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भारत बना समानता का वैश्विक मॉडल, गिनी इंडेक्स में ऐतिहासिक सुधार, विश्व बैंक ने जारी की रिपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिनी इंडेक्स अब 25.5 पर पहुंच गया है, गिनी इंडेक्स किसी देश में आय, संपत्ति या उपभोग के वितरण की समानता को मापने का एक प्रभावशाली सूचकांक है. इसका स्कोर 0 से 100 के बीच होता है, जिसमें 0 का अर्थ है पूर्ण समानता और 100 का अर्थ है पूर्ण असमानता. इस लिहाज़ से भारत का 25.5 का स्कोर बताता है कि देश में संसाधनों का वितरण काफी हद तक संतुलित है.

भारत बना समानता का वैश्विक मॉडल, गिनी इंडेक्स में ऐतिहासिक सुधार, विश्व बैंक ने जारी की रिपोर्ट
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिनी इंडेक्स अब 25.5 पर पहुंच गया है, जिससे भारत दुनिया का चौथा सबसे समान देश बन गया है. इस मामले में भारत अब स्लोवाक गणराज्य, स्लोवेनिया और बेलारूस के बाद है. 

गिनी इंडेक्स किसी देश में आय, संपत्ति या उपभोग के वितरण की समानता को मापने का एक प्रभावशाली सूचकांक है. इसका स्कोर 0 से 100 के बीच होता है, जिसमें 0 का अर्थ है पूर्ण समानता और 100 का अर्थ है पूर्ण असमानता. इस लिहाज़ से भारत का 25.5 का स्कोर बताता है कि देश में संसाधनों का वितरण काफी हद तक संतुलित है. यह आंकड़ा चीन (35.7) और संयुक्त राज्य अमेरिका (41.8) जैसे बड़े देशों से कहीं अधिक समानता को दर्शाता है. इतना ही नहीं, भारत ने इस मामले में जी7 और जी20 जैसे प्रमुख वैश्विक समूहों के देशों को भी पीछे छोड़ दिया है, जिनमें से अधिकतर विकसित अर्थव्यवस्थाएं मानी जाती हैं. भारत, जो कि अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, के लिए यह उपलब्धि न सिर्फ आर्थिक मजबूती का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश की आर्थिक प्रगति समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही है. देश के आकार, विविधता और जनसंख्या को देखते हुए यह प्रदर्शन और भी उल्लेखनीय हो जाता है.

गिनी इंडेक्स में ऐतिहासिक सुधार 
भारत के गिनी इंडेक्स में ऐतिहासिक गिरावट और इसे दुनिया के चौथे सबसे समान देश के रूप में स्थापित करने के पीछे कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुविचारित और निरंतर नीति प्रयास है. विश्व बैंक की "स्प्रिंग 2025 गरीबी और समानता ब्रीफ" के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन, वित्तीय समावेशन और सीधे लाभ हस्तांतरण जैसे उपायों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह सफलता ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी को घटाने के लिए किए गए सुनियोजित प्रयासों का परिणाम है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “भारत की गिनी इंडेक्स में यह प्रगति देश की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और वित्तीय पहुंच के निरंतर विस्तार से जुड़ी हुई है. यह कोई आकस्मिक उपलब्धि नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से प्राप्त की गई उपलब्धि है.” विश्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक दशक में 17.1 करोड़ भारतीयों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला गया है. जहां 2011-12 में अत्यधिक गरीबी की दर 16.2% थी, वहीं 2022-23 में यह घटकर मात्र 2.3% रह गई है (2.15 डॉलर प्रतिदिन की वैश्विक सीमा के अनुसार). यदि 3.00 डॉलर प्रतिदिन की संशोधित सीमा को आधार बनाया जाए, तब भी भारत की अत्यधिक गरीबी दर 2022-23 में केवल 5.3% है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस प्रगति को जन-धन योजना, आधार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), उज्ज्वला योजना, PM किसान, और गरीबों के लिए मुफ्त राशन जैसी योजनाओं का बड़ा योगदान है.

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समावेशी विकास की कहानी
भारत के गिनी इंडेक्स में उल्लेखनीय सुधार और देश को दुनिया का चौथा सबसे समान समाज बनाने में जिन कारकों की प्रमुख भूमिका रही है, उनमें सरकार की अनेक लक्षित और प्रभावशाली योजनाएं शामिल हैं. प्रधानमंत्री जन धन योजना, आधार और डिजिटल पहचान, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), आयुष्मान भारत, स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी पहलों ने सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में अहम भूमिका निभाई है. केंद्र सरकार ने इस अवसर पर एक आधिकारिक बयान में कहा, “आर्थिक सुधार और मजबूत सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की भारत की क्षमता ही उसे विश्व में अलग पहचान देती है। जनधन, डीबीटी और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने लंबे समय से चली आ रही खामियों को दूर करने में मदद की है.” सरकार का मानना है कि ये योजनाएं न केवल गरीबी उन्मूलन में सहायक रही हैं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी निर्णायक साबित हुई हैं. उदाहरण के तौर पर जन धन योजना ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा, जिससे सरकारी लाभ सीधे खातों में पहुंचे.  DBT ने पारदर्शिता बढ़ाई और बिचौलियों की भूमिका समाप्त की. आयुष्मान भारत ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की. स्टैंड-अप इंडिया और पीएम विश्वकर्मा योजना ने स्वरोजगार और कारीगरों की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा दिया. PMGKAY जैसी योजनाओं ने महामारी के कठिन समय में भी गरीबों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की.

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जानकारों के अनुसार, भारत की गिनी इंडेक्स में गिरावट कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे हैं. इसमें सरकार की रणनीतिक नीतियों, डिजिटलीकरण के उपयोग, और समावेशी दृष्टिकोण का बड़ा हाथ है.

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