×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

मेक इन इंडिया को समर्थन, रुपया-रूबल में ट्रेड, UNSC सीट...पुतिन के भारत दौरे पर हुए कई समझौते, किसे क्या मिला?

रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे में कई ऐतिहासिक समझौते हुए. इसमें भारत की इच्छा, द्विपक्षीय रिश्तों को बढ़ाने की इच्छाशक्ति और दशकों पुरानी दोस्ती के विश्वास की झलक मिलती है. इस दौरान मुख्य रूप से ऊर्जा, रक्षा, न्यूक्लियर, स्पेस, व्यापार, मुद्रा और आतंकवाद सहित मेक इन इंडिया अभियान को रूस के समर्थन और भारतीय-रूसी करेंसी में व्यापार पर सहमति बनी.

Author
06 Dec 2025
( Updated: 10 Dec 2025
08:16 PM )
मेक इन इंडिया को समर्थन, रुपया-रूबल में ट्रेड, UNSC सीट...पुतिन के भारत दौरे पर हुए कई समझौते, किसे क्या मिला?
Advertisement

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय भारत यात्रा समाप्त हो गई है, और वे बीती रात मॉस्को लौट गए. उनकी इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर थी, जिसमें कूटनीतिक मैसेजिंग के अलावा ठोस समझौते भी हुए. अगर MoUs की सूची देखें, तो पुतिन का दिल्ली दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा. इस दौरान दोनों देशों के बीच करीब 19–21 समझौते हुए. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन समझौतों से किसे क्या हासिल हुआ.

आपको बता दें कि पुतिन के इस दौरे के दौरान रूस की तरफ से यह ऐलान किया गया कि वह भारत को कच्चा तेल, नैचुरल गैस, रिफाइनिंग पेट्रोकेमिकल और न्यूक्लियर क्षेत्र में सप्लाई पहले की तरह जारी रखेगा. यानी पश्चिमी देशों का दबाव दोनों देशों के बीच दशकों पुराने रिश्ते को नहीं तोड़ सका. इसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि भारत ने दो-टूक अंदाज में कह दिया है कि वह अपनी रक्षा और उर्जा जरूरतों के अलावा राष्ट्रहित से कोई समझौता नहीं करेगा. अमेरिका की टेढ़ी नजर के बावजूद ऊर्जा क्षेत्र में भारत और रूस के बीच पहले से भी अधिक सहयोग बढ़ेगा. भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रख सकता है, वहीं रूस भी प्रतिबंधों को सिरे से दरकिनार कर रहा है.

सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में सहयोग

Advertisement

इतना ही नहीं, दोनों देशों के बीच एक और बड़ा ऐलान सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर हुआ है. रूस पहले से ही परमाणु बिजली और न्यूक्लियर रिएक्टरों के निर्माण में भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है. अब यह तय हुआ है कि भारत हरित ऊर्जा के लिए और आगे बढ़कर काम करेगा. चूंकि भारत में अब भी बड़े पैमाने पर कोयले से बिजली बनाई जाती है, ऐसे में रूस छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर प्लांट लगाने में भारत की मदद करेगा. रूस के सहयोग से भारत की कोयले पर निर्भरता कम करने के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है. भारत 2047 तक छोटे न्यूक्लियर रिएक्टरों की मदद से 100 गीगावाट बिजली बनाना चाहता है, जबकि अभी वह सिर्फ 8 गीगावाट बिजली ही बना पा रहा है.

स्पेस सेक्टर में सहयोग

अंतरिक्ष सहयोग के महत्व को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों, उपग्रह नेविगेशन और ग्रहों की खोज सहित शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष के उपयोग में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और रूसी राज्य अंतरिक्ष निगम ‘रोस्कोस्मोस’ के बीच बढ़ी हुई साझेदारी का स्वागत किया. उन्होंने रॉकेट इंजन के विकास, उत्पादन और उपयोग में पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग में हुई प्रगति का जिक्र किया.

Advertisement

सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग पारंपरिक रूप से भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का एक स्तंभ रहा है, जो IRIGC-M&MTC द्वारा संचालित कई दशकों के संयुक्त प्रयासों और लाभकारी सहयोग के माध्यम से लगातार मजबूत हुआ है.

मेक इन इंडिया अभियान को समर्थन देगा रूस

एक और ऐलान यह हुआ है कि अब भारत रूस से सिर्फ हथियार नहीं खरीदेगा, बल्कि दोनों देश मिलकर इन हथियारों का निर्माण भी करेंगे. भारत मेक इन इंडिया के तहत रिसर्च एंड डेवलपमेंट, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर जोर देगा. यानी अब हम ज्यादा से ज्यादा हथियार रूस से तकनीक लेकर अपने देश में ही बनाने की कोशिश करेंगे, जैसे हमने ब्रह्मोस मिसाइल बनाई है.

हथियारों का संयुक्त उत्पादन करेंगे भारत-रूस

Advertisement

भारत और रूस ने मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के तहत रूस में निर्मित हथियारों और रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए कल-पुर्जे, औजार, पूरक सामग्रियां और अन्य उत्पादों के भारत में संयुक्त निर्माण को प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की. इसके लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए संयुक्त उद्यमों की स्थापना के साथ-साथ मित्र देशों को निर्यात करना भी शामिल है.

