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UP में अब नहीं चलेगी स्कूलों की मनमर्जी, गलत किताबें पढ़ाने पर लगेगा 5 लाख का फाइन, योगी सरकार का सख्त आदेश

UP: बोर्ड ने साफ कर दिया है कि यदि कोई स्कूल तय किताबों के अलावा अन्य अनधिकृत किताबें पढ़ाता या बिकवाता है, तो उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इस फैसले से प्रदेश के लाखों छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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09 Jan 2026
( Updated: 09 Jan 2026
03:26 AM )
UP में अब नहीं चलेगी स्कूलों की मनमर्जी, गलत किताबें पढ़ाने पर लगेगा 5 लाख का फाइन, योगी सरकार का सख्त आदेश
Image Source: Social Media
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CM Yogi: उत्तर प्रदेश में लंबे समय से निजी स्कूलों द्वारा मनमानी करने की शिकायतें सामने आती रही हैं. खासतौर पर अभिभावकों को महंगी और अनधिकृत किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था. अब इस समस्या पर रोक लगाने के लिए यूपी बोर्ड ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि यदि कोई स्कूल तय किताबों के अलावा अन्य अनधिकृत किताबें पढ़ाता या बिकवाता है, तो उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इस फैसले से प्रदेश के लाखों छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है.

अब केवल तय किताबों से ही होगी पढ़ाई

यूपी बोर्ड ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई जाने वाली किताबों की पूरी सूची तय कर दी है. बोर्ड के अनुसार, इन कक्षाओं में कुल 36 विषयों की 70 NCERT की किताबें अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएंगी.इसके अलावा हिंदी, संस्कृत और उर्दू की कुल 12 किताबें भी निर्धारित की गई हैं. ये सभी किताबें फरवरी के पहले सप्ताह तक प्रदेश के सभी जिलों में बिक्री के लिए उपलब्ध करा दी जाएंगी, ताकि छात्रों को समय पर किताबें मिल सकें.

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प्रधानाचार्यों को दी गई कड़ी चेतावनी

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यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि केवल अधिकृत प्रकाशकों की किताबों से ही पढ़ाई कराई जाए. यदि कोई स्कूल इसके अलावा किसी अन्य प्रकाशक की किताब, गाइड बुक या सहायक सामग्री छात्रों को पढ़ाने या खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अब स्कूलों की मनमानी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी

छात्रों पर दबाव डालने पर भारी जुर्माना


यदि कोई स्कूल छात्रों या अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने, अनधिकृत पाठ्य पुस्तकों, या गाइड बुक लेने के लिए मजबूर करता है, तो उस स्कूल पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर स्कूल की मान्यता को अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है या फिर पूरी तरह से रद्द भी किया जा सकता है. बोर्ड ने यह भी कहा है कि अन्य कड़े दंडात्मक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.

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पाइरेसी और डुप्लिकेट किताबों पर भी सख्ती

यूपी बोर्ड ने किताबों की पाइरेसी (नकली छपाई) और डुप्लिकेसी पर भी सख्त रुख अपनाया है. यदि कोई स्कूल या प्रकाशक नकली किताबों के इस्तेमाल या बिक्री में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इससे न केवल छात्रों को सही और गुणवत्तापूर्ण किताबें मिलेंगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

प्रकाशकों पर भी होगी कार्रवाई


बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अधिकृत प्रकाशक तय समय पर किताबें उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि किताबों की कमी का बहाना बनाकर कोई स्कूल अनधिकृत किताबें न पढ़ा सके.

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अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत


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यूपी बोर्ड के इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा अभिभावकों और छात्रों को होगा.अब उन्हें महंगी और बेकार गाइड बुक खरीदने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ेगी. साथ ही शिक्षा का खर्च भी कम होगा और पढ़ाई एक समान पाठ्यक्रम के अनुसार हो सकेगी. कुल मिलाकर, यह फैसला उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सही दिशा में ले जाने वाला माना जा रहा है.

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