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डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका...अमेरिकी अदालत ने ज्यादातर टैरिफ को बताया गैरकानूनी, राष्ट्रपति बोले- ये फैसला डिजास्टर साबित होगा

अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए अधिकांश टैरिफ को अवैध करार दिया. अदालत ने 7-4 के फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को आपातकाल की स्थिति में कई कदम उठाने का अधिकार है, लेकिन टैरिफ या टैक्स लगाने का नहीं. यह ट्रंप की व्यापार नीति पर बड़ा झटका है और मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक जाने की संभावना है.

डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका...अमेरिकी अदालत ने ज्यादातर टैरिफ को बताया गैरकानूनी, राष्ट्रपति बोले- ये फैसला डिजास्टर साबित होगा
Donald Trump (File Photo)
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अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था में शुक्रवार को एक बड़ा मोड़ आया जब संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए कई टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया. अदालत का यह फैसला न केवल ट्रंप की व्यापार नीति पर सीधा प्रहार माना जा रहा है, बल्कि आने वाले दिनों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार संबंधों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है.

अदालत ने फैसले में क्या कहा?

वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने 7-4 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया. अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में कई कदम उठाने का अधिकार है, लेकिन इन शक्तियों में टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार शामिल नहीं है. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया. यह 1977 का कानून मुख्य रूप से प्रतिबंधों और संपत्ति जब्ती के लिए बनाया गया था, लेकिन इसे टैरिफ लगाने के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता.

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किन टैरिफ पर पड़ेगा असर

यह फैसला अप्रैल में लगाए गए उन रेसिप्रोकल ड्यूटीज पर लागू होगा जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने व्यापार युद्ध की रणनीति के तहत लागू किया था. इसके अलावा चीन, कनाडा और मैक्सिको पर फरवरी में लगाए गए टैरिफ भी अब इस दायरे में आ गए हैं. हालांकि स्टील और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर पर लगाए गए टैरिफ, जो अलग कानूनों के तहत लागू हुए थे, इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे. ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि IEEPA के तहत राष्ट्रपति को आयात को नियंत्रित करने का अधिकार है और यही अधिकार टैरिफ लगाने तक विस्तारित होता है. लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि कानून में न तो टैरिफ का जिक्र है और न ही ऐसी कोई प्रक्रिया दी गई है.

ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया

फैसले के कुछ मिनटों बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर अपना आक्रामक बयान जारी किया. उन्होंने इस फैसले को “अमेरिका के लिए पूरी तरह आपदा” करार दिया. ट्रंप ने लिखा, “अगर यह टैरिफ हटे तो यह देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा. अदालतें पक्षपाती हैं लेकिन हमें भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट हमारे पक्ष में फैसला देगा.” ट्रंप ने आगे कहा कि अगर टैरिफ हटाए गए तो अमेरिकी किसानों, उत्पादकों और उद्योगों को सीधी चोट लगेगी. उन्होंने विदेशी देशों पर अनुचित व्यापारिक बाधाएं लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका अब भारी व्यापार घाटे को बर्दाश्त नहीं करेगा.

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

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वाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ फिलहाल लागू रहेंगे और सरकार को विश्वास है कि अंततः इस मामले में उनकी जीत होगी. अदालत ने भी अपने आदेश को 14 अक्टूबर तक रोक दिया है ताकि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके.

ट्रंप को पहले भी कोर्ट से मिली है निराशा 

यह पहला मौका नहीं है जब अदालतों ने ट्रंप की टैरिफ नीति को असंवैधानिक बताया हो. इससे पहले यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 28 मई को ट्रंप के टैरिफ को अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया था. इस पैनल में एक न्यायाधीश भी शामिल थे जिन्हें ट्रंप ने ही नियुक्त किया था. वाशिंगटन की एक अन्य अदालत ने भी IEEPA के तहत टैरिफ लगाने को गलत ठहराया था. अब तक ट्रंप की नीतियों को चुनौती देने वाले कम से कम आठ मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं. इनमें कैलिफोर्निया राज्य का केस भी शामिल है.

अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ेगा असर

यह फैसला अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है. टैरिफ का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार से है. यदि ट्रंप के टैरिफ हटते हैं तो अमेरिका के आयातित सामान सस्ते हो सकते हैं, लेकिन इससे घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा. वहीं अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला देता है तो विदेशी देशों पर अमेरिका की पकड़ और कड़ी हो सकती है. ट्रंप का दावा है कि उनके टैरिफ ने चीन और अन्य देशों को झुकने पर मजबूर किया और अमेरिकी उद्योग को राहत मिली. लेकिन आलोचक मानते हैं कि इन टैरिफ की वजह से घरेलू उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़े और वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा.

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बहरहाल, अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है. अगर सुप्रीम कोर्ट अपील अदालत के फैसले को बरकरार रखता है तो ट्रंप की व्यापार नीति को सबसे बड़ा कानूनी झटका लगेगा. वहीं अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला देता है तो उनके अन्य फ़ैसलों को मजबूती मिलेगी. ऐसे में अमेरिकी राजनीति में यह फैसला किसी भूचाल से कम नहीं है. ट्रंप जहां इसे “अमेरिका के लिए आपदा” बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की जीत मान रहे हैं. 

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