×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

बिहार में मिला कुबेर का खजाना...इन 3 जिलों में दबा है 222 मिलियन टन से ज्यादा सोना, चींटियों ने दिया सुराग!

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने बिहार में छिपे हुए गोल्ड का पता लगाने के लिए जियोलॉजिकल मैपिंग की थी. जिसमें बड़े स्वर्ण भंडार के बारे में पता लगा है.

बिहार में मिला कुबेर का खजाना...इन 3 जिलों में दबा है 222 मिलियन टन से ज्यादा सोना, चींटियों ने दिया सुराग!
Advertisement

बिहार की मिट्टी में संस्कृति की महक ही नहीं बल्कि सोने की चमक भी है. ये बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बिहार में देश का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार मौजूद है. यहां धरती के नीचे लगभग 222.8 मिलियन टन गोल्ड होने का अनुमान है. 

बिहार के तीन जिलों जमुई, गया और नवादा में सोने का भंडार है. प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शुरुआती स्वर्ण अयस्क (प्राइमरी गोल्ड ओर) का सबसे बड़ा भंडार बिहार के पास है. इसके पास 222.88 मिलियन टन सोने का भंडार है. बिहार के अकेले जमुई जिले में देश के कुल स्वर्ण अयस्क भंडार का करीब 44% हिस्सा है. बिहार का यह स्वर्ण भंडार काफी है, लेकिन अभी यह व्यावसायिक खुदाई के स्तर तक नहीं पहुंचा है.

जल्द मिल सकती है खुदाई की मंजूरी

जमुई में लंबे समय से स्वर्ण भंडार के खनन की मांग की जा रही थी. बिहार सरकार इसकी मंजूरी के लिए केंद्र से संपर्क में है. गोल्ड रिजर्व के मामले में बिहार पहले पायदान पर है. ये भारत सरकार का दावा है. जबकि दूसरे पायदान पर राजस्थान और फिर तीसरे पर कर्नाटक है.  जबकि गोल्ड उत्पादन में कर्नाटक पहले स्थान पर है. यहां हट्टी और कोलार स्वर्णक्षेत्र से सबसे गोल्ड निकाला जाता है. गोल्ड प्रोडक्शन में कर्नाटक का लगभग 99% योगदान है. 

Advertisement

सोने के भंडार वाला बिहार चाहे तो अपने दम पर प्रदेश को सबसे बड़े आर्थिक राज्य का दर्जा दिला सकता है. सोने का ये भंडार न केवल राज्य में रोजगार और निवेश बढ़ा सकता है, साथ ही साथ राजस्व, रॉयल्टी और टैक्स में भी बिहार को मजबूत बना सकता है. 

कैसे लगा बिहार में गोल्ड भंडार का पता? 

बिहार में स्वर्ण भंडार की खोज में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) विभाग वर्षों से लगा हुआ था. यहां सोने का भंडार खोजने में पूरे 40 साल लग गए. दावा है कि, कई साल पहले चींटियों की वजह से यह खोज शुरू की गई थी. कहा जाता है कि जमुई में एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे चींटियों ने बिल बनाने रखे थे. जब चींटियां नीचे की मिट्टी बाहर निकलने लगीं तो स्थानीय लोगों ने देखा कि उस मिट्टी में छोटे-छोटे पीले कण चमक रहे हैं. उसी पल मिट्टी में सोना दबा होने की बात फैल गई और यहीं से शुरू हुई सोने की खोज. 

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने बिहार में छिपे हुए गोल्ड का पता लगाने के लिए जियोलॉजिकल मैपिंग की थी. इसी दौरान बिहार में सोने के विशाल भंडार का पता चला. GSI ये सर्वे हर साल करता है. जिसका मकसद देश के अलग-अलग राज्यों में खनिज संसाधनो की खोज करना होा है. 

Advertisement

जमुई में कहां हुई सोने की तलाश? 

बिहार में स्वर्ण भंडार में जमुई का कुनार, पाटन और लखनपुर क्षेत्रों में खोज हुई है. जबकि, गया के गुरपा इलाके में स्वर्ण अयस्क होने की संभावना जताई गई है. शुरुआती सर्वे से पता चला है, बिहार में सोने के प्राथमिक भंडार की मात्रा करीब 222 टन से ज्यादा है. ऐसे में अगर बिहार के इस स्वर्ण खजाने की खुदाई होती है तो यह प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे सकता है. 

देश की सबसे पुरानी सोने की खदान कौनसी है? 

यह भी पढ़ें

देश में सबसे पुराना गोल्ड भंडार कोलार गोल्ड फील्ड(KGF) है. ये देश की सबसे पुरानी खदान है. KGF कर्नाटक के कोलार में स्थित है. इसका इतिहास 120 साल पुराना है. यह खदान गोल्ड उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र रहा है. जिस पर फिल्म भी बनी है. हालांकि साल 2001 में यह खदान बंद कर दी गई.
 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें