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जयपुर में नकली किन्नरों के गैंग का हुआ पर्दाफाश, YouTube से ली ट्रेनिंग, बद्दुआ देकर हर महीने कमाए लाखों

पैसे कमाने के लिए लोग किसी भी हद तक चले जाते हैं, लेकिन वो कहते हैं ना कि गलत तरीक़े से कमाए गए पैसे का भेद भी जल्द ही खुल जाता है. अब एक गिरोह का पर्दाफाश हो गया है.

जयपुर में नकली किन्नरों के गैंग का हुआ पर्दाफाश, YouTube से ली ट्रेनिंग, बद्दुआ देकर हर महीने कमाए लाखों
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पैसे कमाने के लिए लोग किसी भी हद तक चले जाते हैं, लेकिन वो कहते हैं ना कि गलत तरीक़े से कमाए गए पैसे का भेद भी जल्द ही खुल जाता है. अब एक गिरोह का पर्दाफाश हो गया है. 

नकली किन्नरों का हुआ पर्दाफाश 

जयपुर में एक संगठित और Planned तरीके से काम कर रहे नकली किन्नरों के गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. जिसने Youtube जो कि एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, उसे अपना ट्रेनिंग सेंटर बना रखा था. पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह ना सिर्फ आम लोगों का डराकर वसूलती करता था, बल्कि असली किन्नरों की पहचान और परंपराओं का भी गलत इस्तेमाल कर रहा था. 

YouTube से ट्रनिंग लेना था गिरोह

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पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया है कि उन्होंने YouTube पर वीडियो देखकर किन्नर बननें की ट्रेनिंग ली थी. उनकी बोलचाल, हाव-भाव, आशीर्वाद देने का तरीका समेत बद्दुआ किस तरह से दी जाती है, ये भी सिखा था. ये लग किन्नर बनने के लिए ब्लाउज़, मेकअप, नकली बाल, शरीर की बनावट तक को ध्यान में रखते हुए सारी चीज़ प्लान करते थे. जाँच में सामने आया है कि कई वीडियो देखकर ये गिरोह ख़ुद को असली किन्नरों जैसा पेश करने में एक दम माहिल हो गए थे.

परिवार वाली गाड़ियों को किया जाता था टारगेट

बताया जा रहा है कि ये गिरोह ख़ासतौर पर गाड़ियों को टारगेट बनाता था. जिनमें परिवार, महिलाएं या बच्चे मौजूद होते थे. जयपुर-अजमेर हाईवे और शहर के में रेड लाइट सिग्नलों पर एक्टिव ये गिरोह गाड़ी रुकते ही पहुँच जाता था और बद्दुआ देने के नाम पर पैसे मांगता था. 

नए शादीशुदा जोड़ों को जल्दी टारगेट किया जाता था. इतना ही नहीं नई गाड़ियों को ख़ास तौर पर निशाना बनाया था. अगर हाथों में मेहंदी या शादी का सकेंत मिलता, तो ये लोग रकम कई गुना बढ़ा देते थे. 

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डराकर और बदसलूकी कर लोगों से लूटते थे पैसे 

अगर कोई इंसान पैसे देने से मना करता, तो गिरोह के सदस्य गाली-गलौज पर उतर आते थे. कई मामलों ये लोग गाड़ियों के शीशे पीटना, सड़क पर बैठ जाना और कपड़े उठाकर अभ्रद हरकतें करके लोगों डराते थे उनके साथ बदसलूकी करते थे. पुलिस की जांच में पता है की ये लोग पूरी प्लानिंग के साथ इस तरह की हरकतों को अंजाम देते थे. जिससे पीड़ित डरकर उन्हें पैसे दे थे. 

रोजाना 5 हज़ार का टारगेट, महीने में लाखों की कमाई

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इस गिरोह के हर सदस्य किन्नर बनकर हर दिन हजारों और महीने में लाखों की वसूली करते थे. बताया गया है कि गिरोह के हर सदस्य के लिए रोजाना 5 हज़ार रुपये की वसूली का टारगेट तय था, इस हिसाब से ये गिरोह हर महीने लाखों रुपये की अवैध कमाई कर रहा था. 

ये गिरोह वसूली का एक बड़ा हिस्सा नशे और ऐशो-आराम में खर्च करता था, जबकि कमाई का कुछ हिस्सा गिरोह के सरगना को जाता था. 

गिरोह के साथ असली किन्नर भी था शामिल

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पुलिस जाँच में ये भी सामने आया इस गिरोह ने एक असली किन्नर को अपना सरगना बना रखा था. महिला किन्नर सैनी गिरोह को असली किन्नरों के रहन-सहन और तौर तरीकों की ट्रनिंग देती थी. इसके बदले में वसूली करती थी. 

पुलिस ने कई लोगों को किया गिरफ़्तार

वैशाली नगर एसीपी अनिल शर्मा ने बताया  16 मार्च को करणी विहार थाना पुलिस ने इस गिरोह पर कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इनमें माही सैनी सहित कई आरोपी शामिल हैं, जो अलग-अलग नामों से काम करते थे. पुलिस कार्रवाई के बाद जयपुर-अजमेर हाईवे पर एक्टिव अन्य नकली किन्नर गिरोह भी फिलहाल अंडरग्राउंड हो गए हैं.

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यूपी-एमपी से जुड़े हैं गिरोह के तार

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के ज्यादातर सदस्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से जुड़े हैं. मजदूरी छोड़कर आसान कमाई के लालच में ये लोग इस अपराध की दुनिया में आए और धीरे-धीरे गिरोह का हिस्सा बनते गए.

पुलिस की आगे की जांच जारी

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फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के अन्य कनेक्शनों और  सरगनाओं की तलाश में जुटी है.साथ ही ये भी जांच की जा रही है कि इस तरह के और कितने गिरोह प्रदेश में एक्टिव हैं , जो नकली किन्नर बनकर लोगों से पैसे लूटते हैं. 

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