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'इज्ज़त दो या पति की जान…', हिन्दू महिलाओं के सामने दंगाइयों ने रखी थी शर्त, पीड़िता का दावा! मुर्शिदाबाद हिंसा का काला सच! | Exclusive | Part 1

मुर्शिदाबाद के उपद्रवी हिंदू महिलाओं का रेप करने पर उतारू थे, उन्होंने शर्त रखी कि अगर पति-बच्चों की जान बचानी है तो अपनी इज़्ज़त देनी होगी. ये दावा किया है पीड़िता ने. देखिए महिलाओं ने क्या दर्द बयां किया. मुर्शिदाबाद हिंसा का काला सच! | Exclusive | Part 1

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18 Apr 2025
( Updated: 11 Dec 2025
12:22 AM )
'इज्ज़त दो या पति की जान…', हिन्दू महिलाओं के सामने दंगाइयों ने रखी थी शर्त, पीड़िता का दावा! मुर्शिदाबाद हिंसा का काला सच! | Exclusive | Part 1
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पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला इन दिनों काफी सुर्खियों में है. वक़्फ़ संशोधन कानून के विरोध में शुरू हुए विरोध ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया और देखते ही देखते ये हिंदू विरोधी हिंसा में बदल गया.

2011 की जनगणना के अनुसार, मुर्शिदाबाद में मुस्लिमों की आबादी करीब 66.3% है, जिसके 14 साल बाद और बढ़ जाने की संभावना है. ये जिला बांग्लादेश से सटा हुआ है और इस जिले में बांग्लादेशी घुसपैठियों का आतंक है. रिपोर्ट के मुताबिक यहां अच्छी-खासी संख्या इन्हीं की है.

पति की जान के बदले मांगी हिन्दू महिलाओं से उनकी इज़्ज़त!

बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से बहुत भयावह तस्वीर सामने रही हैं. कोलकाता उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद यहां BSF की कंपनी की तैनाती हुई है. मुर्शिदाबाद से सामने रही भयावह तस्वीरों और वीडियो के मद्देनजर NMF News ने ग्राउंड जीरो का रुख किया और पीड़ितों से बात की.

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यहां हमारे संवादाता पंकज प्रसून ने जो चीजें देखीं और सुनीं उसे बयां करना मुश्किल है. दंगाइयों ने हिन्दू महिलाओं की आबरु लूट ली. उन्होंने हिन्दू समाज की महिलाओं और बहन-बेटियों के सामने शर्त रखी कि अगर उन्हें अपने पति की जान बचानी है तो कुछ देना होगा. हवसी दंगाइयों ने कहा कि या तो 'इज़्ज़त दो या पति की जान दो'. NMF News ने ही इसका बड़ा खुलासा किया.

कैसे भड़की मुर्शिदाबाद में हिंसा?

अप्रैल 2025 को मुर्शिदाबाद के जंगीपुरसुती और शमशेरगंज में वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए. शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए. बांग्लादेशी घुसपैठ और करीब 66% मुस्लिम आबादी वाले इस जिले में आए दिन प्रदर्शन होते रहते हैं, हिंसी भी होती रही है जो फौरन सांप्रदायिक हमले का शक्ल अख्तियार कर लेती हैं. 10 अप्रैल को शमशेरगंज में सड़क जाम और पुलिस पर पथराव की घटनाएं सामने आईं.

विरोध से बवालबांग्लादेशी घुसपैठ और BSF की तैनाती

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11 अप्रैलजुमे की नमाज के बादभीड़ ने पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दियादुकानों में तोड़फोड़ की गई और रेलवे स्टेशनों पर हमले किए गएवहीं 12 अप्रैल को शमशेरगंज में मूर्तिकार हरगोबिंद दास और उनके बेटे की हत्या कर दी गई, जबकि 13 अप्रैल को अज्ञात गोली लगने से घायल नाबालिग इजाज मोमिन की मौत हो गई थीराज्य में बढ़ रहे तनाव और हिंसा की घटनाओं पर हाई कोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के आदेश दिए. बीते दिनों कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में BSF की 8 कंपनियां (लगभग 1,000 पुलिसकर्मी शामिल हैं) की तैनाती की गई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकन्यायालय ने मुर्शिदाबाद पर कहा कि हम ‘आंखें बंद नहीं रख सकते’! वहीं HC ने ममता सरकार को 17 अप्रैल तक एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था.

बांग्लादेशी घुसपैठ और कट्टरपंथी संगठनों की संदिग्ध भूमिका? 

मुर्शिदाबादमालदाऔर उत्तर दक्षिण 24 परगना जैसे सीमावर्ती जिले लंबे समय से बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या से जूझ रहे हैंपुलिस सूत्रों के अनुसारहिंसा में शामिल कुछ लोग बांग्लादेशी मूल के हैंजिनके प्रत्य़क्ष और अप्रत्य़क्ष रूप से बांग्लादेशी कट्टरपंथी संगठन ‘अंसार उल बांग्ला’ तथा केरल के सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) जैसे संगठनों से हैं, फिलहाल इनकी भूमिका की जांच जारी है.

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देखें पीड़िता ने कैसे बयां किया अपना दर्द: 

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