरी चिकन जैसे व्यंजन न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में लोकप्रिय हैं. कई लोगों ने विवेक अग्निहोत्री को ट्रोल करते हुए लिखा कि “जिन्हें संस्कृति की समझ नहीं, वे ही इसे गरीबों का खाना कहते हैं.”

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

विवेक अग्निहोत्री के इस बयान पर सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि कई मराठी संगठनों और नेताओं ने भी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि किसी भी समुदाय के खानपान का मजाक उड़ाना असंवेदनशीलता है. कुछ नेताओं ने तो उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग कर डाली है.

विवेक अग्निहोत्री की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद विवेक अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि उनका मकसद किसी की भावनाएं आहत करना नहीं था. उन्होंने लिखा कि उनकी टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है. लेकिन आलोचकों का मानना है कि डायरेक्टर को शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए था.

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यह पहली बार नहीं है जब विवेक अग्निहोत्री किसी बयान को लेकर विवादों में फंसे हैं. लेकिन इस बार मामला महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा है, इसलिए लोगों की नाराज़गी और गहरी है. अब देखना होगा कि क्या डायरेक्टर अपने शब्दों पर माफी मांगते हैं या फिर विवाद और लंबा खिंचता है.

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