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चीनी विदेश मंत्री ने पाक आर्मी चीफ मुनीर की मुंह पर ही कर दी बेइज्जती, कहा- अब बातें नहीं एक्शन चाहिए, हमारे नागरिकों की जान कीमती है

चीन दौरे पर पहुंचे पाक सेना प्रमुख और फ़ील्ड मार्शल असीम मुनीर की बीजिंग में किरकिरी हो गई. चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठा. पिछले कुछ वर्षों में हुए आतंकी हमलों में कई चीनी इंजीनियर और वर्कर मारे जा चुके हैं. वांग यी ने पाकिस्तान से ठोस सुरक्षा इंतज़ामों की मांग की, जबकि असीम मुनीर ने चट्टान जैसी दोस्ती की बात कही. भारत-पाक मई 2025 संघर्ष के मुनीर की पहली चीन की यात्रा थी.

चीनी विदेश मंत्री ने पाक आर्मी चीफ मुनीर की मुंह पर ही कर दी बेइज्जती, कहा- अब बातें नहीं एक्शन चाहिए, हमारे नागरिकों की जान कीमती है
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चीन की राजधानी बीजिंग में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की हालिया यात्रा का उद्देश्य जितना रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना था, उसका असर उतना ही नकारात्मक साबित होता दिखाई दे रहा है. भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव के बाद यह असीम मुनीर की पहली आधिकारिक चीन की यात्रा थी, लेकिन इस दौरे के दौरान चीन ने जिस तरह से अपनी नाराजगी जाहिर की, उसने पाकिस्तान के कूटनीतिक समीकरणों को झकझोर दिया है.

मुनीर ने की चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात 

बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान असीम मुनीर को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा जब वांग यी ने पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर कड़ा सवाल उठाया. पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में हुए आतंकी हमलों में कई चीनी नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें इंजीनियरों से लेकर परियोजना कार्यकर्ता तक शामिल हैं. इन घटनाओं से चीन की चिंता बढ़ी है और अब वह पाकिस्तान से सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहा है. 2024 में कराची एयरपोर्ट के बाहर हुए आत्मघाती कार बम विस्फोट में जहां तीन चीनी इंजीनियर मारे गए थे, वहीं उसी वर्ष मार्च में उत्तर पाकिस्तान में हुए एक और आत्मघाती हमले में पांच चीनी वर्कर की जान गई थी. इन घटनाओं के बाद चीन ने इस्लामाबाद को कड़ा संदेश देते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की बात कही थी. बीजिंग में वांग यी के सामने जब असीम मुनीर ने ‘चट्टान जैसी मजबूत दोस्ती’ का जिक्र किया, तब चीन का लहजा अपेक्षाकृत सख्त था.

कूटनीतिक प्रयास कर रहा पाकिस्तान 

चीन-पाक रिश्तों में दिख रही यह तल्खी ऐसे समय पर सामने आई है जब पाकिस्तान अपने क्षेत्रीय रक्षा गठबंधनों को मजबूत करने के लिए सैन्य कूटनीति का सहारा ले रहा है. असीम मुनीर को भारत-पाक सैन्य संघर्ष के बाद ‘फील्ड मार्शल’ की पदोन्नति दी गई है और यह दौरा उसी रणनीति का हिस्सा था. लेकिन बीजिंग में जो हुआ, वह इस बात का संकेत देता है कि केवल ओहदे या पुराने रिश्तों के सहारे अब कूटनीतिक विश्वास कायम नहीं रखा जा सकता. हालांकि, इस मुलाकात में कुछ औपचारिकताएं भी निभाई गईं. वांग यी ने असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बनने पर बधाई दी और पाकिस्तान को ‘हर परिस्थिति में साथ निभाने वाला रणनीतिक साझेदार’ बताया. उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान चीन के लिए प्राथमिकता बना रहेगा. लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में यह बात स्पष्ट थी कि सहयोग की मजबूती तभी बनी रह सकती है जब दोनों देश एक-दूसरे के मूल हितों का निष्ठापूर्वक सम्मान करें. इसका मतलब साफ है कि चीन अब केवल 'भाईचारे' की बातें सुनना नहीं चाहता, उसे ठोस सुरक्षा नीतियां और परिणाम चाहिए.

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चीन का दो टूक संदेश 

चीन का यह बदला हुआ रुख न सिर्फ पाकिस्तान की छवि के लिए नुकसानदायक है, बल्कि उसे आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी भारी पड़ सकता है. चीन ने पाकिस्तान में अरबों डॉलर की परियोजनाओं में निवेश किया है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ यानी CPEC. यदि भविष्य में सुरक्षा के मसले पर चीन ने अपने निवेश की रणनीति बदली, तो पाकिस्तान की पहले से जर्जर होती अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा. ऐसे में चीन ने भले ही औपचारिक रूप से पाकिस्तान के साथ रिश्तों को मजबूत बताया हो, लेकिन असीम मुनीर के इस दौरे से यह संदेश भी साफ हो गया है कि बीजिंग अब 'शब्दों' के भरोसे नहीं बैठेगा. पाकिस्तान के लिए यह समय है अपने अंदरूनी सुरक्षा ढांचे को फिर से मजबूत करने का, वरना वह अपने सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाएगा.

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गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी साफ कर दिया है कि चीन अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर उतना ही गंभीर है जितना वह अपने व्यापारिक और राजनीतिक हितों को लेकर होता है. पाकिस्तान के लिए यह एक चेतावनी की तरह है कि केवल रक्षा करारों और सैन्य दौरे से भरोसा कायम नहीं रहता, बल्कि उसे जमीन पर भी उसी ईमानदारी से अमल में लाना होता है.

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