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उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास को नई गति, चारधाम महामार्ग सहित कई परियोजनाओं की समीक्षा

आज उत्तराखंड की सड़कें केवल तीर्थ और पर्यटन को ही नहीं, बल्कि उद्योग, सीमावर्ती सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं. य

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05 Jan 2026
( Updated: 05 Jan 2026
12:33 PM )
उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास को नई गति, चारधाम महामार्ग सहित कई परियोजनाओं की समीक्षा
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया.

बैठक के दौरान राज्य में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यों पर चर्चा की गई, जिसमें बताया गया कि हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड राज्य आस्था, पर्यटन, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, घने वन क्षेत्रों तथा दुर्गम पर्वतीय भूगोल के कारण विशेष महत्व रखता है. चारधाम यात्रा, अंतरराष्ट्रीय सीमाएं, वन क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच उत्तराखण्ड देश की जीवनरेखा के रूप में कार्य करता है.

प्रमुख परियोजनाओं और उपलब्धियां

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समीक्षा बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड जैसे दुर्गम पर्वतीय राज्यों में सड़क अवसंरचना को विकास की प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया गया. इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को सुगम, सुलभ एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपए की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है. इस परियोजना के अंतर्गत राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को दो-लेन मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिससे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और राज्य के समग्र विकास को गति मिल रही है.

पर्यावरण और सुरक्षा उपाय

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के दूरदर्शी नेतृत्व में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी जटिल परियोजनाओं को साकार किया गया है. वर्तमान में उत्तराखंड में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राज्य को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रहा है. इनमें से लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई द्वारा डिजाइन एवं क्रियान्वित किए गए हैं, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं. लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी अनुमानित लागत 15,890 करोड़ रुपए से अधिक है.

आने वाली परियोजनाएं

इन परियोजनाओं के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और काठगोदाम जैसे धार्मिक, शहरी और औद्योगिक केंद्रों को चौड़ी, सुरक्षित एवं सुगम सड़कों से जोड़ा गया है. काशीपुर-सितारगंज (77 किमी), रुद्रपुर-काठगोदाम (50 किमी) तथा हरिद्वार-नगीना (67 किमी) जैसे चार-लेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

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दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है. इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया गया है. इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपए) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपए) जैसी परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव में प्रभावी कमी आई है. भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किमी लंबाई और 366 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. वहीं रुद्रपुर-काशीपुर बाईपास तथा हरिद्वार से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ रहे हैं.

सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में ब्लैक स्पॉट सुधार, क्रिटिकल जंक्शनों पर एक्सेस कंट्रोल, प्रभावी साइनेज और आधुनिक रोड सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं. पर्वतीय क्षेत्रों में ऑपरेशन और मेंटेनेंस परियोजनाओं के माध्यम से सड़कों को वर्षभर सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है. भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी (40 किमी, 4,000 करोड़ रुपए), हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर (197 किमी, 10,000 करोड़ रुपए), ऋषिकेश बाईपास (13 किमी, 1,200 करोड़ रुपए), देहरादून रिंग रोड तथा लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं तैयारी एवं डीपीआर चरण में हैं. इनसे गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की आपसी कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी.

राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड

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पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड, वाइल्डलाइफ अंडरपास और न्यूनतम भूमि उपयोग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे. सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सिविल कार्य लगभग 93 प्रतिशत पूरा हो चुका है. इस वर्ष सुरंग के बीचों-बीच दीवार निर्माण का काम पांच-छह माह में पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कार्य शुरू किया जाएगा. मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है.

ऋषिकेश बाईपास परियोजना-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के अंतर्गत तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है. जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ रुपए है. इस परियोजना के अंतर्गत 4.876 किमी लंबाई में तीन हाथी कॉरिडोर हेतु एलिवेटेड मार्ग, चन्द्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा सेतु तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित है. इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपए की लागत से 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित किया गया है. जिससे नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक यातायात निर्बाध हो सकेगा.

अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309बी के 76 किमी लंबाई वाले हिस्से में 988 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से दो लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया गया है. ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-109 के अंतर्गत 235 किमी लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्ताव है. अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309ए के अंतर्गत पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किमी लंबाई में 1001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं. काण्डा से बागेश्वर खंड (पैकेज-02) के लिए वनभूमि हस्तांतरण प्रस्ताव पर भारत सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है.

उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का प्रगति अवलोकन

आज उत्तराखंड की सड़कें केवल तीर्थ और पर्यटन को ही नहीं, बल्कि उद्योग, सीमावर्ती सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं. यह परिवर्तन केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और स्पष्ट विजन का परिणाम है. प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सतत प्रयासों से उत्तराखंड एक सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य उन्मुख सड़क नेटवर्क के साथ विकास पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है.

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बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में गतिमान परियोजनाओं को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तेज गति से निर्धारित समय-सीमा में शीघ्र पूर्ण किया जाए. इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.

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