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INDIA-UK FTA: अब नहीं कटेगा भारतीय वर्कर्स का फालतू पैसा, डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन पर भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत

India-UK FTA के तहत भारत को डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन में बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है. अब यूके में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय वर्कर्स और उनके नियोक्ताओं को हर साल नेशनल इंश्योरेंस टैक्स में करीब ₹52,000 की गैर-जरूरी कटौती से राहत मिलेगी. यह समझौता सिर्फ एक आर्थिक पहल नहीं, बल्कि विदेश में काम करने वाले लाखों भारतीयों की मेहनत का सम्मान है.

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07 May 2025
( Updated: 10 Dec 2025
07:50 PM )
INDIA-UK FTA: अब नहीं कटेगा भारतीय वर्कर्स का फालतू पैसा, डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन पर भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत
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भारत-ब्रिटेन के संबंधों में एक नई शुरुआत के रूप में आज की यह तारीख याद रखी जाएगी. इसी दिन दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बनी, जो न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देगा, बल्कि भारतीय कामगारों के लिए भी एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया. इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा है – डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन का अंत.

इस फैसले के बाद अब वो तमाम भारतीय पेशेवर, जो कुछ महीनों के लिए यूनाइटेड किंगडम में काम करने जाते हैं, उन्हें हर साल गैर-ज़रूरी तरीके से करीब 500 पाउंड (यानी लगभग 52,000 रुपये) की कटौती नहीं झेलनी पड़ेगी. ये सिर्फ एक कर छूट नहीं, बल्कि एक बड़ी कूटनीतिक जीत है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हो सकी.

क्या होता है डबल कंट्रीब्यूशन, क्यों था यह विवादित?

ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों से हर साल नेशनल इंश्योरेंस (NI) के नाम पर एक तय राशि काटी जाती थी. इसका मकसद था वहां की सोशल सिक्योरिटी स्कीम में योगदान. लेकिन दिक्कत ये थी कि ये लाभ केवल स्थायी निवासियों को मिलता था. जबकि जो भारतीय कुछ महीनों के लिए काम कर लौट आते हैं, उन्हें इस कटौती का कोई लाभ नहीं मिलता.

सीधी बात ये कि भारत से गए अस्थायी वर्कर्स का पैसा वहां की सरकार बिना वापसी या लाभ के रख लेती थी. ये व्यवस्था न केवल अन्यायपूर्ण थी, बल्कि आर्थिक रूप से भी नुकसानदायक थी. ना कोई पेंशन, ना कोई बीमा, ना कोई हेल्थ बेनिफिट – बस कटौती!

भारत ने कैसे जीता ये कूटनीतिक युद्ध?

ये कोई रातोंरात मिली जीत नहीं थी. भारत लंबे समय से ब्रिटेन से इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग कर रहा था. भारत ने पहले ही फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, डेनमार्क, स्विट्ज़रलैंड, साउथ कोरिया जैसे देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर कर रखे थे, जिसमें ये तय है कि ऐसे अस्थायी कामगारों से डबल टैक्स नहीं लिया जाएगा.

लेकिन ब्रिटेन इस फैसले से बचता रहा. 2024 के अंत में भारत ने FTA बातचीत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. भारत ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन नहीं हटेगा, तब तक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे. मोदी सरकार की कूटनीतिक सूझबूझ और दबाव की रणनीति आखिरकार रंग लाई और ब्रिटेन ने भी इसे स्वीकार कर लिया.

किन भारतीयों को मिलेगा सीधा फायदा?

इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा उन्हें होगा, जो कुछ महीनों के लिए यूके जाते हैं. जैसे:

आईटी सेक्टर के इंजीनियर्स और डेवलपर्स

हेल्थकेयर सेक्टर के डॉक्टर, नर्स और फिजियोथेरेपिस्ट

इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले टेक्निकल प्रोफेशनल्स

शेफ्स, म्यूजिशियन, योगा ट्रेनर, जो सीमित समय के लिए प्रोजेक्ट्स पर जाते हैं

इन सभी का हर साल कम से कम ₹50,000 तक का आर्थिक बोझ कम होगा. और इससे सिर्फ कर्मचारियों को नहीं, बल्कि उनकी कंपनियों को भी राहत मिलेगी, जो यह राशि हर वर्कर के लिए अतिरिक्त तौर पर खर्च करती थीं.

क्या कहती है सरकार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को एक ‘ऐतिहासिक मील का पत्थर’ कहा है. उनके अनुसार, "यह न केवल भारत-ब्रिटेन के कारोबारी रिश्तों को नई दिशा देगा, बल्कि हमारे प्रोफेशनल्स को वैश्विक मंच पर उचित सम्मान भी दिलाएगा." विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इसे एक ‘डिप्लोमैटिक मास्टरस्ट्रोक’ बताया है.

यह समझौता सिर्फ डबल कंट्रीब्यूशन खत्म करने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए भारत को और भी कई बड़े फायदे मिले हैं जैसो भारत के 99% निर्यात पर UK में ज़ीरो ड्यूटी लगेगी. भारत को लगभग 100% ट्रेड वैल्यू पर टैरिफ छूट मिलेगी. टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स, स्पोर्ट्स गुड्स के एक्सपोर्ट को बूस्ट मिलेगा. योगा टीचर्स, म्यूजिशियन, शेफ्स को वर्क राइट्स और वीजा में छूट मिलेगी. UK से भारत में आने वाले ब्रिटिश कार, व्हिस्की, चॉकलेट, मेडिकल डिवाइसेज़ सस्ते होंगे. दोनों देशों के बीच 25.5 बिलियन पाउंड का व्यापार बढ़ने की संभावना है

ये फैसला सिर्फ एक कर छूट नहीं है. ये उन लाखों भारतीयों की मेहनत का सम्मान है जो सीमित समय के लिए विदेशों में जाकर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं. जो अपने परिवार से दूर रहकर काम करते हैं, लेकिन कई बार न तो वहां के लाभ पाते हैं, न भारत में उन्हें कोई राहत मिलती है. अब ये स्थिति बदलेगी. भारत ने ये साबित कर दिया है कि वो अपने नागरिकों के हितों को वैश्विक मंच पर मजबूती से रख सकता है और उस पर फैसले भी करवा सकता है.

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