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'मुगलों के राज में सोने की चिड़िया था भारत...', दिग्गज कांग्रेसी मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान से भी की बात की वकालत, मचा बवाल

दिग्गज कांग्रेसी मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान से बातचीत की वकालत की है. उन्होंने एक तरह से मुगल आक्रांताओं को भी क्लीन चिट देने की कोशिश की और कहा कि भारत उन्हीं के दौर में, संभवतः उन्हीं की वजह से सोने की चिड़िया था.

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15 Mar 2026
( Updated: 15 Mar 2026
10:56 AM )
'मुगलों के राज में सोने की चिड़िया था भारत...', दिग्गज कांग्रेसी मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान से भी की बात की वकालत, मचा बवाल
Manishankar Ayyar (Screengrab)
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गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने फिर से विवादित बयान दिया है. उन्होंने जयपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि "भारत मुगलों के समय में सोने की चिड़िया था". अब इसके बाद काफी बवाल मच गया है. उन पर आरोप लग रहे हैं कि वे मुगलों का महिमामंडन (Glorify) कर रहे हैं और प्राचीन भारतीय आर्थिक व गवर्नेंस मॉडल को दरकिनार कर रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में यह भी कहने की कोशिश की कि भारत सोने की चिड़िया और मजबूत आर्थिक ताकत मुगलों के वक्त ही कहलाता था. अब सवाल यह उठता है कि क्या उससे पहले के हिंदू राजा-महाराजाओं के वक्त भारत वह नहीं था, जिसे लूटने के लिए बाबर जैसे लुटेरे और आक्रांता आए थे?

पाकिस्तान से बात हो क्योंकि भाषा एक है: मणिशंकर अय्यर

वहीं पाकिस्तान से बातचीत की वकालत करते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उनसे बात करनी चाहिए क्योंकि उनकी भाषा और तहजीब हमारे जैसी ही है. दोनों एक-दूसरे की बात को आसानी से समझ सकते हैं. अय्यर ने कहा कि हकीकत यह है कि दुनिया भर में हिंदुओं के इतने करीब सिर्फ मुसलमान ही हैं, किसी दूसरे धर्म के लोग नहीं. मेरा तजुर्बा यह रहा है कि पाकिस्तानियों से बात करना सबसे आसान चीज है. यह आसानी एक हिंदू के लिए भी है और एक हिंदुस्तानी के लिए भी. हिंदू और मुसलमान की जुबान एक है, सोच एक है, तहजीब एक है. हम एक-दूसरे को एकदम समझ लेते हैं. यह जरूर है कि उनका कबाब हमारे कबाब से बेहतर है.

कबाब पाकिस्तान की बेहतर, प्रतियोगिता करो: अय्यर

उन्होंने कहा कि फिर भी हम कबाब को लेकर उनसे प्रतियोगिता तो कर ही सकते हैं. हम अमेरिका को क्यों पकड़ रहे हैं? हम इजरायल के दोस्त क्यों बन रहे हैं? हम चीन से क्यों चिढ़े हुए हैं और हम क्यों रूस पर इतना निर्भर हैं? जबकि हमारे बगल में वे लोग यानी पाकिस्तान है. यदि विभाजन (Partition) का हादसा नहीं हुआ होता तो वे आज इस देश के नागरिक होते. हम दोनों एक ही देश के नागरिक होते और आप कहते हैं कि हम उन पर सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे हैं.

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PM मोदी किसके वंशज: मणिशंकर अय्यर

उन्होंने BJP द्वारा उन्हें अंग्रेजी बोलने के कारण कथित तौर पर "मैकाले की संतान" कहने को लेकर पलटवार किया है. जयपुर के कानोड़िया कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने कहा, "बीजेपी वाले दावा करते हैं कि मैं मैकाले का वंशज हूँ क्योंकि मैं अंग्रेजी बोलता हूँ... लेकिन क्या पीएम मोदी को तमिल आती है? क्यों नहीं आती? तो, उस नाते वह किसके वंशज हुए?"

पीएम मोदी को 'नीच' कहने पर आई अय्यर की सफाई!

मणिशंकर अय्यर ने एक पुराने विवाद का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री के बारे में अपनी टिप्पणी पर सफाई दी और आरोप लगाया कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने मुझ पर शाब्दिक हमला किया, इतनी घटिया भाषा का इस्तेमाल किया और दावा किया कि मैंने उन्हें (PM मोदी को) 'नीच' (नीची जाति का) कहा... मैंने कहा था कि वह 'नीच किस्म के आदमी' (ओछी मानसिकता वाले व्यक्ति) हैं... वे ऐसा विशेष रूप से इसलिए करते हैं क्योंकि मैं एक ब्राह्मण हूँ."

अय्यर ने चाय वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता वाले बयान से मारी पलटी!

