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भारत से पंगा लेकर कंगाली में जी रहे कई पड़ोसी मुल्क... एक तो निकला सबसे बड़ा कट्टरपंथी, जानिए बर्बादी की पूरी कहानी

खबरों के मुताबिक, भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश की आर्थिक मुश्किलें दिन-दिन बढ़ती जा रही हैं. एशियाई विकास बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था हाल के इतिहास के सबसे गंभीर संकटों का सामना कर रही है.

भारत से पंगा लेकर कंगाली में जी रहे कई पड़ोसी मुल्क... एक तो निकला सबसे बड़ा कट्टरपंथी, जानिए बर्बादी की पूरी कहानी
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बीते 2 से 3 वर्ष भारत के कई पड़ोसी देशों के लिए बड़ा उथल-पुथल जैसा रहा, इस दौरान 4 देशों में सत्ता परिवर्तन हुआ. इनमें अफगानिस्तान में तालिबान सरकार आई. बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार की जगह मोहम्मद यूनुस की अंतिम सरकार चल रही है. श्रीलंका में भी युवाओं का बड़ा आंदोलन देखने को मिला और वहां पर भी सत्ता परिवर्तन हुआ. इसके अलावा हाल ही में नेपाल में भी जेन जी युवाओं ने जो कुछ भी किया, उसे पूरी दुनिया ने देखा. नेपाल में युवाओं के प्रदर्शन से केपी ओली सरकार हिल गई और अपनी गद्दी छोड़कर भागना पड़ा. इसके अलावा 2023 में मालदीव में भी सत्ता परिवर्तन हुआ. इनमें ज्यादातर करके भारत के विरोधी नेता ही इन देशों में सत्ता संभाल रहे थे. वर्तमान में यह सभी देश गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे और इन देशों में भारत विरोधी नेता सत्ता से हटाए जा चुके हैं. भारत के साथ जिस भी पड़ोसी मुल्क ने रिश्ते खराब किए, वह आज आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं. 

आर्थिक संकट से घिरा बांग्लादेश 

खबरों के मुताबिक, भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश की आर्थिक मुश्किलें दिन-दिन बढ़ती जा रही हैं. एशियाई विकास बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था हाल के इतिहास के सबसे गंभीर संकटों का सामना कर रही है. बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के तीनों स्तंभ बैंकिंग क्षेत्र, गैर बैंकिंग और वित्तीय संस्थान के साथ शेयर बाजार पूरी तरीके से अस्थिरता में फंसे हुए हैं. बांग्लादेश डिफॉल्ट किए गए ऋणों, कमजोर नियमन, राजनीतिक प्रभाव, भ्रष्टाचार और कबाड़ कंपनियों के कारण संकट से गुजर रहा है, जिसके चलते अगले साल होने वाले चुनाव के लिए बांग्लादेश में आर्थिक भविष्य को लेकर एक बड़ा संकट पैदा हो गया है.

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कर्ज ने बढ़ाई बांग्लादेश की टेंशन 

बता दें कि बांग्लादेश का आर्थिक संकट दशकों पुरानी ढीली नीतियों, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार की वजह से गहराता जा रहा है. यहां का बैंकिंग क्षेत्र डिफॉल्ट कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है. बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 के अंत तक देश के कुल डिफॉल्ट रेट 6 लाख करोड़ टका तक पहुंच गए हैं. वहीं आने वाले समय में भी 3.18 लाख करोड़ टका डिफॉल्ट होने की कगार पर है. इसका एक और कारण है कि बैंकों के अधिकारियों ने जमकर भ्रष्टाचार किए और कर्जों को बिना कागजात के ही बांट दिए. 

एशिया का सबसे डिफॉल्ट कर्ज वाला देश बना बांग्लादेश 

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एशियाई विकास बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश एशिया में सबसे ज्यादा डिफॉल्ट कर्ज वाला देश बन गया है. 2024 में बांग्लादेश की कुल वितरित कर्जों में 20.02 प्रतिशत डिफॉल्ट घोषित हुए थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 28 प्रतिशत अधिक था. बांग्लादेश 'सबसे कमजोर बैंकिंग प्रणाली' से गुजर रहा है. 

आर्थिक संकट में बैंकों का विलय करने पर मजबूर

बताया जा रहा है कि बांग्लादेश बैंक ने पांच इस्लामी बैंकों - फर्स्ट सिक्योरिटी, सोशल इस्लामी, ग्लोबल इस्लामी, यूनियन और एग्जिम बैंक का विलय एक नई सरकारी संस्था में करने का फैसला किया है, जिसका नाम अस्थाई रूप से यूनाइटेड इस्लामी बैंक में रखा गया है. इन सभी बैंकों की डिफॉल्ट दरें करीब 48 से 98% तक हैं. 

गैर बैंकिंग क्षेत्र पर भी बड़ा असर 

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बांग्लादेश की एक अखबार के अनुसार, बैंकिंग क्षेत्र में अस्थिरता का असर गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों पर भी देखने को मिल रहा है. चिंता की बात यह है कि इस क्षेत्र की स्थिति बैंकिंग सेक्टर से भी ज्यादा खराब नजर आ रही है. यहां 20 संकटग्रस्त NBFI के कुल डिफॉल्ट लोन 21,462 करोड़ टका के हैं, जो उनके सभी पोर्टफोलियो का करीब 83 प्रतिशत है. ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए देश की केंद्रीय बैंक ने 9 संस्थानों के लिक्विडेश की सिफारिश की है. इसके अलावा एक्सपर्ट्स का कहना है कि सभी क्षेत्र लगभग दिवालिया हो चुके हैं. इनमें कई ऐसे संस्थान भी है, जहां जमाकर्ता का पैसा वापस ही नहीं मिल रहा है, जिसके चलते जनता का विश्वास कम हो रहा है. 

बांग्लादेश के शेयर बाजार की भी हालत खराब 

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बांग्लादेश कई सेक्टर में आर्थिक दौर से गुजर रहा है. इनमें शेयर बाजार के भी हालत लंबे समय से खराब चल रहे, खबरों के मुताबिक, शेयर बाजार में लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह आंकड़ा पिछले 16 वर्षों का है. इस दौरान देश में निवेशकों ने 3 प्रतिशत वार्षिक दर से अपनी पूंजी गंवाई है.

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