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कई तीखे सवाल... 10 घंटे से ज्यादा पूछताछ, लोन फ्रॉड मामले में ईडी के सामने फंसे अनिल अंबानी, 7 दिन का समय मांगा

मंगलवार को ईडी द्वारा करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक चली पूछताछ में अनिल अंबानी ने लोन फ्रॉड मामले में अपना बयान दर्ज कराया है. वह दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय से निकलते हुए दिखाई दिए हैं.

कई तीखे सवाल... 10 घंटे से ज्यादा पूछताछ, लोन फ्रॉड मामले में ईडी के सामने फंसे अनिल अंबानी, 7 दिन का समय मांगा
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उद्योगपति और मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है. मंगलवार को जांच एजेंसी ईडी ने करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक उनसे पूछताछ की है. यह पूरा मामला एक लोन फ्रॉड से जुड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि अनिल अंबानी ने इस मामले को लेकर अपना बयान दर्ज कराया है. अनिल अंबानी से लोन ट्रांजैक्शन से संबंधित पूछताछ के दौरान ईडी द्वारा कई तीखे सवाल पूछे गए हैं. उन्होंने इसको लेकर कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट भी जमा करने को कहा है. इसके लिए उन्होंने 7 दिन का समय मांगा है. 

लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने अनिल अंबानी से की पूछताछ

मंगलवार को ईडी द्वारा करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक चली पूछताछ में अनिल अंबानी ने लोन फ्रॉड मामले में अपना बयान दर्ज कराया है. वह दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय से निकलते हुए दिखाई दिए.  

17,000 रुपए के फ्रॉड का है पूरा मामला

जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरा मामला 17,000 करोड़ रुपए की हेरा-फेरी का माना जा रहा है. इसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अनिल अंबानी की कई अन्य कंपनियां भी शामिल हैं. यह पूरी रकम लोन से संबंधित बताई जा रही है. इस मामले में ईडी ने अनिल अंबानी के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) भी जारी किया है. इसके अलावा रिलायंस ग्रुप के कई अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ चल रही है. इसमें रिलायंस ग्रुप पर 2 बड़े आरोप लगे हैं. 

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रिलायंस ग्रुप पर पहला आरोप

खबरों के मुताबिक, रिलायंस समूह पर कुल दो आरोप लगे हैं. इनमें पहला मामला यस बैंक से जुड़ा है. जांच एजेंसी को शक है कि साल 2017 से लेकर 2019 के बीच यस बैंक द्वारा अंबानी समूह की कंपनियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपए के लोन का गलत इस्तेमाल किया गया है. इसी के आधार पर ईडी यस बैंक द्वारा लोन स्वीकृतियों में घोर उल्लंघन के आरोपों की जांच कर रहा है. यह भी माना जा रहा है कि कथित तौर पर इन लोन को संबंधित संस्थाओं द्वारा कई समूह कंपनियों और शेल कंपनियों में भेजा गया.

दूसरा आरोप 

अनिल अंबानी की कंपनी पर लगे दूसरे आरोप की जांच सेबी के एक रिपोर्ट के आधार पर हो रही है. आरोप है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर CLI नामक एक कंपनी के माध्यम से रिलायंस समूह की कंपनियों में अंतर-कॉरपोरेट जमा (आईसीडी) के रूप में गुप्त रकम का हेरफेर किया है.

कर्ज के दलदल में फंसते चले गए अनिल अंबानी 

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एक ऐसा भी दौर था, जब अनिल अंबानी दुनिया के बड़े अरबपतियों की लिस्ट में शुमार थे, लेकिन वक्त ऐसा बदला कि वह अर्श से फर्श पर आ गए. उनकी कंपनियों पर कई हजार करोड़ रुपए का कर्ज है. शुरुआती दौर की बात की जाए, तो अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप ने टेलीकॉम, एनर्जी, फाइनेंस सर्विसेज और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया, लेकिन उसके बाद उनके कई कारोबारी फैसलों ने इस ग्रुप को कर्ज के दलदल में फंसा दिया. वर्तमान हालात ऐसे हैं कि कंपनियों को बेचकर वह कर्ज से छुटकारा पा रहे हैं.

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