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इसके अलावा अय्यर ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि उन्होंने पीएम मोदी के चाय बेचने वाले बैकग्राउंड पर सवाल उठाए थे. उन्होंने बीजेपी के बारे में कहा, "वे आरोप लगाते हैं कि मैंने पीएम के बारे में कहा था कि एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता... मैंने यह नहीं कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते क्योंकि वह एक चाय बेचने वाले थे." उन्होंने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनकी आलोचना का संदर्भ पीएम मोदी के इतिहास के ज्ञान को लेकर था. उन्होंने कहा, "मैंने जो कहा था वह यह था कि, जो व्यक्ति यह नहीं जानता कि सिकंदर महान कभी पाटलिपुत्र नहीं पहुँचा था, या कि नालंदा भारत में है जबकि तक्षशिला पाकिस्तान में है, वह जवाहरलाल नेहरू के उत्तराधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री की भूमिका में कैसे कदम रख सकता है?"

पीएम मोदी पर "झूठ फैलाने और अफवाहें फैलाने" के जरिए राजनीतिक रूप से ऊपर उठने का आरोप लगाते हुए अय्यर ने कहा, "पीएम मोदी ने खुद दावा किया कि वह एक चाय बेचने वाले हैं; फिर भी, बाद में हमें पता चला कि उनके गृहनगर वडनगर में 1973 तक कोई रेलवे प्लेटफॉर्म भी नहीं बना था... इस प्रकार, इस तरह का झूठ बेचकर और निराधार अफवाहें फैलाकर, वह खुद को प्रधानमंत्री के पद तक पहुँचाने में सफल रहे."

राम मंदिर के उद्घाटन पर भी सवाल

कांग्रेस नेता ने राम मंदिर के उद्घाटन में शामिल होने के लिए भी प्रधानमंत्री की आलोचना की और तर्क दिया कि सरकार के प्रमुख को धार्मिक रूप से तटस्थ रहना चाहिए. अय्यर ने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री सभी शंकराचार्यों को किनारे रखकर व्यक्तिगत रूप से राम मंदिर का उद्घाटन कर रहे हैं. क्या यह धर्मनिरपेक्ष है? भारत के प्रधानमंत्री का कोई धर्म नहीं होना चाहिए."

लव जिहाद कैंपेन को लेकर भी बीजेपी पर बोला हमला

इसी कार्यक्रम के दौरान, अय्यर ने तीन तलाक और कथित "लव जिहाद" जैसे मुद्दों पर भाजपा के रुख का भी विरोध किया और उन्हें राजनीतिक रूप से गढ़ी गई चीजें बताया. उन्होंने कहा, "क्या प्यार में कोई जिहाद हो सकता है? जिहाद प्रतिशोध का कार्य है. प्यार का उद्देश्य कभी प्रतिशोध नहीं हो सकता. भाजपा के लोगों के अलावा प्यार और जिहाद को कौन जोड़ रहा है?" उन्होंने आगे तर्क दिया कि देश में राजनीतिक विमर्श ने अल्पसंख्यकों को तेजी से निशाना बनाया है. उन्होंने कहा, "उन्होंने मुसलमानों के बारे में ऐसी अपमानजनक बातें कही हैं, या ऐसे कटाक्ष किए हैं कि हमारा देश आज सांप्रदायिक हो गया है."

भारत की प्राचीन सभ्यतागत निरंतरता पर जोर देते हुए अय्यर ने कहा कि देश की पहचान उसकी विविधता में निहित है. उन्होंने कहा, "भारत वास्तव में बहुत प्राचीन है, और हमारी सभ्यता 5,000 से 8,000 वर्षों से टिकी हुई है. यह एक ऐसा राष्ट्र है जिसे अंग्रेज कभी पूरी तरह से नहीं समझ पाए." देश की जनसांख्यिकीय विविधता पर प्रकाश डालते हुए अय्यर ने उल्लेख किया कि हिंदू बहुसंख्यक हैं जबकि अल्पसंख्यक जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. उन्होंने कहा, "लगभग 20 करोड़ मुसलमान हैं और लगभग पाँच करोड़ लोग अन्य धर्मों के हैं. यह भारतवर्ष है."

उन्होंने आगे कहा कि यदि हम इसे केवल 'हिंदू राष्ट्र' के रूप में परिभाषित करने और मुसलमानों को दुश्मन के रूप में चित्रित करने की कोशिश करते हैं, तो भारत उस आधार पर जीवित नहीं रह सकता. अय्यर ने आगे कहा कि राष्ट्रीयता को धर्म के साथ जोड़ने के प्रयास भारत के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत हैं. उन्होंने कहा कि चाहे धर्म के माध्यम से देखा जाए या संस्कृति के माध्यम से, यह देश अपार विविधता से परिभाषित होता है, और वही विविधता हमारी पहचान है.

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