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क्या Maharashtra में Modi को हराने के लिए Kashi में रची जा रही साजिश ?

महाराष्ट्र की सत्ता हासिल करने के लिए एक बार फिर सियासी जंग की शुरुआत होने वाली है लेकिन चुनावी तारीख के ऐलान से पहले ही महादेव की काशी से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसे देख कर काशी के साधु संत भी दंग रह गये और यहां तक कहां जा रहा है कि कहीं ये महाराष्ट्र में बीजेपी को हराने की साजिश तो नहीं है !

क्या Maharashtra में Modi को हराने के लिए Kashi में रची जा रही साजिश ?
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Maharashtra की सत्ता हासिल करने के लिए एक बार फिर सियासी जंग की शुरुआत होने वाली है। लेकिन चुनावी तारीख के ऐलान से पहले ही महादेव की काशी से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है। जिसे देख कर काशी के साधु संत भी दंग रह गये।और यहां तक कहां जा रहा है कि कहीं ये महाराष्ट्र में बीजेपी को हराने की साजिश तो नहीं है।


दरअसल देश में साईं का विरोध कोई नई बात नहीं है। धर्म नगरी काशी में साईं का विरोध समय समय पर होता रहा है। और एक बार फिर ये विरोध की आग भड़क गई।जब कुछ ही दिनों पहले काशी के कई प्राचीन मंदिरों से साईं की मूर्तियां हटाई जाने लगीं। और ये तर्क दिया जने लगा कि सनातन धर्म में प्रेत पूजा मान्य नहीं है।

काशी में साईं मूर्तियों का विरोध ऐसे समय शुरू हुआ है। जब महाराष्ट्र में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। और जिस काशी से ये विरोध शुरू हुआ है। उस काशी से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाता रहा है। वो साल 2014 से लगातार तीसरी बार इसी काशी से सांसद चुने गये हैं। और अब इसी काशी से साईं का विरोध शुरू हो गया।  जिस पर सवाल उठाते हुए अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बयान दिया कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि महाराष्ट्र चुनाव में हिंदू समाज को बांटने के लिए ये साजिश की गई हो। और इस टूलकिट के तार पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से जुड़े हों।

महाराष्ट्र में हिंदुओं की एक बड़ी आबादी जहां गणपत्य संप्रदाय को मानती है। तो वहीं शिर्डी साईं मंदिर की वजह से साईं बाबा को मानने वालों की भी कमी नहीं है। यही वजह है कि काशी में साईं मूर्तियों का विरोध किये जाने पर स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इसे महाराष्ट्र चुनाव से जोड़ दिया। और ये आरोप लगा दिया कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि महाराष्ट्र चुनाव से पहले पीएम मोदी को साईं विरोधी बताने की कोशिश की जा रही हो। क्योंकि जिस काशी में साईं का विरोध हो रहा है वो पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है। हालांकि मंदिरों से मूर्तियां हटवाने वाले सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिस पर बुरी तरह से भड़के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यहां तक कह दिया कि।

"हम नही समझ पाते हैं कि अगर हम अपने मन्दिरों में कोई शुद्धि कर रहे हैं, परिष्कार कर रहे हैं तो उसमें लोगों को क्या आपत्ति हो सकती है? जो लोग ये कार्य कर रहे थे उन्होंने स्पष्टता के साथ कहा है कि अगर कोई किसी का भक्त है तो वो उनका अलग मन्दिर बनाए उसमें उसकी पूजा करे, हालांकि मन्दिर तो सनातनी देवताओं का होता है लेकिन फिर भी इतने तक तैयार हैं और कह रहे हैं कि अलग मन्दिर बना लें और खुद पूजा करें, तो जब इतनी बात कही जा रही है अपमान किसी का किया नही जा रहा है मूर्ति तोड़कर फेंकी नहीं जा रही है, जब वहां से हटाया जा रहा तब उसे ढंक कर आदरपूर्वक हटाया जा रहा है ताकि किसी की भावना को ठेस न लगे, तो उसमें लोगों को क्या आपत्ति हो सकती है?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मोदी विरोधी बताया जाता रहा है। क्योंकि कई बार वो मोदी पर सवाल उठा चुके हैं। और अब काशी से हटाई जा रही सांई मूर्तियों का समर्थन करके एक बार फिर साईं विरोध को हवा देने का काम किया। ऐसे में आपको क्या लगता है। क्या वाकई काशी में उठा साईं विरोध का मुद्दा महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के लिए उठाया गया है। 

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