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'मैच होने दीजिए...हम रोक नहीं लगाएंगे', भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान टी-20 मैच को रद्द करने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा, मैच होने दीजिए. हम रोक नहीं लगाएंगे.

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11 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:18 AM )
'मैच होने दीजिए...हम रोक नहीं लगाएंगे', भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
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गुरुवार (11 सितंबर, 2025) को सुप्रीम कोर्ट से भारत-पाक मैच पर रोक लगाने की याचिका पर अर्जेंट हियरिंग का अनुरोध किया गया था. 4 एलएलबी छात्राओं की याचिका में पहलगाम आतंकी हमले समेत दूसरी घटनाओं का हवाला देते हुए पाकिस्तान के साथ मैच को राष्ट्रीय भावनाओं का मजाक बताया गया था.

मैच होने दीजिए, हम रोक नहीं लगाएंगे - सुप्रीम कोर्ट 

भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को दुबई में एशिया कप का टी20 क्रिकेट मैच होना है. जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई के सामने यह मामला रखा गया. याचिककार्ताओं की ओर से वकील ने बेंच से कहा, 'रविवार को मैच होना है इसलिए याचिका को शुक्रवार को लिस्ट कर दिया जाए.' इस पर कोर्ट ने कहा कि वह रोक नहीं लगाएंगे मैच होने दीजिए. वकील ने फिर से कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले को सूचीबद्ध किया जाए, लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया.

उर्वशी जैन के नेतृत्व में चार लॉ स्टूडेंट्स ने याचिका दायर कर कहा कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलना राष्ट्रीय गरिमा और जनभावना के विपरीत संदेश देता है. भारत और पाकिस्तान 2025 एशिया कप के लिए 14 सितंबर को दुबई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगे.

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राष्ट्र की गरिमा और नागरिकों की सुरक्षा मनोरंजन से अहम - याचिकाकर्ता 

याचिका में कहा गया है, देशों के बीच क्रिकेट सद्भाव और मित्रता दिखाने के लिए होता है, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जब हमारे लोग मारे गए और हमारे सैनिकों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, तो पाकिस्तान के साथ खेलने से विपरीत संदेश जाएगा कि जहां हमारे सैनिक अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं, वहीं हम उसी देश के साथ खेल का जश्न मना रहे हैं जो आतंकवादियों को पनाह दे रहा है.

याचिकाकर्ताओं ने कहा, इससे उन पीड़ितों के परिवारों की भावनाओं को भी ठेस पहुंच सकती है जिन्होंने पाकिस्तानी आतंकवादियों के हाथों अपनी जान गंवाई. राष्ट्र की गरिमा और नागरिकों की सुरक्षा मनोरंजन से अहम है. याचिका में BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) को भी शामिल करने की बात कही गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अब समय आ गया है कि BCCI को खेल मंत्रालय के दायरे में लाया जाए

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BCCI को युवा मामले और खेल मंत्रालय के दायरे में लाया जाए

याचिका में भारत-पाकिस्तान मैच को रद्द करने के साथ-साथ युवा मामलों के मंत्रालय को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 को लागू करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है. इसके अलावा, सीजन बॉल क्रिकेट को राष्ट्रीय खेल महासंघ के तहत लाने की भी बात कही गई है. याचिका में BCCI को भी एक पार्टी के रूप में शामिल किया गया है.

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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह सही समय है कि BCCI को युवा मामले और खेल मंत्रालय के दायरे में लाया जाए. उनका कहना है कि अगर राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 लागू होता है, तो BCCI को अधिनियम के तहत स्थापित राष्ट्रीय खेल बोर्ड के अधीन लाया जाएगा. यह याचिका AoR (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) अंसार अहमद चौधरी के माध्यम से दायर की गई है. केस का शीर्षक उर्वशी जैन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य है.

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