मायावती ने कांग्रेस को बताया दलित विरोधी, सैलजा के बहाने कांग्रेस के खिलाफ खेला बड़ा दांव
पार्टी की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा की नाराजगी की खबरों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस और अन्य दलों पर दलित नेताओं को दरकिनार करने का गंभीर आरोप लगाया।
23 Sep 2024
(
Updated:
09 Dec 2025
09:07 AM
)
Follow Us:
Advertisement
हरियाणा विधानसभा चुनावों में प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में खलबली मच गई। प्रदेश की जानी-मानी दलित नेता और कांग्रेस की कद्दावर चेहरा कुमारी सैलजा को कांग्रेस ने पूरी तरह से विधानसभा चुनाव में दरकिनार कर दिया है। जिससे नाराज होकर कुमारी शैलजी खुद चुनावी गतिविधियों से दूर हो गई है। हालांकि अब कुमारी शैलजा की नाराजगी की खबरों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस और अन्य दलों पर दलित नेताओं को दरकिनार करने का गंभीर आरोप लगाया। सोमवार को एक्स (ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट करके मायावती ने बिना किसी नेता का नाम लिए कांग्रेस और अन्य पार्टियों पर निशाना साधा। उनका कहना है कि दलित नेताओं को हमेशा सियासी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जाता है और जब इनकी जरूरत नहीं होती, तो इन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।
मायावती ने आरोप लगाते हुए कहा, "देश के राजनीतिक इतिहास को देखें तो खासकर कांग्रेस और अन्य जातिवादी पार्टियों को अपने बुरे समय में दलितों की याद आती है। इन्हें मुख्यमंत्री या संगठन के प्रमुख पद पर रखकर ये दलितों का समर्थन हासिल करते हैं। लेकिन जैसे ही इन पार्टियों के दिन बेहरत होते हैं, तो वे दलित नेताओं को दरकिनार कर जातिवादी नेताओं को इन पदों पर बिठा देते हैं। हाल ही में हरियाणा में भी यही देखने को मिल रहा है।”
इस दौरान मायावती ने दलित नेताओं से अपील भी की है कि वे ऐसी पार्टियों से खुद को अलग कर लें और डॉ. भीमराव अंबेडकर से प्रेरणा लें, जिन्होंने दलितों के आत्म-सम्मान के लिए अपने केंद्रीय कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा, “बाबा साहेब की तरह, मैं भी सहारनपुर के दलित उत्पीड़न मामले की उपेक्षा और राज्यसभा में ना बोलने देने के कारण अपने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे चुकी हूं। दलित नेताओं को चाहिए कि वे अपने समाज को ऐसी जातिवादी पार्टियों से दूर रखने के लिए खुद आगे आएं।”
मायावती का मौजूदा रुख कांग्रेस और अन्य जातिवादी पार्टियों के खिलाफ बेहद कड़ा है। उन्होंने कांग्रेस पर दलित आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया और राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने विदेश में जाकर आरक्षण खत्म करने का ऐलान कर दिया था। मायावती ने कहा, “कांग्रेस और अन्य जातिवादी पार्टियां आरक्षण, संविधान और SC, ST, OBC विरोधी हैं, इसलिए दलित नेताओं को इनसे सतर्क रहना चाहिए।”
वैसे आपको बता दें कि खुद को दलितों की मसीहा मानने वाली मायावती अक्सर कांग्रेस पर दलित हितों की अनदेखी का आरोप लगाती रही हैं। हालांकि, समय-समय पर दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनावी समझौते भी किए हैं, लेकिन ये साझेदारी कभी स्थायी नहीं रही। वैसे बात कुमारी सैलजा की अनुपस्थिति की करें तो यह कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। सैलजा का दलित समाज में बड़ा जनाधार है, और उनकी नाराजगी का सीधा असर पार्टी के वोट बैंक पर पड़ सकता है। यानी अगर सैलजा की नाराजगी बरकरार रहती है तो कांग्रेस को चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में मायावती की ये अपील भी कांग्रेस के लिए भारी नुकसान साबित हो सकती है।
यह भी पढ़ें
Advertisement
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें