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रंग लाई PM मोदी की कूटनीति... कनाडा ने मानी गलती, खालिस्तानी आतंकवादियों के अपनी धरती पर एक्टिव होने की बात स्वीकारी

CSIS की रिपोर्ट में कनाडा ने पहली बार माना कि खालिस्तानी आतंकवादी उसकी धरती पर सक्रिय हैं और भारत को नुकसान पहुंचाने का कार्य कर रहें है. PM मोदी और कनाडाई पीएम कार्नी की मुलाकात के बाद आई रिपोर्ट ने भारत-कनाडा संबंधों में तनाव को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है.

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19 Jun 2025
( Updated: 06 Dec 2025
04:28 AM )
रंग लाई PM मोदी की कूटनीति... कनाडा ने मानी गलती, खालिस्तानी आतंकवादियों के अपनी धरती पर एक्टिव होने की बात स्वीकारी
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कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने हाल ही में एक रिपोरर्ट जारी की है. अपनी इस रिपोर्ट में CSIS ने एक बड़ा खुलासा किया है. दरअसल इस रिपोर्ट में कनाडा ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया कि उसकी धरती पर खालिस्तानी आतंकवादी सक्रिय हैं, रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि ये खालिस्तानी भारत के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं. 
बता दें कि यह खुलासा तब हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ G7 शिखर सम्मेलन में मुलाकात कर वापस लौटे हैं. मुलाकात के अगले ही दिन CSIS की यह रिपोर्ट सामने आई, जिसने भारत-कनाडा के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को फिर से चर्चा में ला दिया है.

रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
CSIS की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 1980 के दशक से कनाडा में खालिस्तानी उग्रवादी (जिन्हें कनाडा-बेस्ड खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट्स या CBKE कहा गया है) भारत के पंजाब में एक अलग खालिस्तान राष्ट्र बनाने के लिए हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं. ये उग्रवादी कनाडा को अपनी गतिविधियों का अड्डा बना रहे हैं, जहां से वे हिंसा को बढ़ावा देने, फंड जुटाने और हमलों की योजना बनाने का काम करते हैं. हालांकि, कनाडा में 2024 में ऐसी कोई हिंसक घटना नहीं हुई, लेकिन इन उग्रवादियों की गतिविधियां कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत के हितों के लिए खतरा बनी हुई हैं.

एक छोटा उग्रवादी समूह है खालिस्तान
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि खालिस्तान के लिए शांतिपूर्ण तरीके से समर्थन करने वाले कनाडाई नागरिकों को उग्रवादी नहीं माना जाता. लेकिन एक छोटा समूह ऐसा है जो हिंसा का सहारा लेता है, और यही समूह भारत के लिए चिंता का कारण है. CSIS ने यह भी कहा कि कनाडा से उभरने वाला खालिस्तानी उग्रवाद भारत की विदेशी हस्तक्षेप गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है. इसका मतलब है कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए कनाडा में सक्रिय इन तत्वों पर नजर रखनी पड़ रही है.

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भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
इस रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है उसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल भारत लंबे समय से कहता आ रहा है कि कनाडा खालिस्तानी उग्रवादियों को पनाहगार बन गया है, ये उग्रवादी भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं. आपको बता दें कि 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत-कनाडा के बीच तनाव की शुरूआत हुई औऱ ये तब और भी ज्यादा बढ़ गया जब कनडा ने भारत पर इसका आरोप लगाया. उस समय कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर निज्जर की हत्या में शामिल होने की बात कही थी, जिसे भारत ने बेतुका और राजनीति से प्रेरित करार दिया था. इसके जवाब में भारत ने कनाडा से अपने छह राजनयिकों को वापस बुला लिया था.

पहले भी खराब हो चुके हैं रिश्तें
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियां चर्चा में आई हैं. 1985 में खालिस्तानी आतंकियों ने एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 182 को बम से उड़ा दिया था, जिसमें 329 लोग मारे गए थे. यह कनाडा के इतिहास में सबसे बड़ा आतंकी हमला था. इसके बावजूद, कनाडा की सरकारों ने अक्सर खालिस्तानी समर्थकों के प्रति नरम रवैया अपनाया, जिसे भारत ने हमेशा आलोचना की.
कनाडा की सिख आबादी, जो देश की कुल जनसंख्या का 2.1% है, वहां की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. कई बार कनाडाई नेता वोट बैंक की राजनीति के चलते खालिस्तानी समर्थकों के प्रति नरम रुख दिखाते हैं. लेकिन CSIS की इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि यह रवैया अब कनाडा की अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है.

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नए उच्चायुक्त होंगे नियुक्त
PM मोदी और PM मार्क कार्नी की हालिया मुलाकात में दोनों नेताओं ने तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाने को लेकर चर्चा की है. इस मुलाकात में दोनों देशों ने नए उच्चायुक्त नियुक्त करने और रुकी हुई व्यापार वार्ताओं को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई. 
CSIS की यह रिपोर्ट इस मुलाकात के ठीक बाद आई, जिससे लगता है कि कनाडा अब अपनी गलतियों को सुधारने की कोशिश कर रहा है. 

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