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Kumar Vishwas ने बताया भारत जैसे देश के लिए PM Modi ही क्यों जरूरी हैं ?

हमारे देश में बोलने की आजादी है शायद यही वजह है कि देश के प्रधानमंत्री को भी गालियां दे दी जाती हैं लेकिन बात जब कुमार विश्वास जैसे दिग्गज कवि की आती है तो वो डंके की चोट पर बताते हैं कि देश के लिए मोदी ही क्यों जरूरी हैं !

Kumar Vishwas ने बताया भारत जैसे देश के लिए PM Modi ही क्यों जरूरी हैं ?
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दस साल से दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान की सत्ता संभाल रहे हैं। ये बात लगता हैP कांग्रेस बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। इसीलिये जबसे पीएम मोदी सत्ता में आए हैं। कांग्रेस उन पर गालियों की बौछार करती रही है। खुद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मोदी को मिली गालियां गिनाते हुए बताया।


"पीएम मोदी को कभी कहा गया 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी', कभी कहा गया गया नीच, कभी कमीना, कभी 'मौत का सौदागर', कभी 'जहरीला सांप, कभी 'बिच्छू' कभी 'चूहा', कभी 'रावण', कभी 'भस्मासुर', कभी 'नालायक', कभी 'कुत्ते की मौत मरेगा' कभी 'मोदी को जमीन में गाड़ देंगे', कभी 'राक्षस', कभी 'दुष्ट', कभी 'कातिल', कभी 'हिंदू जिन्ना', कभी 'जनरल डायर', कभी 'मोतियाबिंद का मरीज', कभी 'जेबकतरा' यहां तक कि उनके माता-पिता को भी नहीं छोड़ा गया, उनका भी अपमान किया गया"

हमारे देश में बोलने की आजादी है। शायद यही वजह है कि देश के प्रधानमंत्री को भी गालियां दे दी जाती हैं। लेकिन बात जब कुमार विश्वास जैसे दिग्गज कवि की आती है तो । वो डंके की चोट पर बताते हैं कि देश के लिए मोदी ही क्यों जरूरी हैं।

दरअसल पत्रकार शुभंकर मिश्रा के साथ बातचीत के दौरान जब कुमार विश्वास से पीएम मोदी के बारे में पूछा गया तो। उन्होंने बेबाक अंदाज में बताया कि।

"नरेंद्र मोदी ने 2014 में जो लोकप्रियता हासिल की वो अद्वितीय है और ये विपक्ष के नेताओं को उनसे सीखना पड़ेगा कि आयु के सातवें दशक में होने के बावजूद वो जितना श्रम करते हैं जितने सचेत रहते हैं, आयु के पचासवें और चालीसवें दशक में होने के बावजूद नेता अगर उतना श्रम नहीं करेगा और फिर सोचेगा मोदी को हरा लें, फिर तो मुश्किल होगा, भाई मेहनत तो करनी पड़ेगी"

नरेंद्र मोदी के साथ साल 2002 में अपनी मुलाकात को याद करते हुए कुमार विश्वास ने बताया। "प्रधानमंत्री को मैं 2002 से निजी रूप से जानता हू्ं वो भी मुझे 2002 से जानते हैं तो मैंने उनका संघर्ष देखा है, मैंने उनकी एक दृष्टि देखी है कि यहां पहुंचना है, वो बड़े श्रमशील, प्रोएक्टिव हैं, उनकी बड़ी नजर है चीजों पर और बड़े क्विक लर्नर हैं, बहुत से लोग कहते हैं कि उनमें अहंकार है लेकिन वो ये जानते थे कि दस साल देश में जो सत्ता रही है उसमें प्रोएक्टिवनेस की कमी रही है"

कुमार विश्वास यहीं नहीं रुके। जो लोग पूछते हैं मोदी ने इन दस सालों के कार्यकाल में क्या किया है। उन्हें भी मुंहतोड़ जवाब देते हुए कुमार विश्वास ने कहा।

"आपने आखिरी बार कब देखा था कि किसी प्राइवेट कंपनी के 17 मजदूर एक टनल में फंस जाएं और केंद्रीय मंत्री भेज दिया जाए यहीं लोहे की केबिन में रहने के लिए, एक मुख्यमंत्री की ड्यूटी लगा दी जाए सुबह-शाम ये देखने के लिए कि निकले या नहीं, उसी शाम सात घंटे बाद ही पानी पहुंचा दिया जाए लाइट पहुंचा दिया जाए और खाना पहुंचा दिया जाए, आपने आखिरी बार कब देखा था कि दो देशों के बीच युद्ध चल रहा हो और बिना यूनाइटेड नेशन के सामने गिड़गिड़ाए, बिना उस देश से बात किये बिना युद्ध विमान उतारा जाए, अपनों को बचाया जाए और पड़ोसी देशों के नागरिकों को भी बचाया गया हो "
बात यहीं खत्म नहीं होती। कुमार विश्वास ने जब पीएम मोदी के काम गिनाने शुरू किये तो। हाल ही में हुए ओलंपिक का जिक्र करते हुए ये भी बताया कि।

"ये आपने आखिरी बार कब देखा था कि एशियाड, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक में जा रहे खिलाड़ियों के कंधे पर एक आदमी हाथ रख कर कहता है कि बेटा चिंता मत करना अच्छे से खेलना, जब हार जाएं तो उनके कंधे पर हाथ रख कर कहना कि कोई दिक्कत नहीं और जो जीत जाएं तो उन्हें खाना खिलाओ, ये आपने आखिरी बार कब देखा था कि मिशन पर लगे वैज्ञानिक अगर मिशन में फेल हो जाएं तो रोते हुए वैज्ञानिक को गले लगाकर कहते हों कोई बात नहीं मैं खड़ा हूं अगली बार करते हैं, We will do it"

ये वही कुमार विश्वास हैं। जो एक वक्त आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता हुआ करते थे। और अमेठी में राहुल गांधी ही नहीं बीजेपी नेता स्मृति ईरानी के खिलाफ भी चुनाव भी लड़े। लेकिन इसके बावजूद बात जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम की आती है तो। कुमार विश्वास डंके की चोट पर पीएम मोदी की तारीफ करते हैं। और विपक्षी नेताओं को भी नसीहत देने में पीछे नहीं रहते कि कम से कम मोदी से सीखिये कि उम्र के सातवें दशक में होने के बावजूद वो कितने परिश्रमी हैं। पीएम मोदी के बारे में कुमार विश्वास ने जो कुछ कहा है।

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