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अंग्रेजों को दहेज में मिला था भारत का सबसे बड़ा शहर, जानिए इस ऐतिहासिक सौदे की पूरी कहानी

क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण शहर मुंबई कभी अंग्रेजों को दहेज में दिया गया था? 17वीं शताब्दी में जब इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय ने पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रगंजा से शादी की, तो पुर्तगाल ने दहेज में बॉम्बे (आज का मुंबई) अंग्रेजों को सौंप दिया।

अंग्रेजों को दहेज में मिला था भारत का सबसे बड़ा शहर, जानिए इस ऐतिहासिक सौदे की पूरी कहानी
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आज के दौर में दहेज को एक सामाजिक बुराई के रूप में देखा जाता है। शादी के समय गहने, गाड़ियां, पैसे या संपत्ति देना आम बात मानी जाती थी, लेकिन इतिहास के पन्नों में एक ऐसी अनोखी घटना दर्ज है, जो शायद ही किसी ने सुनी हो। भारत का सबसे महत्वपूर्ण शहर मुंबई एक समय पर दहेज के रूप में दिया गया था!

जी हां, सही पढ़ा आपने! यह कोई कहानी या कल्पना नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में दर्ज एक सच्ची घटना है। 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय को पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रगैंजा से शादी के उपहार (दहेज) में बॉम्बे (आज का मुंबई) शहर मिला था। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक सौदे की पूरी कहानी, जिसने भारत के भविष्य को गहराई से प्रभावित किया।

कैसे हुआ मुंबई अंग्रेजों के हाथों में?

1498 में पुर्तगाली यात्री वास्को डी गामा पहली बार भारत पहुंचे और भारत में यूरोपीय व्यापार की शुरुआत हुई। 1534 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने बॉम्बे द्वीप समूह को पुर्तगालियों को सौंप दिया। इसके बाद पुर्तगालियों ने यहां अपने किले बनाए और इस क्षेत्र में व्यापार और ईसाई धर्म का विस्तार किया। 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड और पुर्तगाल के बीच मजबूत राजनीतिक संबंध स्थापित करने के लिए इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय और पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रगैंजा की शादी करवाई गई। इस शादी के दहेज के रूप में पुर्तगाल ने इंग्लैंड को बॉम्बे शहर सौंप दिया। हालांकि यह सौदा पुर्तगाल और इंग्लैंड दोनों के लिए फायदेमंद था। इंग्लैंड को एक रणनीतिक व्यापारिक केंद्र मिला, जहां से वह भारत में अपने पैर जमा सकता था। और पुर्तगाल को इंग्लैंड का सैन्य और राजनीतिक समर्थन मिला। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह एक शादी नहीं, बल्कि दो देशों के बीच एक राजनीतिक गठबंधन था, जिसने भारत के इतिहास को बदलकर रख दिया।

कैसे बना मुंबई अंग्रेजों का व्यापारिक गढ़?

जब अंग्रेजों को बॉम्बे मिला, तो यह सिर्फ एक छोटा-सा द्वीप था। लेकिन 1668 में, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अंग्रेजी सरकार से मात्र 10 पाउंड प्रति वर्ष की मामूली कीमत पर लीज पर ले लिया।

इसके बाद अंग्रेजों ने इसे एक व्यापारिक केंद्र में बदलने का फैसला किया। बॉम्बे को एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र बनाने के लिए अंग्रेजों ने बड़े पैमाने पर बंदरगाहों का निर्माण किया। बॉम्बे जल्द ही मसालों, कपड़ों और अन्य वस्तुओं के व्यापार का केंद्र बन गया। नए उद्योगों और व्यापार के कारण यहां लोगों की संख्या बढ़ने लगी और मुंबई एक व्यस्त शहर बन गया। धीरे-धीरे बॉम्बे अंग्रेजों की सत्ता का मुख्य केंद्र बन गया और 19वीं शताब्दी तक यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक बन गया।

बॉम्बे से मुंबई बनने का सफर

ब्रिटिश शासन के दौरान बॉम्बे तेजी से विकास करता गया। यह भारत की आर्थिक राजधानी बन गया, जहां से व्यापार और प्रशासन दोनों संचालित होते थे। लेकिन समय के साथ, भारत में स्वतंत्रता संग्राम तेज हुआ और 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ। 1947 के बाद भी बॉम्बे भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास का केंद्र बना रहा। फिर 1995 में शिवसेना सरकार ने बॉम्बे का नाम बदलकर मुंबई रख दिया, जो कि मराठी संस्कृति और छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने का एक प्रयास था।

आज मुंबई सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का एक प्रमुख आर्थिक केंद्र है। यह बॉलीवुड (फिल्म उद्योग) का घर है। भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज (BSE & NSE) यहीं स्थित है। देश के सबसे बड़े बिजनेस हब्स और कंपनियों का मुख्यालय यहीं मौजूद है। हर साल हजारों लोग अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई आते हैं।  लेकिन शायद ही किसी को पता हो कि यह विशाल शहर कभी एक दहेज का हिस्सा था!

मुंबई का इतिहास अपने आप में बेहद रोचक और रोमांचक है। यह न सिर्फ भारत की आर्थिक धड़कन है, बल्कि इसकी विरासत में पुर्तगाली और ब्रिटिश शासन की गहरी छाप भी है। अगर 1661 में यह सौदा न हुआ होता, तो शायद भारत का इतिहास कुछ और होता। मुंबई का अंग्रेजों तक पहुंचना, उनका इसे व्यापारिक केंद्र बनाना और फिर भारत की आजादी के बाद इसका मुंबई में बदलना यह पूरा सफर अपने आप में एक ऐतिहासिक चमत्कार है।

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