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झूठी कहानियां गढ़ने में माहिर हैं ट्रंप... विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का किया खंडन, कहा- बातचीत की कोई जानकारी नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की तेल खरीद नीति अपने राष्ट्रीय हितों और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार तय की जाती है.

झूठी कहानियां गढ़ने में माहिर हैं ट्रंप... विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का किया खंडन, कहा- बातचीत की कोई जानकारी नहीं
Donald Trump (File Photo)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन राजनेताओं में से माने जाते हैं जो 'बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना' यानी हर मामले में हस्तक्षेप कर अपनी ही तारीफ कराने में माहिर हैं. कभी वे दो देशों के बीच युद्ध समाप्त करने का दावा करते हैं तो कभी बड़े और गलत दावे कर वैश्विक स्तर पर भ्रामक खबरें फैलाते हैं. ताज़ा मामला बुधवार का है जब उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है. मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच ऐसी किसी बातचीत की जानकारी उनके पास नहीं है.

ट्रंप के हालिया दावों पर भारत ने गुरुवार (16 अक्टूबर) को अपनी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बाज़ार की परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों के मुताबिक विविध बना रहा है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐसी किसी फोन बातचीत की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, 'भारत की तेल खरीद नीति वैश्विक ऊर्जा स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से तय की जाती है.'

क्या वाकई मोदी-ट्रंप के बीच हुई थी बातचीत?

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रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, 'जहां तक मेरी जानकारी है, बुधवार (15 अक्टूबर) को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई टेलीफोनिक बातचीत नहीं हुई. दोनों नेताओं के बीच आखिरी बार 9 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई थी.'

ट्रंप के दावों की फिर खुली पोल


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बेतुके दावे को लेकर सुर्खियों में हैं. यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने भारत को लेकर गलत बयान दिया हो. इससे पहले भी वे भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का श्रेय खुद को दे चुके हैं, जिसे भारत ने तुरंत खारिज कर दिया था. अब उन्होंने दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने जा रहा है, जबकि हकीकत कुछ और है. दरअसल, हाल के दिनों में ट्रंप पाकिस्तान के काफी करीब दिख रहे हैं और इसी नजदीकी ने भारत के साथ उनके रिश्तों में दरार डाल दी है.

रूसी तेल पर भारत की सफाई


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रूसी तेल को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर भारत ने सधे हुए शब्दों में प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का मुख्य उद्देश्य स्थिर कीमतें बनाए रखना और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है. उन्होंने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार अपने स्रोतों का दायरा बढ़ा रहा है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार उनमें आवश्यक बदलाव भी कर रहा है.

ट्रंप ने क्या कहा था?

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बधवर को कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सामने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की. उनका कहना था कि यह व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद करता है. ट्रंप ने कहा, 'मैं इस बात से खुश नहीं था कि भारत तेल खरीद रहा है. लेकिन आज मोदी जी ने मुझे आश्वस्त किया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह बहुत बड़ा कदम है. अब हमें चीन से भी यही उम्मीद रखनी होगी.' उनके अनुसार, रूस की तेल आय से चलने वाली अर्थव्यवस्था ही यूक्रेन पर लंबे समय तक हमला करने में सक्षम रही है. उन्होंने आगे यह भी कि रूस ने अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को इस युद्ध में खो दिया है, जो पूरी तरह निरर्थक साबित हो रहा है. इस दौरान उन्होंने मतभेद के बावजूद ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की. जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या अमेरिका भारत को भरोसेमंद साझेदार मानता है, तो ट्रंप ने कहा, 'वह मेरे मित्र हैं. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं.'

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बताते चलें कि कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप का यह नया बयान भी उनके पुराने बयानों की तरह विवादों में घिर गया है. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों और उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाती है. ऐसे में ट्रंप के दावे एक बार फिर हवा-हवाई साबित हुए हैं, जबकि भारत ने शालीनता से तथ्यों के जरिए उन्हें करारा जवाब दे दिया है.

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