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'सुभाष चंद्र बोस जापान और महात्मा गांधी ब्रिटेन के एजेंट थे...', सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का विवादास्पद बयान

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने एक पॉडकास्ट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को जापान और महात्मा गांधी को ब्रिटेन का एजेंट बताया है. जिसके बाद विवाद शुरू हो गया है. एक शो में उन्होंने देश में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी और कई अन्य मुद्दों पर बात की.

'सुभाष चंद्र बोस जापान और महात्मा गांधी ब्रिटेन के एजेंट थे...', सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का विवादास्पद बयान
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने नेता जी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी पर विवादास्पद बयान दिया है. इसके अलावा न्यायालय के लेटलतीफी पर भी सवाल उठाते हुए एक पूर्व जज पर निशाना साधा. देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी पर भी उन्होंने केंद्र सरकार को जमकर घेरा. बता दें कि काटजू हमेशा अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं. यह सारी बातें उन्होंने एक पॉडकास्ट शो में कही है.

'सुभाष चंद्र बोस जापान के एजेंट थे'

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने सुभाष चंद्र बोस को जापान और महात्मा गांधी को ब्रिटेन का एजेंट बताया है. उन्होंने कहा कि ' सुभाष चंद्र बोस ने कई बार जापान की मदद की. जापान के लोग उनका इस्तेमाल कर रहे थे. अगर वह ऐसा नहीं करते, तो वह उन्हें मार देते. उनकी उपयोगिता उसी समय खत्म हो जाती. साल 1945 में जब जापान ने आत्मसमर्पण किया, तो वह कहां चले गए, इसका आज तक पता नहीं चल सका है. ऐसे में शक गहरा रहा है कि सुभाष चंद्र बोस जापान के एजेंट के रूप में काम करते थे.

'ब्रिटेन के एजेंट थे महात्मा गांधी'

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बाद पूर्व जज ने महात्मा गांधी पर भी विवादास्पद बयान दिए हैं. उन्होंने कहा कि गांधी जी ब्रिटेन के एजेंट थे, उन्होंने राजनीति में धर्म को घुसाकर देश को बहुत नुकसान पहुंचाया. ब्रिटिश सरकार सिर्फ एक ही नीति पर काम करती थी 'फूट डालो-राज करो', जिसे महात्मा गांधी भी बढ़ावा दे रहे थे. गांधी जी की वजह से ही मुसलमानों का झुकाव मुस्लिम लीग की तरफ बढ़ा था. भगत जी जैसे क्रांतिकारी के आंदोलन से लोगों का ध्यान भटका कर सत्याग्रह की तरफ मोड़ दिया. इसके अलावा उन्होंने गांधी के आर्थिक विचारों को प्रतिक्रियावादी और नोआखली जाने को भी पूरी तरह से ढोंग बताया.

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'सुप्रीम कोर्ट के आखिरी 16 जज करप्ट थे'

पॉडकास्ट में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू से जब यह सवाल किया गया कि क्या हायर कोर्ट में जज करप्ट हैं? तो उन्होंने इस पर कहा कि 'यह बात सिर्फ मैं नहीं कह रहा हूं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज अधिवक्ता शांति भूषण ने भी साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आखिरी 16 चीफ जस्टिस करप्ट रह चुके हैं. उन्होंने पूर्व जज रंजन गोगोई पर भी करप्ट होने का आरोप लगाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद पर फैसला सुनाया और बाद में उन्हें राज्यसभा में जगह मिल गई, लेकिन उसी फैसले की कॉपी में लिखी गई है कि बाबरी मस्जिद को गिराना अपराध था. अगर आप अपराध कर रहे हैं, तो फिर दूसरे पक्ष के हक में कैसे फैसला सुना रहे हैं? इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं सभी जज की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा रहा लेकिन न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है.

'देश में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी मिटनी चाहिए'

उन्होंने देश की कई अन्य समस्याओं को गिनवाते हुए कहा कि अभी भी गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी काफी ज्यादा संख्या में है, जो कि जल्द खत्म होनी चाहिए. इनमें भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगना चाहिए. 

पहले भी दे चुके हैं इस तरह का बयान 

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ऐसा पहली बार नहीं है कि उन्होंने इस तरह का बयान दिया है. 10 साल पहले भी उन्होंने एक ब्लॉग में इस मुद्दे को उठाकर महात्मा गांधी पर कई सवालिया निशान लगाए थे. 

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