×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पाकिस्तान... चिनाब पर एक और 'मेगा प्लान' को भारत सरकार ने दी मंजूरी

चिनाब नदी पर दुलहस्ती चरण-दो परियोजना को भारत की मंजूरी के बाद पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है. पाकिस्तान ने इसे सिंधु जल संधि का उल्लंघन बताया है, जबकि भारत पहले ही इस संधि को निलंबित कर चुका है. नई दिल्ली ने पाकिस्तान की आपत्ति को तवज्जो नहीं दी, जिससे उसकी कूटनीतिक बेबसी साफ नजर आ रही है.

बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पाकिस्तान... चिनाब पर एक और 'मेगा प्लान' को भारत सरकार ने दी मंजूरी
Indus Waters Treaty
Advertisement

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर प्रस्तावित 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को भारत की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई है. पाकिस्तान ने इसे 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन करार दिया है, जबकि भारत पहले ही इस संधि को निलंबित कर चुका है. यही वजह है कि पाकिस्तान की आपत्ति को नई दिल्ली में खास तवज्जो नहीं दी जा रही है. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत-पाक संबंधों में जल विवाद को सुर्खियों में ला दिया है. 

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दी प्रतिक्रिया 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि भारत ने इस परियोजना को लेकर कोई पूर्व सूचना या अधिसूचना साझा नहीं की. उन्होंने दावा किया कि यह कदम न सिर्फ सिंधु जल संधि, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों की भी अवहेलना है. पाकिस्तान का तर्क है कि संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों, यानी सिंधु, झेलम और चिनाब पर सीमित उपयोग की अनुमति है और किसी भी नई परियोजना की जानकारी पहले साझा करना अनिवार्य होता है. जानकारी देते चलें की पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया बता रही है कि वो सिंधु जल समझौते को लेकर किस लाचारी और बेबसी को झेल रहा है. 

भारत ने यह समझौता कब किया था स्थागित?

Advertisement

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि कहीं ज्यादा गहरी है. पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त और दंडात्मक कदम उठाए थे. इन्हीं कदमों में सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला भी शामिल था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और इसकी जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी, जिसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है. भारत का साफ कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता, तब तक पुराने समझौतों पर यथास्थिति संभव नहीं है.

कब शुरू हुई थी सिंधु जल संधि

सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में लागू हुई थी. इसका उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को लेकर स्थायी व्यवस्था बनाना था. दशकों तक यह संधि दोनों देशों के बीच जल विवादों की आधारशिला बनी रही, लेकिन बदलते सुरक्षा हालात और बार-बार होने वाले आतंकी हमलों के बाद भारत ने इसे निलंबित करने का निर्णय लिया.

क्या है दुलहस्ती चरण-दो परियोजना?

Advertisement

दुलहस्ती चरण-दो परियोजना की बात करें तो यह जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती चरण-एक परियोजना का विस्तार है. दिसंबर 2025 में भारत के पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति ने इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दी थी. समिति ने यह भी दर्ज किया था कि परियोजना के तकनीकी पैरामीटर संधि के अनुरूप हैं, लेकिन चूंकि भारत पहले ही सिंधु जल संधि को निलंबित कर चुका है, इसलिए कानूनी रूप से नई दिल्ली पर किसी तरह की बाध्यता लागू नहीं होती.

क्यों चिंतित है पाकिस्तान?

पाकिस्तान की चिंता यहीं खत्म नहीं होती. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बताया कि सिंधु जल के लिए पाकिस्तानी आयुक्त ने भारत से परियोजना की प्रकृति, दायरे और तकनीकी विवरणों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है. पाकिस्तान यह जानना चाहता है कि यह एक पूरी तरह नई परियोजना है या किसी मौजूदा संयंत्र में बदलाव. हालांकि भारत की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि यह परियोजना देश की जल सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जा रही है. दरअसल दुलहस्ती चरण-दो सिर्फ एक शुरुआत है. संधि निलंबन के बाद भारत सिंधु बेसिन में कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. इनमें सावलकोट, रतले, बुरसर और पाकल दुल जैसी मेगा परियोजनाएं शामिल हैं. भारतीय सूत्रों का कहना है कि इन कदमों का मकसद किसी देश को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपनी जलविद्युत क्षमता को बढ़ाना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना है.

Advertisement

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि चिनाब नदी पर दुलहस्ती चरण-दो परियोजना को मिली मंजूरी ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब जल संसाधनों के मामले में कोई समझौता करने के मूड में नहीं है. वहीं पाकिस्तान की प्रतिक्रिया उसकी कूटनीतिक बेबसी को भी उजागर करती है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह जल विवाद आगे किस दिशा में जाता है और इसका असर क्षेत्रीय राजनीति पर कितना गहरा पड़ता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें