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क्या है नेफ्था घोटाला? जानिए कैसे हुई धोखाधड़ी और कैसे CBI ने किया खुलासा!

नेफ्था घोटाले में CBI की विशेष अदालत ने दो दोषियों को 2 से 3 साल की सजा और कंपनी पर जुर्माना लगाया है। इस घोटाले का खुलासा 27 अक्टूबर 2003 को हुआ था, जब सीबीआई ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि मेसर्स श्री हरि प्रमोटर्स लिमिटेड के निदेशक संजय जिंदल और उनके साथियों ने आयातित नेफ्था को कृषि उपयोग के नाम पर खरीदा, लेकिन इसे बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया।

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28 Feb 2025
( Updated: 11 Dec 2025
12:39 AM )
क्या है नेफ्था घोटाला? जानिए कैसे हुई धोखाधड़ी और कैसे CBI ने किया खुलासा!
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देश में होने वाले आर्थिक अपराधों की कड़ी में एक और बड़ा मामला सामने आया, जिसे "नेफ्था घोटाला" के नाम से जाना जाता है। इस घोटाले में दो आरोपियों को सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी ठहराते हुए 2 से 3 साल की कठोर कैद और कुल 75 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला न केवल वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा है, बल्कि इसमें सरकारी विभागों को गुमराह करने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुनाफा कमाने की भी साजिश रची गई थी।

कैसे सामने आया नेफ्था घोटाला?

27 अक्टूबर 2003 को सीबीआई ने गुजरात हाईकोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि मेसर्स श्री हरि प्रमोटर्स लिमिटेड के निदेशक संजय जिंदल और उनके सहयोगियों ने मिलकर एक बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। इन लोगों ने कृषि उत्पादों के निर्माण के लिए आयातित नेफ्था को सरकार से सस्ते दाम पर खरीदा, लेकिन इसका उपयोग सही जगह करने के बजाय इसे गलत तरीके से बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया।

जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले को छुपाने के लिए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC), आबकारी विभाग और बिक्री कर विभाग को नकली एंड-यूज़ सर्टिफिकेट (End-Use Certificates) जमा किए। इतना ही नहीं, कंपनी में डमी डायरेक्टर (फर्जी निदेशक) नियुक्त किए गए ताकि मुख्य आरोपियों पर शक न जाए।

क्या होता है नेफ्था, कैसे होता है इसका गलत इस्तेमाल?

नेफ्था एक अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से पेट्रोलियम, केमिकल इंडस्ट्री और कृषि उत्पादों में किया जाता है। सरकार इसे नियंत्रित दामों पर उन कंपनियों को देती है, जो इसे कृषि या औद्योगिक उपयोग में लाने का दावा करती हैं। लेकिन कई बार कारोबारी कालाबाजारी के जरिए इसे अवैध रूप से बेचते हैं और भारी मुनाफा कमाते हैं। इस मामले में भी आरोपियों ने सरकारी योजनाओं का फायदा उठाते हुए नेफ्था को सस्ते में खरीदा और बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया। इस तरह सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

कौन-कौन है दोषी?

इस मामले में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) ने अतुल जिंदल और संजय कुमार उर्फ संजय मित्तल को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। अतुल जिंदल को 3 साल की कठोर सजा और 25,000 रुपये जुर्माना, संजय कुमार को 2 साल की कठोर सजा और 25,000 रुपये जुर्माना, और मेसर्स श्री हरि प्रमोटर्स लिमिटेड पर 25,000 रुपये का जुर्माना देना होगा।  वैसे आपको बता दें कि CBI ने इस मामले में 16 अगस्त 2005 को चार्जशीट दाखिल की थी। यह मामला विभिन्न आर्थिक अपराध कानूनों और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जिसके बाद अब कोर्ट ने आरोपियों को धोखाधड़ी (धारा 420), जालसाजी (धारा 465), फर्जी दस्तावेजों का उपयोग (धारा 471) और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7, 9, 10 एवं नाफ्था (अधिग्रहण, बिक्री, भंडारण और ऑटोमोबाइल में उपयोग की रोकथाम) आदेश, 2000 की धारा 3(5) के तहत दोषी करार दिया।

आर्थिक अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

इस मामले में सजा सुनाते हुए सीबीआई और कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि ऐसे आर्थिक अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को कानून के शिकंजे से भागने नहीं दिया जाएगा। भारत में हर साल ऐसे कई घोटाले सामने आते हैं, जहां सरकारी योजनाओं का गलत फायदा उठाकर करोड़ों रुपये का गबन किया जाता है। नेफ्था घोटाले का यह फैसला उन कारोबारियों के लिए एक बड़ा झटका है, जो इस तरह के फर्जीवाड़े में शामिल रहते हैं।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस फैसले के बाद सरकार और सीबीआई इस तरह के आर्थिक अपराधों पर और भी सख्ती से शिकंजा कसने के लिए नए नियम बनाएगी या नहीं।

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