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राम मंदिर आंदोलन में हिंदुओं को जगाने वाली साध्वी ऋतंभरा को मोदी सरकार से मिला बड़ा सम्मान

राम मंदिर आंदोलन में अपनी आवाज बुलंद रखने वाली साध्वी ऋतंभरा को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब उनका नाम पद्म भूषण कि लिस्ट में आया तो ये हर सनातनी के लिए गर्व का पल था.

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27 Jan 2025
( Updated: 11 Dec 2025
07:07 AM )
राम मंदिर आंदोलन में हिंदुओं को जगाने वाली साध्वी ऋतंभरा को मोदी सरकार से मिला बड़ा सम्मान
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ओजस्वी वाणी, जोशीले भाषण सौम्यता और वात्सल्य की मूरत, मासूमों की दीदी मां। विरोधियों की काल। राम मंदिर आंदोलन का फायर ब्रांड चेहरा। जिन्होंने अपना हर पल श्रीराम को समर्पित कर दिया। राम मंदिर आंदोलन में नई जान फूंक दी। सनातन की क्रांति का ऐसा बिगुल फूंका की क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग क्या महिला क्या पुरुष देश का जन-जन उनके साथ जुड़ गया। ऐसी शख्सियत को अब मोदी सरकार ने बड़ा सम्मान दिया है ।

22 जनवरी 2024।पूरे देश में रामधुन गूंज रही थी. सदियों की तपस्या और संघर्ष के अंत के साथ अयोध्या में भव्य राम मंदिर में रामलला विराजमान हो गए थे। इस खुशी में भक्त नाच रहे थे गा रहे थे अयोध्या नगरी में वैसे ही उत्सव का माहौल था जैसे सियाराम के वनवास से लौटने के बाद उत्सव हुए। चेहरों पर खुशी ऐसी की मानों भगवान राम के साक्षात दर्शन हो गए हों। इन पलों के बीच एक चेहरा ऐसा था जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वे थीं साध्वी ऋतंभरा  जो अपनी साथी उमा भारती के गले लग कर खूब रोईं। निस्संदेह उनके लिए ये किसी सपने जैसा ही था। इस पल का एहसास जब शब्दों में बयां नहीं हो पाया तो आंखों से छलका। राम मंदिर आंदोलन के लिए जन जन को जगाने वाली साध्वी ऋतंभरा को अब पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब उनका नाम पद्म भूषण कि लिस्ट में आया तो ये हर सनातनी के लिए गर्व का पल था। साध्वी ऋतंभरा को पद्म भूषण मिलने की घोषणा होते ही CM योगी ने भी उन्हें बधाई दी।ये ऋतंभरा के लिए भी गौरव का क्षण था लेकिन वे अपना असली पुरस्कार राम मंदिर को ही मानती हैं।

कौन हैं साध्वी ऋतंभरा ?



लुधियाना के दोराहा गांव में जन्मीं साध्वी ऋतंभरा का मन 16 साल की उम्र में ही आध्यात्म में लग गया था। 1982 में घर छोड़ दिया और हरिद्वार जा पहुंची यहां उन्होंने स्वामी परमानंद से दीक्षा लेकर आध्यात्म की ओर कदम बढ़ा दिया। साथ में राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़ गईं।राम मंदिर आंदोलन से लेकर अब तक साध्वी ऋतंभरा ने खुदको हिंदुत्व और भारत मां के लिए समर्पित कर दिया। चेहरे की सौम्यता ऋतंभरा की बोली में भी झलकती है। लेकिन राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनके जोशीला भाषणों ने हर सनातनी को जगा दिया। राम मंदिर के लिए वे एक दिन में लगातार 10 जनसभाएं करती थीं। हालांकि उनके भाषणों पर एक बार पुलिस ने रोक भी लगा दी थी।

बेसहारा बच्चों की पालनहार


आध्यात्म से जुड़कर साध्वी ऋतंभरा ने जनसेवा का बीड़ा भी उठा लिया था। साल 2021 में उन्होंने वृंदावन में वात्सल्य ग्राम बनाया। जहां बेसहारा बच्चों को सहारा दिया आसरा दिया। 

वात्सल्य ग्राम में आने वाले बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनकी शादी और नौकरी तक का जिम्मा साध्वी ऋतंभरा ही निभाती हैं। वात्सल्य ग्राम के अलावा वे "बालिका सैनिक स्कूल, आदिवासी लड़कियों के लिए स्कूल और कई सामाजिक संस्थाएं भी चलाती हैं"

साध्वी ऋतंभरा के सामाजिक कार्यों के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साल 2024 में उन्हें सम्मानित भी किया था। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर के निर्माण में साध्वी ऋतंभरा के योगदान को सराहा।

साध्वी ऋतंभरा राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व की एक मजबूत आवाज बनी रहीं। उनकी एक ललकार से हिंदू जाग उठता था। छवि ऐसी की विरोधी भी उनके कायल हो जाते थे। साध्वी ऋतंभरा को दुनिया भर में उन्हें अपने सामाजिक कार्यों के लिए सम्मान मिला और अब पद्म भूषण से सम्मानित कर मोदी सरकार ने उनके योगदान को सराहा है भला अपने देश में सम्मान मिलने से बड़ी बात क्या हो सकती है ? मानों इस सम्मान के जरिए उनके वर्षों के संघर्ष और कठिन तपस्या का फल मिल गया हो। 

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