×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

कौन हैं अमित धुर्वे? जिनके मुरीद हुए धीरेंद्र शास्त्री, टी-सीरीज से लेकर विदेशों से ऑफर, एक कॉल ने बनाया स्टार

अपनी आवाज का जादू चलाकर सोशल मीडिया सेंसेशन बने अमित धुर्वे की जिंदगी संघर्षों से भरी रही. बपचन में मां को खो दिया, नदी किनारे झोपड़ी ही उनका ठिकाना थी, ट्रेनों में गाकर परिवार का पेट भरा. फिर गांव-गांव भजन मंडली के साथ घूमकर गाने लगे.

कौन हैं अमित धुर्वे? जिनके मुरीद हुए धीरेंद्र शास्त्री, टी-सीरीज से लेकर विदेशों से ऑफर, एक कॉल ने बनाया स्टार
Advertisement

मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला, एक छोटा सा गांव और नर्मदा किनारे बनी एक झोपड़ी. यहां रहने वाले एक शख्स के पास एक रात कॉल आती है. कॉल पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री थे. फोन पर धीरेंद्र शास्त्री ने उस शख्स से केवल इतना कहा कि, आपको नवरात्रि में बागेश्वर धाम आना है और यहीं से उस शख्स की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई. 

ये कहानी है भजन मंडली में गाने वाले एक छोटे से आदिवासी कलाकार अमित धुर्वे की. जिन्होंने अपनी आवाज का ऐसा जादू चलाया कि आज टी-सीरीज से लेकर विदेशी म्यूजिक कंपनी तक उन्हें अपना मंच देना चाहती हैं. जानते हैं झोपड़ी में रहने वाले अमित धुर्वे का सफर. 

भजन मंडली से सोशल मीडिया सेंसेशन कैसे बने अमित धुर्वे? 

अमित धुर्वे की करिश्माई आवाज और अलग हटकर गायन शैली ने उन्हें रातों-रात फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया. बेहद गरीब आदिवासी परिवार से आने वाले अमित धुर्वे ने जब बागेश्वर धाम में अपने सुरों का जादू बिखेरा तो पंडित धीरेंद्र शास्त्री उनके इस कदर मुरीद हो गए कि अपना एक दिन का चढ़ावा उनके नाम कर दिया. बागेश्वर धाम में गजल शैली में गाया गया उनका भजन सोशल मीडिया पर इतना हिट हो गया कि आज उनके पास नामी म्यूजिक कंपनियों के ऑफर हैं. 

Advertisement

दरअसल, अमित धुर्वे का वीडियो किसी ने धीरेंद्र शास्त्री तक पहुंचा दिया. अमित धुर्वे की आवाज और अंदाज देख बागेश्वर धाम इतना प्रभावित हो गए कि उन्हें अपने दरबार में गाने के लिए बुलाया. फिर क्या था अमित धुर्वे ने नर्मदा माता की महिमा पर शानदार भजन गाया. आवाज और गजल भरा भजन गाने का अंदाज देख एक पल को मानों सब ठहर गया, लोग उन्हें एकटक निहारते रहे. न तालियां रुकीं न वाहवाही. खुद पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री अमित धुर्वे का ये अद्भुत टैलेंट देख काफी प्रभावित हो गए. बागेश्वर धाम में गाए उनके भजन सोशल मीडिया पर धूम मचाने लगे. अब उन्हें कनाडा में परफॉर्मेंस और टी-सीरीज जैसी नामी कंपनियों के ऑफर आने लगे हैं. हालांकि अमित धुर्वे का यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा. धीरेंद्र शास्त्री की कॉल से पहले उनके टैलेंट को कभी बड़ा मंच नहीं मिला था. 

बचपन में मां की मौत, तकलीफ भरा बचपन 

Advertisement

अमित धुर्वे मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के कटनी इलाके के छोटे से गांव बड़गांव के रहने वाले हैं. उनकी दो मां थी, जब वह 8 साल के थे तब मां का निधन हो गया इसके बाद बड़ी बहन ने ही उन्हें पाला. वे 10 भाई बहन हैं इनमें सात बहनें और 3 भाई हैं. पूरा परिवार तंबू लगाकर रहता था. न खेती बाड़ी थी न कभी स्कूल गए. 

ट्रेन में पत्थर बजाकर गाने वालों की टोली से जुड़े 

अमित धुर्वे की माली हालत ये थी कि उन्हें मांगकर भी खाना पड़ा. कटनी रेलवे स्टेशन पर एक दिन उन्होंने ट्रेन में पत्थर बजाकर गाने वाले लड़कों को देखा. फिर अमित भी उन्हीं की टोली में शामिल हो गए और दिनभर ट्रेनों में गाकर कुछ कमाई कर लेते. 

Advertisement

अमित धुर्वे ने कहां से सीखी गायकी? 

यूं तो पेट भरने के लिए अमित धुर्वे ने गायकी शुरू की थी, लेकिन आगे चलकर उन्हें इससे प्यार हो गया. अमित के पिता हारमोनियम सुधारा करते थे. गांवों में घूम-घूमकर, डेरे डालकर वह कुछ सामान लेकर बैठ जाते थे. उन्हीं से अमित ने भी हारमोनियम सुधारने का काम सीखा. जब अमित गांव-गांव हारमोनियम सुधारने जाते तो वहां अपनी गायकी भी पेश करते. इस बीच उन्होंने कई रामायण मंडलियों में भी भजन गाए. इसके बाद वह खरगोन के महेश्वर में नर्मदा नदी के तट पर ही झोपड़ी बसाकर रहने लगे. भजन मंडलियों और कथाओं में गाकर गुजारा भर की कमाई हो जाती. नर्मदा तट पर भी उन्होंने कई परफॉर्मेंस दी. यहीं पर किसी ने उनका वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. 

अमित धुर्वे की गायकी से प्रभावित होकर ही एक गांव के तबला वादक ने अपनी बेटी की शादी उनसे की थी. चूंकि, अमित की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी कि इसलिए वह नई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे. अगर कुछ था तो वह केवल उनका टैलेंट और अनुभव था. हालांकि तबला वादक ने पूरा खर्चा उठाकर अपनी बेटी से उनकी शादी करवाई. आज उनके पांच बच्चे हैं. एक समय ऐसा भी आया जब परिवार और आर्थिक चिंताओं में पैरालिसिस का अटैक आ गया. अभी भी वह इससे पूरी तरह नहीं उबर पाए. 

बागेश्वर धाम से आए एक कॉल ने बदली जिंदगी

Advertisement

अमित धुर्वे के संघर्ष उस वक्त अंत की ओर बढ़ने लगे. जब बाबा बागेश्वर ने उन्हें अपने दरबार में गाने का ऑफर दिया. यहां धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों के सामने उनका परिचय दिया. फिर अमित धुर्वे ने अपनी गायकी से सबको प्रभावित कर दिया. बागेश्वर धाम में उनकी परफॉर्मेंस के वीडियोज उनके ऑफिशियल पेज पर अपलोड किए गए. धीरेंद्र शास्त्री ने उस दिन का पूरा चढ़ावा भी अमित धुर्वे की झोली में डाल दिया. 

यह भी पढ़ें

आज अमित धुर्वें की जिंदगी बदल चुकी है उन्हें कई भक्ति टीवी चैनल, नामी म्यूजिक कंपनी और विदेशों से भी गाने के ऑफर आ रहे हैं. वह नामी कलाकारों से मिल रहे हैं. अमित धुर्वे अपनी इस सफलता का क्रेडिट अपने टैलेंट और किस्मत के साथ-साथ बाबा बागेश्वर को देते हैं. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें