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'भारत-चीन के बीच टकराव के लिए ये ही जिम्मेदार', रूस के विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों पर साधा निशाना

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी देशों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने पश्चिमी देशों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पश्चिमी देश भारत और चीन को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं.

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16 May 2025
( Updated: 06 Dec 2025
06:15 AM )
'भारत-चीन के बीच टकराव के लिए ये ही जिम्मेदार', रूस के विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों पर साधा निशाना
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रूस ने अमेरिका के ख़िलाफ़ एक नया मोर्चा खोल दिया है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी देशों पर जो बयान दिया उससे हड़कंप मचा हुआ है. लावरोव ने पश्चिमी देशों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पश्चिमी देश भारत और चीन को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं. सरकारी समाचार एजेंसी टीएएसएस की खबर के मुताबिक, लावरोव ने मॉस्को में ‘सीमाओं के बिना संस्कृति: सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका और विकास’ विषय पर आयोजित डिप्लोमैटिक क्लब की बैठक में यह टिप्पणी की. अब ये टिप्पणी अंतराष्ट्रीय लेवल पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

‘भारत और चीन के बीच टकराव पैदा करने की कोशिश’
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा, ‘एशिया-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर गौर करें, जिसे पश्चिम ने अपनी नीति को स्पष्ट रूप से चीन विरोधी रुझान देने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र कहना शुरू कर दिया है, इस उम्मीद के साथ भी कि इससे हमारे महान मित्रों और पड़ोसी देशों भारत और चीन के बीच टकराव पैदा किया जा सकेगा.’ 
क्वाड के आलोचक रहे हैं लावरोव 
लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश एशिया में आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, “पश्चिमी सहयोगी दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी प्रभावशाली भूमिका में आना चाहते हैं. वो आसियान की केंद्रीय भूमिका को कमजोर करना चाहते हैं.’ बता दें कि लावरोव चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए स्थापित चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) के मुखर आलोचक रहे हैं. क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. 

आसियान के बारे में भी बोले लावरोव
रूसी विदेश मंत्री ने कहा, ‘आम सहमति के नियम, साझा आधार की तलाश-इन सभी को हमारे पश्चिमी सहयोगी धीरे-धीरे दरकिनार करना शुरू कर रहे हैं और कुछ आसियान देशों को एकीकृत मंचों के बजाय खुले तौर पर प्रतिरोधी मंचों से जुड़ने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं.’ जानकारी देते चले कि आसियान दक्षिण-पूर्वी एशिया के 10 देशों का एक क्षेत्रीय समूह है, जिसका उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है. इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और वियतनाम इसके सदस्य देश हैं.
लावरोव ने आगे कहा, ‘यूरेशिया जैसा कोई दूसरा महाद्वीप नहीं है, जहां इतनी सारी सभ्यताएं एक साथ रहती हैं और जिन्होंने आधुनिक युग में भी अपनी पहचान एवं प्रासंगिकता बनाए रखी है. हालांकि, यूरेशिया एकमात्र ऐसा महाद्वीप भी है, जहां कोई महाद्वीप-व्यापी मंच नहीं है. यूरेशिया में इस तरह के एकीकृत मंच की जरूरत है, ताकि कई बड़ी, वास्तव में महान शक्तियों और सभ्यताओं के हितों में सामंजस्य स्थापित किया जा सके.’ 
उन्होंने याद दिलाया कि अफ्रीका में जहां उप-क्षेत्रीय मंचों के अलावा अफ्रीकी संघ मौजूद है, वहीं लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में लातिन अमेरिकी और कैरीबियाई राज्यों का समुदाय (सीईएलएसी) है, जबकि यूरेशिया में अभी तक ऐसा कोई मंच नहीं बनाया जा सका है.

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