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‘ये हमारी लड़ाई नहीं…’ NATO देशों की ट्रंप को दो टूक, ईरान से जंग में अकेले पड़े, होर्मुज पर किया किनारा

Iran-US War: ईरान के साथ जंग में ट्रंप के दोस्तों ने ही उनसे किनारा कर लिया है. Strait of Hormuz पर दबाव बनाने की ट्रंप की कोशिश फेल हो गई. NATO देशों ने उनके साथ आने से साफ इंकार कर दिया.

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17 Mar 2026
( Updated: 17 Mar 2026
06:15 PM )
‘ये हमारी लड़ाई नहीं…’ NATO देशों की ट्रंप को दो टूक, ईरान से जंग में अकेले पड़े, होर्मुज पर किया किनारा
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगता है अमेरिका के बिना दुनिया का वजूद नहीं है. ईरान से जंग के बीच हाल ही में उन्होंने North Atlantic Treaty Organization (NATO) देशों को भी चेतावनी दी. जिसमें ट्रंप ने उनसे होर्मुज के रास्ते को खोलने में साथ आने की मदद मांगी और कहा NATO देशों ने ऐसा नहीं किया तो उनका भविष्य खतरे में पड़ सकता है. 

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या NATO के देश ट्रंप की हठधर्मिता में उनका साथ देंगे. इसका जवाब भी आ गया है. द गार्जियन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि NATO देशों ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया कि वह होर्मुज के रास्ते को खुलवाने में US की कोई मदद नहीं कर सकते. वह अपना वॉरशिप नहीं भेजेंगे. 

जर्मनी ने क्या कहा? 

द गार्जियन की रिपोर्ट में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के हवाले से कहा गया है कि वह US के साथ किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा. क्योंकि इस मामले में कभी कोई फैसला नहीं हुआ, ऐसे में जर्मनी के सैन्य योगदान का सवाल ही नहीं उठता. 

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने यह भी कहा है कि ईरान की मौजूदा सरकार खत्म होनी चाहिए, लेकिन उन्होंने US के जंग के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा, बमबारी करके ईरान को झुकाना सही तरीका नहीं है. 

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जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के अलावा रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी US पर सवाल उठाया. उन्होंने अपना स्टैंड क्लियर करते हुए कहा, यह यूरोप का युद्ध नहीं है और जब अमेरिकी नौसेना खुद इतनी ताकतवर है, तो कुछ यूरोपीय जहाज क्या कर लेंगे. 

ब्रिटेन का क्या है स्टैंड? 

ब्रिटेन ने भी खुदको युद्ध से दूर रखा है. प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कहा कि उनका देश इस बड़े युद्ध में नहीं फंसेगा. हालांकि PM स्टार्मर ने तेल बाजार की स्थिरता के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को जरूरी माना, लेकिन उन्होंने कहा कि कोई भी कदम ज्यादा से ज्यादा देशों की सहमति से ही उठाया जाएगा. ब्रिटेन के रुख पर डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी भी जताई थी. 

इटली ने बातचीत पर दिया जोर

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इटली ने जोर दिया कि संकट की इस घड़ी में हथियार नहीं बातचीत से रास्ता निकाला जाए. इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा, उनका देश किसी नौसैनिक मिशन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है. यूरोपीय यूनियन के मौजूदा मिशन सिर्फ समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए हैं, उन्हें युद्ध में नहीं बदला जा सकता. यानी इटली ने अमेरिका के समर्थन में अपने सैनिक उतारने से इंकार कर दिया. 

इससे पहले जापान, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने सैनिक भेजने से साफ इंकार कर दिया था. यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई की जगह कूटनीति अपनाने पर जोर दिया. 

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे होकर विश्व के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का आवागमन होता है, लेकिन ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है. 

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यूरोपीय देश चाहते हैं कि ट्रंप का मकसद क्या हैं, वह जल्द साफ करें. इसके साथ ही अमेरिका की आगे की रणनीति क्या है? 

युद्ध के 17 दिन में क्या हासिल हुआ? 

28 फरवरी को इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया था. इस जंग में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत बड़े नेता और सेना के टॉप कमांडर मारे गए हैं. इजरायल ने ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी के मारे जाने का भी दावा किया है. उन्हें खामेनेई का करीबी माना जाता है. खामेनेई की मौत के बाद सभी फैसले वही ले रहे थे, क्योंकि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अभी तक सामने नहीं आए हैं. 

यह भी पढ़ें- सिर्फ एक सेकंड की देरी और चली जाती जान! मिसाइन हमले की खौफनाक साजिश से ऐसे बचे मोजतबा खामेनेई

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ईरान ने जवाब देते हुए मिडिल ईस्ट के देशों के जरिए अमेरिका पर हमला किया. जिसमें कई अमेरिकी सैनिक मारे गए. वहीं, एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अब तक 1800 लोगों की मौत होे चुकी है. 

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