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'स्वतंत्रता दिवस पर सूर्यास्त के बाद राष्ट्रीय ध्वज उतारना सही या गलत? केरल हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, कहा - इसमें अनादर या अपमान की मंशा न हो...

केरल हाई कोर्ट ने साल 2015 के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. 15 अगस्त 2015 को अंगमाली नगर पालिका के सचिव द्वारा सूर्यास्त के बाद भी राष्ट्रीय ध्वज को न उतारने को लेकर दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है. बता दें राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 की धारा 2(a) के तहत भारतीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में पूर्व सचिव पर यह आरोप लगा था.

'स्वतंत्रता दिवस पर सूर्यास्त के बाद राष्ट्रीय ध्वज उतारना सही या गलत? केरल हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, कहा - इसमें अनादर या अपमान की मंशा न हो...
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स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद राष्ट्रीय ध्वज को सूर्यास्त के बाद न उतारने के आरोप में दर्ज आपराधिक कार्रवाई की सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर यह जानबूझकर या अपमान की मंशा के साथ न किया गया हो, तो यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. बता दें कि यह पूरा मामला साल 2015 का है, जब 15 अगस्त को केरल के अंगमाली नगर पालिका में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था. आरोप है कि पालिका के सचिव द्वारा सूर्यास्त के बाद भी उस ध्वज को उतारा नहीं गया. 

सूर्यास्त के बाद राष्ट्रीय ध्वज न उतारने पर केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला 

केरल हाई कोर्ट ने साल 2015 के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. 15 अगस्त 2015 को अंगमाली नगर पालिका के सचिव द्वारा सूर्यास्त के बाद भी राष्ट्रीय ध्वज को न उतारने को लेकर दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है. बता दें राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 की धारा 2(a) के तहत भारतीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में पूर्व सचिव पर यह आरोप लगा था. 

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

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राष्ट्रीय ध्वज के अपमान मामले पर न्यायमूर्ति काउसार एदप्पागथ की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि 'राष्ट्रीय ध्वज को उतारने में जब तक किसी के द्वारा जानबूझकर या अपमान की मंशा से यह कार्य न किया गया हो, तो यह मामला अपराधिक श्रेणी में नहीं आता है.' कोर्ट ने आगे कहा कि 'इस मामले में 1971 के अधिनियम की धाराएं भी नहीं लागू की जा सकती. याचिकाकर्ता द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने जानबूझकर इस ध्वज को नहीं उतारा है.' ऐसे में इसी आधार पर हाई कोर्ट ने पूर्व सचिव के खिलाफ न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट कोर्ट अंगमाली में चल रही आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरीके से रद्द कर दिया.

क्या है पूरा मामला?

खबरों के मुताबिक, 15 अगस्त 2015 को स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर अंगमाली नगरपालिका परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था, लेकिन सूर्यास्त होने के बाद भी इस ध्वज को उतारा नहीं गया. इसके बाद अंगमाली पुलिस द्वारा खुद से इस मामले को संज्ञान में लेते हुए नगर पालिका के सचिव कुंजप्पन के खिलाफ ध्वज संहिता, 2002 के नियम 3.6 के साथ राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 की धारा 2(a) के तहत FIR दर्ज की गई थी. जानकारी के लिए बता दें कि आरोपी सचिव के ही निगरानी में इस झंडे को फहराया गया था, जो 17 अगस्त की दोपहर तक लहराता रहा. 

कोर्ट ने 1971 के अधिनियम की धारा को भी समझाया 

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केरल हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि '1971 के अधिनियम की धारा 2 में जिन कृत्यों को "अपमानजनक" माना गया है. उसमें सूर्यास्त के बाद ध्वज को न उतारना शामिल नहीं है. यह धारा ध्वज को जलाना, फाड़ना, जमीन पर गिराना या उसका अनुचित उपयोग करने जैसे कृत्यों में लागू होती है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फ्लैग कोड इंडिया, 2002 कोई वैधानिक कानून नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार की ओर से जारी कार्यकारी निर्देश हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक कोई अलग वैधानिक प्रावधान न हो, तब तक "फ्लैग कोड, 2002 एक आचार संहिता है, न कि संविधान के अनुच्छेद 13 (3) (a) के तहत परिभाषित कोई कानून. इस वजह से इसका उल्लंघन दंडनीय नहीं है, जब तक कि इसमें अपमान की स्पष्ट मंशा न हो.' 

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