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जेल के अंदर से चल रहा था आतंकी नेटवर्क, CIK ने 5 संदिग्धों को दबोचा

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जो जेलों में बंद आतंकवादियों तक गुप्त रूप से सिम कार्ड पहुंचाने की साजिश में शामिल थे। ये गिरफ्तारियां श्रीनगर, बांदीपोरा और अनंतनाग जिलों से की गई हैं।

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04 Feb 2025
( Updated: 10 Dec 2025
11:41 PM )
जेल के अंदर से चल रहा था आतंकी नेटवर्क, CIK ने 5 संदिग्धों को दबोचा
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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने मंगलवार को पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर जेलों में बंद आतंकवादियों को अवैध रूप से सिम कार्ड पहुंचाने की साजिश में शामिल थे। ये गिरफ्तारियां श्रीनगर, बांदीपोरा और अनंतनाग जिलों से की गई हैं।

इस कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जेलों में बंद आतंकवादी बाहर की दुनिया से संपर्क कैसे साध रहे हैं? इस केस की परतें खोलते हुए सामने आया कि आतंकी संगठनों के लिए काम करने वाले कुछ लोग गुप्त रूप से सिम कार्ड की तस्करी कर रहे थे, जिससे जेल में बंद आतंकवादी अपनी गतिविधियों को निर्देशित कर पा रहे थे। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को हाल ही में जानकारी मिली थी कि जेल के अंदर से कुछ संदिग्ध कॉल और मैसेज भेजे जा रहे हैं। यह संदेह तब और गहरा हो गया जब सीआईके अधिकारियों ने केंद्रीय जेल परिसर की तलाशी ली और पाया कि कुछ कैदियों के पास गुप्त रूप से सिम कार्ड पहुंचाए जा रहे थे।

इसके बाद, सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े नेटवर्क को ट्रैक किया, जो इन सिम कार्डों को आतंकियों तक पहुंचा रहा था। जांच के दौरान, कई संदेहास्पद ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड मिले, जिनकी कड़ियां श्रीनगर, बांदीपोरा और अनंतनाग में मौजूद संदिग्धों से जुड़ रही थीं। इसी आधार पर 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की पहचान अब तक पूरी तरह उजागर नहीं की गई है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कुछ लोग टेलीकॉम कंपनियों के रिटेलर्स और एजेंट्स भी हो सकते हैं, जो फर्जी पहचान पर सिम कार्ड जारी कर रहे थे। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार "ये पांचों आरोपी राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ मिलकर आतंकियों को सिम कार्ड की आपूर्ति करने की साजिश में शामिल थे। इनका उद्देश्य जेल के अंदर बंद आतंकियों को बाहरी दुनिया से संपर्क कराना था, जिससे वे अपने नेटवर्क को सक्रिय रख सकें।"  इतना ही नहीं पुलिस अधिकारी ने बताया कि, "हम इस एंगल से भी जांच कर रहे हैं कि क्या जेल के किसी कर्मचारी ने सिम कार्ड अंदर ले जाने में मदद की थी। अगर ऐसा कोई पाया गया, तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।" 

इस मामले के सामने आने के बाद अब जेल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यह स्पष्ट नहीं है कि जेल के अंदर तैनात सुरक्षाकर्मी इस साजिश में शामिल थे या नहीं, लेकिन अधिकारियों को शक है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के यह नेटवर्क लंबे समय तक नहीं चल सकता था। गिरफ्तार लोगों की पहचान अनंतनाग के दाऊदपोरा, श्रीनगर के कमरवारी और कुर्सु-पदशाही बाग इलाकों, तथा बांदीपोरा के नाथपोरा और कालूसा से की गई है। 
कैसे पहुंच रहे थे सिम कार्ड जेल के अंदर?
यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित और गुप्त तरीके से काम कर रहा था। शुरुआती जांच में जो बातें सामने आई हैं, जैसे कुछ स्थानीय टेलीकॉम एजेंट्स और रिटेलर्स फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर नकली पहचान पर सिम कार्ड इशू कर रहे थे। इन सिम कार्डों को जेल के कर्मचारियों, कैदियों के रिश्तेदारों या बाहरी संपर्कों के जरिए आतंकियों तक पहुंचाया जाता था। ये सिम कार्ड जेल में बंद आतंकवादियों को मिलने के बाद गुप्त संदेशों, सोशल मीडिया कम्युनिकेशन और टेरर फंडिंग जैसी गतिविधियों में उपयोग किए जाते थे।

सीआईके के अधिकारियों ने कहा है कि अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस उन टेलीकॉम विक्रेताओं (POS Vendors) की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्होंने ये सिम कार्ड जारी किए। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियां अब जेलों में सख्त नियम लागू करने की योजना बना रही हैं, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो सकें। 

यह मामला साफ दिखाता है कि आतंकवादी संगठन किस तरह जेल के अंदर से भी अपने नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता दिखाते हुए इस साजिश को उजागर कर दिया है, लेकिन यह भी स्पष्ट हो गया है कि आतंकियों के समर्थन में काम कर रहे कुछ लोग अब भी छिपे हुए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले में और गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि आतंकवादियों को हर तरह की मदद पहुंचाने वाले हर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सके।

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