आतंकवाद के खिलाफ साझी लड़ाई पर सहमति

इस दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और मुकाबले पर सहमति जताई. दोनों पक्षों ने आतंकवाद, उग्रवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, धन शोधन, आतंकवादी वित्तपोषण और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी जैसी आम चुनौतियों और खतरों से निपटने के क्षेत्र में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की.

Advertisement

प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन ने आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंकवादी वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद को रोकने और उसका मुकाबला करने के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई.

उन्होंने अल-कायदा, ISIS/दाएश और उनके सहयोगियों सहित संयुक्त राष्ट्र में सूचीबद्ध सभी आतंकवादी संगठनों और संस्थाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया, जिसका उद्देश्य आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करना, आतंकवादी विचारधारा के प्रसार का मुकाबला करना, आतंकवादी वित्तपोषण चैनलों और अंतरराष्ट्रीय अपराध के साथ उनके गठजोड़ को खत्म करना और विदेशी आतंकवादी लड़ाकों सहित आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही को रोकना है.

सुरक्षा परिषद में भारत को मिले स्थायी सीट

राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी वादा किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट देने का समर्थन करते हैं और रूस वर्ष 2026 में भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता देने का भी समर्थन कर रहा है.

द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर सहमति

दोनों नेताओं ने रूस को भारत के निर्यात में वृद्धि, औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने, विशेष रूप से उन्नत उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नई तकनीकी और निवेश साझेदारियां बनाने और सहयोग के नए रास्ते खोजने सहित संतुलित और टिकाऊ तरीके से द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने की अपनी साझा महत्वाकांक्षा की पुष्टि की.

दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रों को शामिल करते हुए भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच वस्तुओं पर एक मुक्त व्यापार समझौते पर संयुक्त कार्यक्रम की मौजूदा तीव्रता की सराहना की. उन्होंने दोनों पक्षों को निवेश के संवर्धन और संरक्षण पर पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर बातचीत के प्रयासों को तेज करने का भी निर्देश दिया.

Advertisement

100 बिलियन डॉलर का ट्रेड लक्ष्य

दोनों पक्षों ने WTO को केंद्र में रखते हुए एक खुली, समावेशी, पारदर्शी और भेदभाव-रहित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के महत्व को रेखांकित किया. दोनों पक्षों ने जोर दिया कि टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं का समाधान, लॉजिस्टिक में आने वाली रुकावटों को दूर करना, संपर्क बढ़ाना, सुचारू भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना, बीमा और पुनर्बीमा के मुद्दों के लिए स्वीकार्य समाधान खोजना और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच नियमित संपर्क—2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के संशोधित द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रमुख घटक हैं.

रुपया-रूबल में ट्रेड बढ़ाने पर जोर

Advertisement

रूस और भारत द्विपक्षीय व्यापार के निर्बाध रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग के माध्यम से द्विपक्षीय निपटान प्रणालियों को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमत हुए. इसके अलावा, दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों, वित्तीय संदेश प्रणालियों और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा प्लेटफॉर्म की इंटर-ऑपरेबिलिटी को सक्षम करने पर अपने परामर्श जारी रखने पर सहमति जताई. बातचीत के दौरान यह भी ऐलान हुआ कि भारत और रूस के बीच अधिक व्यापार भारतीय मुद्रा रुपये और रूस की मुद्रा रूबल में किया जाएगा. रिपोर्टों के मुताबिक, फिलहाल दोनों देशों के बीच 96 प्रतिशत व्यापार रुपये-रूबल में हो रहा है, लेकिन डिजिटल करेंसी प्लेटफॉर्म पर अभी बातचीत नहीं हुई.

स्किल्ड वर्कर्स पर भी हुई बातचीत

दोनों पक्षों ने भारत को उर्वरकों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत किया और इस क्षेत्र में संयुक्त उद्यमों की स्थापना की संभावना पर चर्चा की. दोनों ने कुशल श्रमिकों की गतिशीलता से संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर का स्वागत भी किया.

रूसी पक्ष ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (जून 2025) और ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (सितंबर 2025) में भारतीय प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी का स्वागत किया. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक और निवेश सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इन आर्थिक मंचों के दौरान आयोजित भारत-रूस व्यापार वार्ता के योगदान का भी जिक्र किया.

दोनों नेताओं ने ऊर्जा स्रोतों, कीमती पत्थरों और धातुओं सहित खनिज संसाधनों में उत्पादक और लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार के महत्व, साथ ही अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल के महत्व को भी नोट किया. इस क्षेत्र में रूस और भारत द्वारा संप्रभु राज्यों के रूप में किया गया कुशल सहयोग उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक कल्याण का एक महत्वपूर्ण घटक है.

Advertisement

भारत और रूस के बीच बनेगा नया इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर

यह भी पढ़ें

इसके अलावा, भारत और रूस के बीच इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाने पर भी सहमति बनी है. यह कॉरिडोर मुंबई को ईरान के चाबहार पोर्ट से जोड़ेगा. चाबहार को भारत के सहयोग से विकसित किया गया है. चाबहार पोर्ट से यह सड़कमार्ग द्वारा ईरान के उत्तरी छोर तक पहुंचेगा और फिर वहां से समुद्री मार्ग से रूस को इस कॉरिडोर से जोड़ेगा. अगर यह कॉरिडोर बन गया, तो भारत से रूस सामान पहुंचाने में जो 30–35 दिन लगते हैं, वह घटकर केवल 20–25 दिन रह जाएंगे.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें