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CM योगी की तारीफ करना सपा विधायक पूजा पाल को पड़ा भारी... अखिलेश यादव ने दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की विधायक पूजा पाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया है. निष्कासन पत्र में कहा गया कि उनके कार्य से पार्टी को गंभीर नुकसान हुआ और यह गंभीर अनुशासनहीनता है.

CM योगी की तारीफ करना सपा विधायक पूजा पाल को पड़ा भारी... अखिलेश यादव ने दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता
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समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करना भारी पड़ गया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूजा पाल को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया है. यह कदम सपा ने ऐसे समय आया है जब पूजा पाल ने विधानसभा में खुलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की थी और अपने पति की हत्या का जिक्र करते हुए न्याय दिलाने के लिए सीएम का आभार व्यक्त किया था.

दरअसल, पूजा पाल की राजनीतिक और निजी जिंदगी हमेशा से ही घटनाओं से भरी रही है. उनके पति राजू पाल की हत्या 2005 में प्रयागराज में हुई थी. इस हत्या का आरोप माफिया अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पर लगा था. पूजा पाल ने विधानसभा में कहा कि उनके पति के हत्यारों को सजा दिलाकर सीएम योगी ने उन्हें न्याय प्रदान किया. यही वजह रही कि उन्होंने खुले तौर पर मुख्यमंत्री की प्रशंसा की, जो उनकी पार्टी के लिए विवाद का कारण बन गया. हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब पूजा पाल सपा से अलग-थलग महसूस कर रही थीं. 

सदन में पूजा पाल ने क्या कहा था?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में 'विजन डॉक्यूमेंट 2047' पर 24 घंटे चली मैराथन चर्चा को संबोधित करते हुए सपा विधायक पूजा पाल ने कहा था, "मैंने अपना पति खोया है, सब जानते हैं कि मेरे पति की हत्या कैसे हुई और किसने की. मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने मुझे न्याय दिलाया और मेरी बात तब सुनी जब किसी ने नहीं सुनी. मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में मुझ जैसी कई महिलाओं को न्याय दिलाया और अपराधियों को दंड दिया. मुख्यमंत्री ने जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियां लाकर अतीक अहमद जैसे अपराधियों को मिट्टी में मिलाया है." उन्होंने कहा आगे कहा था, "पूरा प्रदेश मुख्यमंत्री की ओर विश्वास से देखता है. 'मेरे पति के हत्यारे अतीक अहमद को मुख्यमंत्री ने मिट्टी में मिलाने का काम किया.’ मैं उनके इस जीरो टॉलरेंस का समर्थन करती हूं. मैंने तब आवाज उठाई थी, जब मैंने देखा कि कोई भी अतीक अहमद जैसे अपराधियों के खिलाफ लड़ना नहीं चाहता. जब मैं इस लड़ाई से थकने लगी, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे न्याय दिलाया.”

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राज्यसभा चुनाव में भी किया था क्रॉस वोटिंग 

इससे पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान पूजा पाल समेत आठ विधायकों ने पार्टी के निर्देश का पालन नहीं किया और भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी. इससे पहले भी चार विधायकों को पार्टी ने निकाल दिया था. अब पूजा पाल का निष्कासन उसी का हिस्सा माना जा रहा है. गुरुवार को अखिलेश यादव के हस्ताक्षर से जारी निष्कासन पत्र में पूजा पाल पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. पत्र में साफ लिखा गया है कि उन्हें सचेत किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने गतिविधियां जारी रखीं. इसके कारण पार्टी को नुकसान हुआ और उन्हें सभी पदों से हटाने का निर्णय लिया गया. साथ ही, उन्हें पार्टी के किसी भी कार्यक्रम या बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

कब शुरू हुआ था पूजा पाल का राजनीतिक सफर  

पूजा पाल के राजनीतिक सफर की शुरुआत भी दुखद और संघर्षपूर्ण रही है. उनके पति राजू पाल को 2005 में विधायक बनने के कुछ ही समय बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. यह घटना उस समय हुई जब अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ को सपा ने इलाहाबाद पश्चिमी सीट पर टिकट दे दिया था. राजू पाल ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गए. अशरफ ने हार को स्वीकार नहीं किया और ताबड़तोड़ फायरिंग में राजू पाल की हत्या कर दी. पूजा पाल ने इस कठिन दौर में भी हिम्मत नहीं छोड़ा. बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी जॉइन किया और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कौशांबी की चायल सीट से सपा के टिकट पर जीत हासिल की. 

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सपा का फैसला बना चर्चा का विषय 

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अब पूजा पाल का सपा से निष्कासन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है. यूपी की राजनीति पर करीब से नजर रखने वालों का कहना है कि यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश भी हो सकती है, लेकिन वहीं यह सवाल भी उठता है कि क्या सपा अपने अंदर से अलग राय रखने वाले नेताओं को भी स्वीकार करेगी. पूजा पाल का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करना और अपने पति की हत्या का जिक्र करना, सपा के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गया. यह घटनाक्रम बताती है कि भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत और पारिवारिक दर्द अक्सर राजनीतिक फैसलों को प्रभावित करता है.

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