जिसे सत्ता से दूर रखना नामुमकिन था, महाराष्ट्र की राजनीति में अजेय रहे अजित पवार; निधन पर PM मोदी समेत तमाम नेताओं ने जताया शोक
बारामती में अजित पवार के विमान हादसे की खबर से पूरा महाराष्ट्र स्तब्ध रह गया. यही बारामती उनकी राजनीतिक पहचान का केंद्र रही, जहां से उन्होंने लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया. प्रभावशाली और मजबूत नेता माने जाने वाले अजित पवार ने कम उम्र में राजनीति में कदम रखा और सहकारिता से लेकर सत्ता के शीर्ष तक लंबा सफर तय किया.
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देश की राजनीति के लिए बुधवार की सुबह एक बड़े हादसे और शोक के खबर के साथ हुई. महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का विमान गंभीर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. इस दु:खद हादसे में अजित पवार समेत कुल 6 लोगों की मौत हो गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक लैंडिंग की कोशिश करते समय प्लेन क्रैश हो गया. कहा जा रहा है कि वह किसी कार्यक्रम के लिए यहां पहुंच रहे थे. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विमान ने क्रैश लैंडिंग की या कोई तकनीकी खराबी चलते ये हादसा हुआ है.
बारामती में अजित पवार का विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर ने पूरे महाराष्ट्र को स्तब्ध कर दिया. यह वही बारामती सीट है, जिससे अजित पवार लंबे समय तक विधायक रहे और जिसे उनकी राजनीतिक विरासत का केंद्र माना जाता है. वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने ही भतीजे युयेंद्र पवार को इसी सीट से हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की थी.
प्रभावशाली नेता रूप में बनाई पहचान
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा एक बेहद प्रभावशाली और मजबूत नेता के रूप में देखा गया. राजनीतिक गलियारों में अक्सर कहा जाता था कि वे ऐसे नेता हैं, जिन्हें सत्ता से दूर रखना लगभग नामुमकिन है. उपमुख्यमंत्री पद पर उन्होंने कई बार रिकॉर्ड बनाए, लेकिन तमाम राजनीतिक ताकत और अनुभव के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी तक उनका सफर कभी नहीं पहुंच सका फिर भी, उनका राजनीतिक जीवन संघर्ष, सत्ता, रणनीति और प्रभावशाली फैसलों से भरा रहा. आइए, एक नजर डालते हैं अजित पवार के लंबे और उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक सफर पर.
अजित पवार का राजनीतिक सफर
अजित पवार को राजनीति की समझ और मजबूत आधार पारिवारिक विरासत के रूप में मिला. 22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार ने कम उम्र में ही सार्वजनिक जीवन की राह चुन ली थी. उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत सहकारिता क्षेत्र से हुई, जहां मात्र 23 वर्ष की आयु में वे एक कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के निदेशक मंडल का हिस्सा बने. इसके बाद 1991 में उन्हें पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की जिम्मेदारी सौंपी गई. वे लंबे समय तक, करीब 16 वर्षों तक, इस अहम पद पर बने रहे. इसी वर्ष उन्होंने संसदीय राजनीति में भी कदम रखा और बारामती से पहली बार सांसद चुने गए. विधानसभा की राजनीति में उनका प्रवेश 1995 में हुआ, जब उन्होंने बारामती सीट से चुनाव लड़ा. इसके बाद यह सीट लगभग पूरी तरह उनके नाम हो गई. 2024 तक वे लगातार सात बार बारामती से विधायक चुने गए. अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान अजित पवार ने छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली.
कई मंत्रालयों की संभाल चुके हैं कमान
अजित पवार के राजनीतिक जीवन में मंत्री पदों का भी लंबा और अहम अनुभव रहा. वर्ष 1999 में विलासराव देशमुख के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी मजबूत पकड़ बनाई. साल 2004 में जब एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन की सरकार एक बार फिर सत्ता में लौटी, तब अजित पवार को जल संसाधन मंत्रालय की कमान दी गई. वहीं 2009 से 2014 के बीच पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली सरकार में भी वे अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का संचालन किया.
महाराष्ट्रातील बारामती येथे झालेल्या दुर्दैवी विमान अपघातामुळे मी अत्यंत दुःखी आहे. या अपघातात आपल्या प्रियजनांना गमावलेल्या सर्वांच्या दुःखात मी सहभागी आहे. या दुःखाच्या क्षणी शोकाकुल कुटुंबांना शक्ती आणि धैर्य मिळो, ही प्रार्थना करतो.
— Narendra Modi (@narendramodi) January 28, 2026 Advertisement
PM मोदी समेत कई दिग्गजों ने जताया शोक
महाराष्ट्र में हुए इस भयावह हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि 'श्री अजित पवार जी जनता के नेता थे, जिनका जनता से गहरा जुड़ाव था. उन्हें एक मेहनती और समर्पित व्यक्तित्व के रूप में व्यापक सम्मान मिला. प्रशासनिक मामलों की उनकी समझ और गरीबों-पीड़ितों को सशक्त करने का उनका जुनून हमेशा याद रखा जाएगा. उनका असामयिक निधन अत्यंत चौंकाने वाला और दुखद है. उनके परिवार और असंख्य प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं ओम शांति.' इनके आलावा गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, 'आज एक दुःखद हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और NDA के हमारे वरिष्ठ साथी अजीत पवार जी को खो देने की सूचना से मन अत्यंत व्यथित है.'
महाराष्ट्र के बारामती में हुए दुर्भाग्यपूर्ण विमान हादसे में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार जी एवं अन्य सदस्यों का निधन अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं।
प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि…— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 28, 2026 Advertisement
CM योगी ने भी जताया शोक
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'महाराष्ट्र के बारामती में हुए दुर्भाग्यपूर्ण विमान हादसे में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार जी एवं अन्य सदस्यों का निधन अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है. उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि. मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्माओं को सद्गति एवं शोकाकुल परिवार को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति.' इनके अलावा देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी शोक जताया हुए अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'जनसेवा के प्रति आजीवन समर्पित, लोकप्रिय जननेता, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजीत पवार जी के विमान हादसे में निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है. समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के हितों के लिए उन्होंने सदैव करुणा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया है.' ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि इस हादसे में दिवंगत सभी पुण्यात्माओं को श्रीचरणों में स्थान एवं शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें.'
जनसेवा के प्रति आजीवन समर्पित, लोकप्रिय जननेता, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजीत पवार जी के विमान हादसे में निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के हितों के लिए उन्होंने सदैव करुणा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया है।
ईश्वर से प्रार्थना… pic.twitter.com/pnDci8vbNU Advertisement— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) January 28, 2026यह भी पढ़ें
बताते चलें कि इस दुखद हादसे ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश की राजनीति को गहरे शोक में डुबो दिया है. दशकों तक सत्ता, संघर्ष और प्रभाव की राजनीति करने वाले अजित पवार का इस तरह अचानक चला जाना एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा. उनका राजनीतिक सफर, फैसले और प्रभाव आने वाले समय में लंबे वक्त तक याद किए जाते रहेंगे.
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