×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

PM मोदी ने TMC को लिया आड़े हाथ, कहा- राष्ट्रपति का अपमान कर ममता सरकार ने सारी हदें पार कीं

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम को लेकर प्रोटोकॉल विवाद बढ़ गया है. पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए इस घटना को शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुए व्यवहार से लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय में विश्वास रखने वाले लोग आहत हुए हैं.

PM मोदी ने TMC को लिया आड़े हाथ, कहा- राष्ट्रपति का अपमान कर ममता सरकार ने सारी हदें पार कीं
Narendra Modi/ Mamata Banerjee (File Photo)
Advertisement

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एक कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ प्रोटोकॉल विवाद अब देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है. इस घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे मामले को बेहद शर्मनाक बताया है, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. इस घटनाक्रम ने लोकतंत्र, संवैधानिक पदों की गरिमा और आदिवासी समुदाय के सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताई नाराजगी

इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया. पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुआ व्यवहार बेहद शर्मनाक है. उन्होंने लिखा कि जो लोग लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखते हैं, वे इस घटना से आहत और निराश हैं. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति खुद आदिवासी समाज से आती हैं और उनके द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा ने देश के लोगों के मन को भी दुखी किया है. प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार पर भी कड़ा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस मामले में राज्य प्रशासन ने सारी हदें पार कर दी हैं. राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और उसकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में समझदारी से काम करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जाएगा.

Advertisement

अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति

दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंची थीं. यह कार्यक्रम संथाल समुदाय की संस्कृति, परंपरा और उनके सामाजिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था. लेकिन राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल से जुड़ी कुछ बातों को लेकर विवाद खड़ा हो गया. राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने रखी कि तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें रिसीव करने के लिए राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री या कोई मंत्री मौजूद नहीं था. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इससे कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन इस घटना ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दे दिया. इसके बाद कार्यक्रम स्थल को लेकर भी उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की.

Advertisement

कार्यक्रम स्थल की छोटी व्यवस्था पर जताई नाराजगी

राष्ट्रपति ने कहा कि जिस स्थान पर अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया था, वह जगह काफी छोटी थी. उनके अनुसार वहां पांच हजार लोगों के बैठने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. इसके कारण बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए. उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था नहीं की गई.

विधाननगर मैदान देखकर हुआ आश्चर्य

कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं. वहां मैदान का विशाल आकार देखकर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह मैदान इतना बड़ा है कि यहां लाखों लोग एक साथ आ सकते हैं. राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का आयोजन इसी मैदान में किया जाता तो करीब पांच लाख लोग आसानी से इसमें शामिल हो सकते थे. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी जगह उपलब्ध थी तो फिर कार्यक्रम के लिए छोटी जगह क्यों चुनी गई.

ममता बनर्जी ने आरोपों को किया खारिज

Advertisement

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कोलकाता में एक धरना स्थल से बोलते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कॉन्फ्रेंस की आयोजक नहीं थी. उनके अनुसार उन्हें इस कार्यक्रम, इसके आयोजकों या इसकी फंडिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के राज्य में आने या जाने की आधिकारिक सूचना उन्हें मिलती है, लेकिन इस कार्यक्रम के बारे में उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी.

राष्ट्रपति के सम्मान की बात दोहराई

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति का सम्मान करना उनकी जिम्मेदारी है और वे हमेशा उनका सम्मान करती हैं. उन्होंने कहा कि वह इस समय धरने पर बैठी हुई थीं और इसलिए कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति साल में एक बार आती हैं तो वह स्वागत जरूर करती हैं, लेकिन चुनावी माहौल में हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं होता. इसके साथ ही ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले राज्य की राजनीति को अस्थिर करने की कोशिश हो रही है. उनके अनुसार बंगाल चुनाव के बाद उनकी पार्टी पूरे देश में घूमकर बीजेपी की सच्चाई सामने लाएगी.

यह भी पढ़ें

बहरहाल, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवैधानिक पदों की गरिमा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए. फिलहाल इस मुद्दे पर देश की राजनीति गर्म है और आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें