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दुनिया के सामने पाकिस्तान की शर्मनाक कबूलनामा, UN में भारत ने दिखाई सच्चाई

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को 'दुष्ट राज्य' करार देते हुए उसके आतंकवाद को समर्थन देने की नीतियों का पर्दाफाश किया है। पहलगाम हमले के बाद UN में भारत की उप-प्रतिनिधि योजना पटेल ने साफ कहा कि पाकिस्तान आतंकियों को फंड, ट्रेनिंग और शरण देता है।

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29 Apr 2025
( Updated: 08 Dec 2025
12:35 PM )
दुनिया के सामने पाकिस्तान की शर्मनाक कबूलनामा, UN में भारत ने दिखाई सच्चाई
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22 अप्रैल 2025 की शाम, जम्मू-कश्मीर के सुरम्य पहलगाम घाटी में अचानक गोलियों की आवाज गूंजती है. जहां कभी सैलानी प्रकृति की गोद में सुकून लेने आते थे, वहां गोलियों की बौछार से चीख-पुकार मच गई. इस भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई और कई अन्य घायल हुए. इस घटना ने देश को 26/11 की याद दिला दी. अंतर बस इतना था कि इस बार हमला खुले मैदान में नहीं, बल्कि एक शांत पहाड़ी वादी में हुआ था. जो लोग पहलगाम की खूबसूरती के किस्से सुनकर वहां पहुंचे थे, उन्हें यह कल्पना भी नहीं थी कि उनकी यात्रा मौत में बदल जाएगी.

हमलावर कौन थे?

जांच में पता चला कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है. तीन आतंकियों की पहचान की गई. सबसे चौंकाने वाला नाम था हाशिम मूसा का, जो न सिर्फ आतंकी निकला, बल्कि पाकिस्तान की सेना का पैरा कमांडो भी रहा था. उसके साथियों की पहचान अली भाई और आदिल हुसैन ठोकर के रूप में हुई. इन तीनों ने सुनियोजित तरीके से पर्यटकों पर हमला किया. उन्हें स्थानीय ओवरग्राउंड वर्करों की मदद भी मिली. इस हमले में जो साजिश सामने आई, वह पाकिस्तान की भूमिका को बेनकाब करने वाली थी.

पाकिस्तान का कबूलनामा

जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस हमले को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाया, तो पाकिस्तान की तरफ से सफाई देने की बजाय एक कबूलनामा सामने आया. पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने वर्षों तक अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए आतंकवाद को समर्थन, प्रशिक्षण और धन मुहैया कराया. उनका यह बयान किसी दस्तावेज से कम नहीं था. उन्होंने कहा कि यह उनकी "गलती" थी, जिसका खामियाजा पाकिस्तान आज तक भुगत रहा है. लेकिन सवाल ये है कि अगर ये गलती थी, तो आज भी पाकिस्तान उसी राह पर क्यों चल रहा है?

संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रहार

भारत ने इस मौके पर चुप्पी नहीं साधी. संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप-स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में "दुष्ट राज्य" करार दिया. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान जैसे देश इस वैश्विक मंच का उपयोग झूठ फैलाने और भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए करते हैं. उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र को अस्थिर करने और आतंकवाद को पालने-पोसने वाला देश है. उन्होंने पूरी दुनिया को चेतावनी दी कि अब आंखें मूंदने का समय नहीं है. आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने होंगे.

आतंकवाद का दर्द, जिसे भारत दशकों से झेल रहा है

भारत का इतिहास आतंकवाद के जख्मों से भरा है. 26/11 के मुंबई हमलों ने दुनिया को दिखाया था कि पाकिस्तान कैसे आतंकी ठिकानों को बढ़ावा देता है. और अब पहलगाम में हुए हमले ने फिर यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान की नीयत में कोई बदलाव नहीं आया है. भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है. इसकी कीमत आम नागरिकों को जान गंवाकर चुकानी पड़ती है. पहलगाम में मारे गए 26 पर्यटकों की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ एक और गवाही है.

अंतरराष्ट्रीय समर्थन और भारत की पहल
पहलगाम हमले के बाद कई देशों ने भारत के प्रति समर्थन जताया. अमेरिका, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने इस कायराना हरकत की निंदा की. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि यह वैश्विक समुदाय की जिम्मेदारी है कि आतंकवाद के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाई जाए. भारत ने VoTAN (Victims of Terrorism Association Network) जैसी पहलों को भी सराहा, जो आतंकवाद के शिकार लोगों को आवाज देने का प्रयास कर रही हैं. यह पहल न सिर्फ पीड़ितों की पीड़ा को समझने, बल्कि वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ जनमत तैयार करने का काम कर रही है.

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और हाशिम मूसा की तलाश
हमले के बाद भारत की खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गईं. सैकड़ों किलोमीटर में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. ड्रोन, थर्मल इमेजर्स और स्थानीय मुखबिरों की मदद से आतंकियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी की गई. हाशिम मूसा पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया. उसके बारे में जानकारी देने वालों को सुरक्षा देने का भी वादा किया गया. बताया जा रहा है कि मूसा पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तानी आतंकी शिविरों में प्रशिक्षण ले रहा था और उसे कुछ वक्त के लिए लश्कर को सौंपा गया था. यह रणनीति साफ दिखाती है कि पाकिस्तान अब सीधे सेना से आतंकवाद की डोर खींच रहा है.

भारत का यह प्रहार संयुक्त राष्ट्र में बेहद अहम था. भारत ने सिर्फ पाकिस्तान को बेनकाब नहीं किया, बल्कि पूरी दुनिया को यह याद दिलाया कि आतंकवाद अब किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक संकट है. आज पाकिस्तान जैसे देश यदि आतंकवाद को पनाह देते हैं, तो कल उसका असर दुनिया के किसी भी कोने में महसूस किया जा सकता है. पहलगाम हमले ने दुनिया को एक और चेतावनी दी है. यह वक्त है जब वैश्विक मंचों पर सिर्फ निंदा नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई की जरूरत है.

पहलगाम का नाम अब सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि एक खौफनाक हमले की वजह से भी लिया जाएगा. लेकिन भारत इस दर्द को चुपचाप सहने वाला देश नहीं है. आज देश ने अपनी आवाज संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर बुलंद की है. और यह आवाज सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि उन सभी पीड़ितों की है जिन्होंने आतंकवाद का दंश झेला है.

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